जीवन मंत्र

सफलता का रोड़ा “अहंकार और क्रोध”

old-manएक बार एक सेठ पूरे एक वर्ष तक चारों धाम की यात्रा करके आया, और उसने पूरे गॉंव में अपनी एक वर्ष की उपलब्धी का बखान करने के लिये प्रीति भोज का आयोजन किया। सेठ की एक वर्ष की उपलब्धी थी कि वह अपने अंदर से क्रोध-अंहकार को अपने अंदर से बाहर चारों धाम में ही त्याग आये थे। सेठ का एक नौकर था वह बड़ा ही बुद्धिमान था, भोज के आयोजन से तो वह जान गया था कि सेठ अभी अंहकार से मुक्त नही हुआ है किन्तु अभी उसकी क्रोध की परीक्षा लेनी बाकी थी। 

उसने भरे समाज में सेठ से पूछा कि सेठ जी इस बार आपने क्या क्या छोड़ कर आये है ? सेठ जी ने बड़े उत्साह से कहा - क्रोध-अंहकार त्याग कर आया हूं। फिर कुछ देर बाद नौकर ने वही प्रश्न दोबारा किया और सेठ जी का उत्तर वही था अन्तोगत्वा एक बार प्रश्न पूछने पर सेठ को अपने आपे से बाहर हो गया और नौकर से बोला - दो टके का नौकर, मेरी दिया खाता है, और मेरा ही मजाक कर रहा है।

बस इतनी ही देर थी कि नौकर ने भरे समाज में सेठ जी के क्रोध-अंहकार त्याग की पोल खोल कर रख दी। सेठ भरे समाज में अपनी लज्जित चेहरा लेकर रह गया। इससे हमें यह शिक्षा मिलती है दोस्तों, जीवन में हमे कई बार ऐसी परिस्तिथियों का सामना करना पड़ता है जहा हमारे संयम और धैर्य की परीक्षा होती है और आपने पाया होगा की, अक्सर हम यानि की आजकल के नौजवान इसमें Fail हो जाते है, इसके कई कारण हो सकते है, पढाई का बोझ, घरेलू समस्या, आर्थिक तंगी या कुछ और, परन्तु अहंकार और क्रोध किसी भी समस्या का हल हो ही नहीं सकता है , हा, कुछ क्षण के लिए हम संतुष्टि पा सकते है पर इससे हमारा ही नुकसान होता है, एक तरह से हम उसे पोषित कर रहे होते है बार बार ..और एक समय ऐसा आता है की हम या तो Depression की और या मानसिक तनाव से गुजरने लगते है, जिससे हमारे आसपास वाले मित्र, रिस्तेदार और करीबी दोस्त हमसे कतराने लगते है और हमारा Social दायरा दिन ब दिन छोटा होता जाता है और जो हमारे व्यक्तिव और Carrier पर बहुत बुरा प्रभाव डालता है... इसलिए मित्रो जहा तक हो सके क्रोध और अहंकार से बच के रहे . इसके लिए आप Yoga या Art of Living का सहारा ले सकते है जो निसंदेह इन रोगो से मुक्ति दिलाने में सक्षम है, आप भी अपने कमेंट जरूर लिखे इसके बारे में ...

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Aaditi Dave

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