t>

मूषक क्यों बना गणेश जी का वाहन

Share this

गणेशजी गजबदन हैं, किंतु उनका वाहन छोटा-सा मूषक क्यों है ?

गणेशजी गजबदन और लंबोदर हैं। उनका शरीर अत्यंत शक्तिसंपन्न और उदर बहुत लम्बा (बड़ा) है। प्रायः जिस प्राणी का उदर छोटा होता है, उसके संबंध में कहा जाता है कि उसे मामूली-सी बात भी नहीं पचती और बड़े उदर अर्थात लंबोदर को बड़ी से बड़ी और अत्यंत तीक्ष्ण बात भी सहज ही पच जाती है।

गणेशजी इन गुणों से संपन्न हैं इसी कारण उन्हें गजबदन और लंबोदर कहा जाता है मगर उनका वाहन मूषक है। इसका कारण यह है कि मूषक तार्किकता का प्रतीक है जबकि गणेश बुद्धि के अधिदेव हैं। यह तथ्य है कि बुद्धि सदैव तर्क से परे होती है। जहां तर्क काम नहीं करता वहां बुद्धि काम करती है। यही कारण है कि गणेश (बुद्धि के अधिदेव) मूषक (तार्किकता) पर सवार होते हैं।

गजमुखासुर असुर की कथा

गणेश जी ने अपना वाहन मूषक क्यों चुना इस विषय में कई कथाएं मिलती हैं। एक कथा के अनुसार गजमुखासुर नामक एक असुर से गजानन का युद्ध हुआ। गजमुखासुर को यह वरदान प्राप्त था कि वह किसी अस्त्र से नहीं मर सकता। गणेश जी ने इसे मारने के लिए अपने एक दांत को तोड़ा और गजमुखासुर पर वार किया।

गजमुखासुर इससे घबरा गया और मूषक बनकर भागने लगा। गणेश जी ने मूषक बने गजमुखासुर को अपने पाश में बांध लिया। गजमुखासुर गणेश जी से क्षमा मांगने लगा। गणेश जी ने गजमुखासुर को अपना वाहन बनाकर जीवनदान दे दिया।

एक अन्य कथा

एक अन्य कथा का जिक्र गणेश पुराण में मिलता है। जिसके अनुसार द्वापर युग में एक बहुत ही बलवान मूषक महर्षि पराशर के आश्रम में आकर महर्षि को परेशान करने लगा। उत्पाती मूषक ने महर्षि के आश्रम के मिट्टी के बर्तन तोड़ दिये। आश्रम में रखे अनाज को नष्ट कर दिया। ऋषियों के वस्त्र और ग्रंथों को कुतर डाला।

महर्षि पराशर मूषक की इस करतूत से दुःखी होकर गणेश जी की शरण में गये। गणेश जी महर्षि की भक्ति से प्रसन्न हुए और उत्पाती मूषक को पकड़ने के लिए अपना पाश फेंका। पाश मूषक का पीछा करता हुआ पाताल लोक पहुंच गया और उसे बांधकर गणेश जी के सामने ले आया।

गणेश जी को सामने देखकर मूषक उनकी स्तुति करने लगा। गणेश जी ने कहा तुमने महर्षि पराशर को बहुत परेशान किया है लेकिन अब तुम मेरी शरण में हो इसलिए जो चाहो वरदान मांग लो। गणेश जी के ऐसे वचन सुनते ही मूषक का अभिमान जाग उठा। उसने कहा कि मुझे आपसे कुछ नहीं चाहिए, अगर आपको मुझसे कुछ चाहिए तो मांग लीजिए। गणेश जी मुस्कुराए और मूषक से कहा कि तुम मेरा वाहन बन जाओ।

अपने अभिमान के कारण मूषक गणेश जी का वाहन बन गया। लेकिन जैसे ही गणेश जी मूषक पर चढ़े गणेश जी के भार से वह दबने लगा। मूषक ने गणेश जी से कहा कि प्रभु मैं आपके वजन से दबा जा रहा हूं। अपने वाहन की विनती सुनकर गणेश जी ने अपना भार कम कर लिया। इसके बाद से मूषक गणेश जी का वाहन बनकर उनकी सेवा में लगा हुआ है।

गणेश पुराण में यह भी वर्णन किया गया है कि हर युग में गणेश जी का वाहन बदलता रहता है। सतयुग में गणेश जी का वाहन सिंह है। त्रेता युग में गणेश जी का वाहन मयूर है और वर्तमान युग यानी कलियुग में उनका वाहन घोड़ा है।

Share this

Leave a Comment