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जानिए क्यों है शिव का सबसे पवित्र मंदिर पशुपतिनाथ (नेपाल)

नेपाल अध्यात्म की भूमि है और एक समय में यह जगह पूरी तरह से जिंदगी के आध्यात्मिक पहलुओं (Spiritual Facts) से जुड़ी हुई थी। दुर्भाग्य से इस देश को राजनैतिक और आर्थिकस्तर पर बेहद उठा-पटक और पतन का दौर देखना पड़ा। इसी वजह से वे अपने यहां हुए इस उम्दा काम को जो कई सौ सालों में हुआ था, सही तरह से सहेज कर नहीं रख पाए। जो हम आज देख रहे हैं, वे दरअसल बचे हुए अवशेष हैं। लेकिन जो कुछ भी बचा है, वह भी असाधारण है। अगर आप कभी नेपाल घुमने जाते हैं तो आपको वहां......

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सच्चियाय माता मंदिर, ओसियां जिसके गर्भगृह में है स्वयं माँ महिषमर्दिनी

श्री सच्चियाय माताजी का यह शक्ति पीठ भारत में सुविख्यात देवी उपासना का केन्द्र माना जाता है । जहाँ आधिदैविक एंव आधिभौतिक सम्पदाओ का समनिवत रूप युगो युगो से प्रत्यक्ष द्रष्टिगोचर होता रहता है ओसियां नगर की सांस्कृतिक परम्परा और इसकी ऐतिहासिकता इतनी प्राचीन है कि इसका उदभव और विकास जानना सामान्य जिज्ञासु भक्त के सामर्थ के बाहर की बात बन गर्इ है । यही कारण है कि इस शक्तिपीठ के साथ अनेका अनेक चमत्कार चुक्त किवंदितीया का गहरा सम्बन्ध जुड़ा हुआ है......

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51 शक्ति पीठो मे से एक चिंतापूर्णी मंदिर – जहा माता सती के चरण गिरे थे

नौ देवियों में से पांच देवियो के मंदिर हिमाचल प्रदेश में ही स्थित हैं। इनमें माता चिंतापूर्णी के बारे में कहा जाता है कि वे मन की हर तरह की चिंता को दूर कर सुख प्रदान करती हैं। वे पहाड़ों की नौ देवियों और देश के 51 शक्तिपीठों में से एक हैं। चिंतपूर्णी देवी का मंदिर हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में स्थित है। यह स्थान हिंदुओं के प्रमुख धार्मिक स्थलो में से एक है। यह 51 शक्ति पीठो मे से एक है। यहां पर माता सती के चरण गिर थे। इस स्थान पर प्रकृति का......

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चौक जाएंगे आप जानकर पद्मनाभ स्वामी मंदिर का रहस्य

तिरुवनंतपुरम शहर के बीच में स्थित है श्री पद्मनाभ स्वामी मंदिर। इस मंदिर को बहुत ही खूबसूरती से द्रविड़ शैली में बनाया गया है, इस शहर को इस मंदिर के नाम से जाना जाता है। मंदिर में भगवान विष्णु वास करते हैं, यहां भगवान विष्णु, ब्रह्मांडीय नागिन अनाथन पर सहारा लेकर विराजमान की मुद्रा में हैं। मंदिर में भगवान विष्णु की पत्नियां श्रीदेवी और भूदेवी भी उनके साथ हैं। । मंदिर की देख-रेख त्रावणकोर के पूर्व शाही परिवार द्वारा की जाती है।पद्मनाभ स्वामी की......

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नागों के स्वामी भगवान सुब्रमण्य यहाँ देते है काल सर्प दोष से मुक्ति

भारत के प्राचीन तीर्थ स्थानों में से एक कुक्के सुब्रमण्या मंदिर, कर्नाटक राज्य के दक्षिणा कन्नड़ जिले मैंगलोर के पास के सुल्लिया तालुक के सुब्रमण्या के एक छोटे से गांव में स्थित है| यहां भगवान सुब्रमण्या को पूजा जाता है जो सभी नागों के स्वामी माने गए हैं| इस मंदिर के दर्शनों के लिए यहां भक्तों का तांता लगा रहता है सभी लोग यहां होने वाली पूजा में शामिल होने की चाह रखते हुए श्रद्धा भाव से इस पवित्र स्थान पर पहुंचते हैं | कुक्के सुब्रमण्या जी के......

