मीराबाई भजन

तनक हरि चितवौ जी

krishna

तनक हरि चितवौ जी मोरी ओर।

हम चितवत तुम चितवत नाहीं

मन के बड़े कठोर।

मेरे आसा चितनि तुम्हरी

और न दूजी ठौर।

तुमसे हमकूं एक हो जी

हम-सी लाख करोर॥

कब की ठाड़ी अरज करत हूं

अरज करत भै भोर।

मीरा के प्रभु हरि अबिनासी

देस्यूं प्राण अकोर॥

Author’s Choices

हर कष्टों के निवारण के लिए जपे ये हनुमान जी के मंत्र, श्लोक तथा स्त्रोत

सूर्य नमस्कार : शरीर को सही आकार देने और मन को शांत व स्वस्थ रखने का उत्तम तरीका

कपालभाति प्राणायाम : जानिए करने की विधि, लाभ और सावधानियाँ

डायबिटीज क्या है, क्यों होती है, कैसे बचाव कर सकते है और डाइबटीज (मधुमेह) का प्रमाणित घरेलु उपचार

कोलेस्ट्रोल : कैसे करे नियंत्रण, घरेलु उपचार, बढ़ने के कारण और लक्षण

केदारनाथ ज्योतिर्लिंग : उत्तराखंड के चार धाम यात्रा में सबसे प्रमुख और सर्वोच्च ज्योतिर्लिंग

गृह प्रवेश और भूमि पूजन, शुभ मुहूर्त और विधिपूर्वक करने पर रहेंगे दोष मुक्त और लाभदायक

लघु रुद्राभिषेक पूजा : व्यक्ति के कई जन्मो के पाप कर्मो का नाश करने वाली शिव पूजा

तो ये है शिव के अद्भुत रूप का छुपा गूढ़ रहस्य, जानकर हक्के बक्के रह जायेंगे

शिव मंत्र पुष्पांजली तथा सम्पूर्ण पूजन विधि और मंत्र श्लोक

श्रीगणेश प्रश्नावली यंत्र के 64 अंकों से जानिए अपनी परेशानियों का हल