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त्रिपुरा सुंदरी मंदिर,त्रिपुरा

Tripura Sundari Temple, Tripura

त्रिपुरा सुंदरी मंदिर, त्रिपुरा के अत्यंत लोकप्रिय मंदिरों में से एक है। हिंदू पौराणिक कथा अनुसार, त्रिपुरा सुंदरी मंदिर माँ काली के 51 शक्ति पीठों में से एक है। इस मंदिर में माँ काली के “सोरोशी” रुप की पूजा की जाती है। मंदिर का स्वरुप कछुआ या कुर्मा के आकार जैसा दिखता है और इसलिए इसे “कुर्मा पीठ” कहते हैं।

 

हिंदू पौराणिक कथा

यह माना जाता है कि सती का दाहिना पैर कटकर यहां गिरा। सती की मृत्यु से दुखी भगवान शिव ने उनके मृतक शरीर को अपने कंधो पर उठया और इतनी उग्रता से तांडव नृत्य करने लगे कि सारे देवता भयभीत हो गए। भगवान शिव को रोकने के लिए, भगवान विष्णु ने सती के शरीर को टुकडों में काटा जो भारत, पाकिस्तान, बर्मा और नेपाल में गिर गएँ।

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जिस स्थान पर उनका दाहिना पैर कटकर गिरा उसे पीठस्थान के रुप में पूजा जाता है। झोपडे के आकार की बनावट और शंक्वाकार की छत के कारण मंदिर की निर्माण शैली बंगाली वास्तुकला से मिलती है। त्रिपुरा सुंदरी मंदिर की पूर्वी दिशा में कल्याण सागर झील स्थित है।

उत्सव

दिवाली के दौरान माता त्रिपुरा सुंदरी मंदिर में भव्‍य स्तर पर दीवाली मेले का आयोजन किया जाता है। जिसमें प्रत्येक वर्ष लाखों की संख्या लोग इस मेले में सम्मिलित होते हैं। राजमाला के अनुसार, मंदिर का निर्माण करने के पश्चात् मंदिर में भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापित की गई थी। लेकिन एक रात महाराजा धन्य माणिक्य के सपने में महा माया आई और उससे कहा कि वह उनकी मूर्ति को चित्तौंग से इस स्थान पर रख दें। इसके बाद माता त्रिपुरा सुंदरी की स्थापना इस मंदिर में कर दी गई।

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