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रामेश्वरम धाम

रामेश्वरम हिंदुओं का एक पवित्र तीर्थ है। यह तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले में स्थित है। यह तीर्थ हिन्दुओं के चार धामों में से एक है। इसके अलावा यहां स्थापित शिवलिंग द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। भारत के उत्तर मे काशी की जो मान्यता है, वही दक्षिण में रामेश्वरम् की है। रामेश्वरम चेन्नई से लगभग सवा चार सौ मील दक्षिण-पूर्व में है। मन्नार की खाड़ी में स्थित द्वीप जहां भगवान् राम का लोक-प्रसिद्ध विशाल मंदिर है। यह हिंद महासागर और बंगाल......

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भगवान् कृष्ण का भव्य और आलोकिक श्री प्रियाकान्त जू मंदिर, वृन्दावन

श्रीप्रियाकान्त जू मन्दिर महाराज श्री के उस संकल्प की परिणिति है जिसमें लाखों लोगों ने अपना सहयोग प्रदान किया है। कोई भी महान कार्य बिना सहयोग के पूरा नहीं हो पाता। सहयोग बड़ा हो या छोटा किसी के महत्व को दरकिनार नहीं किया जा सकता। जब सेतुबन्ध का महान कार्य हुआ तब वानरों के साथ-साथ गिलहरी ने भी अपना योगदान दिया था। इसीलिये लाखों लोगों के सहयोग का परिणाम है 'श्रीप्रियाकान्त जू मंदिर'। ये एक ऐसा धाम होगा जहां आकर भक्तों को आस्था और विश्वास प्राप्त......

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300 साल पुराना है मत्स्य माता मंदिर : यहां होती है व्हेल मछली की हड्डियों की पूजा

यह मंदिर गुजरात में वलसाड तहसील के मगोद डुंगरी गांव में स्थापित है। यदि इस खबर की इस हेडलाइन को पढ़कर आप यह अनुमान लगा रहे हैं कि यह खबर दुनिया के किसी और देश की है, तो आप गलत सोच रहे हैं। यह खबर अपने ही देश, अपने भारत की ही है। अपने ही देश के एक मंदिर में व्हेल मछली की हड्डियों की पूजा कोई पचास-सौ सालों से नहीं बल्कि तीन सौ वर्षों से हो रही है। यह मंदिर गुजरात में वलसाड तहसील के मगोद डुंगरी गांव में स्थापित है, जो यहां मत्स्य माताजी के मंदिर के......

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केदारनाथ धाम / केदारनाथ ज्योतिर्लिंग

केदारनाथ मन्दिर भारत के उत्तराखण्ड राज्य के रूद्रप्रयाग जिले में स्थित है। उत्तराखण्ड में हिमालय पर्वत की गोद में केदारनाथ मन्दिर बारह ज्योतिर्लिंग में सम्मिलित होने के साथ चार धाम और पंच केदार में से भी एक है। यहाँ की प्रतिकूल जलवायु के कारण यह मन्दिर अप्रैल से नवंबर माह के मध्‍य ही दर्शन के लिए खुलता है। पत्‍थरों से बने कत्यूरी शैली से बने इस मन्दिर के बारे में कहा जाता है कि इसका निर्माण पाण्डव वंश के जनमेजय ने कराया था। यहाँ स्थित स्वयम्भू......

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गंगोत्री धाम यात्रा

गंगोत्री पौराणिक काल से ही एक धार्मिक स्थल के रूप मे प्रसिद्ध रही है. प्राचीन समय से ही अनेक ऋषी-मुनि और साधु लोग इस दुर्गम क्षेत्र के पावन धाम से आकर्षित रहें हैं और तथा दूर-दूर से गंगोत्री में आकर साधना एवं तपस्या द्वारा मो़क्ष पाने की चाह रखते हैं. गंगोत्री गंगा नदी का उद्गगम स्थल माना जाता हैइस पावन धाम के कपाट अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर खोले जाते हें और दीपावली के दिन मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं. गंगोत्री एक धार्मिक स्थल है यहां......

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