Category - योगासन

योगासन

सूर्य नमस्कार : शरीर को सही आकार देने और मन को शांत व स्वस्थ रखने का उत्तम तरीका

सूर्य नमस्कार क्या है  (Surya Namaskar in hindi) सूर्य नमस्कार योगासनों में सर्वश्रेष्ठ प्रक्रिया है। ‘सूर्य नमस्कार’ का शाब्दिक अर्थ सूर्य को अर्पण या नमस्कार करना है। यह योग आसन शरीर को सही आकार देने और मन को शांत व स्वस्थ रखने का उत्तम तरीका है। यह अकेला अभ्यास ही साधक को सम्पूर्ण योग व्यायाम का लाभ पहुंचाने में समर्थ है। इसके अभ्यास से साधक का शरीर निरोग और स्वस्थ होकर तेजस्वी हो जाता है। तभी तो शास्त्रों में कहा गया है –......

योगासन

कपालभाति प्राणायाम : जानिए करने की विधि, लाभ और सावधानियाँ

कपाल=माथा; भाती= चमकने वाला; प्राणायाम = साँस लेने की प्रक्रिया यह एक शक्ति से परिपूर्ण साँस लेने का प्राणायाम है जो आपको वज़न कम करने में मदद करता है और आपके पूरे शरीर को संतुलित कर देता है, और जो शरीर में ऑक्सिजन ले जाने और पेट की पेशियों को मज़बूत करने का काम करता है। यह पेट की चर्बी को कम करता है और पाचन शक्ति को दुरुस्त करता है। कपालभाति प्राणायाम का महत्व | Importance of Kapalbhati Pranayama जब आप कपालभाति प्राणायाम करते हैं तो आपके शरीर से......

योगासन

पवनमुक्तासन : पेट से जुड़ी हर समस्या को दूर करने के लिए योगासन

शरीर में स्थित पवन (वायु) यह आसन करने से मुक्त होता है। इसलिए इसे पवनमुक्तासन कहा जाता है। ध्यान मणिपुर चक्र में। श्वास पहले पूरक फिर कुम्भक और रेचक। विधि :  भूमि पर बिछे हुए आसन पर चित्त होकर लेट जायें। पूरक करके फेफड़ों में श्वास भर लें। अब किसी भी एक पैर को घुटने से मोड़ दें। दोनों हाथों की अंगुलियों को परस्पर मिलाकर उसके द्वारा मोड़े हुए घुटनों को पकड़कर पेट के साथ लगा दें। फिर सिर को ऊपर उठाकर मोड़े हुए घुटनों पर नाक लगाएं। दूसरा पैर ज़मीन......

योगासन

कर्ण पीडासन : मधुमेह और हर्निया से पीड़ित लोगो के लिए सर्वोत्तम योगासन

‘कर्ण’ का अर्थ है ‘कान‘, ‘पीड‘ का अर्थ है ‘दबाना‘। इस आसन में घुटनों द्वारा दोनों कान दबाए जाते हैं। इसलिए इस आसन का नाम ‘कर्णपीड़ासन‘ है। विधि :  स्वच्छ व हवादार स्थान पर कम्बल या दरी बिछा लीजिए। पीठ के बल सीधे लेट जाइए। धीरे-धीरे दोनों पैरों को सिर के पीछे ले जाइए। पहले दोनों पैर सिर के पीछे सीधे हलासन की स्थिति में रखिए घुटनों से पैरों को मोड़िए दोनों कानों के साथ सटाइए। दोनों घुटनों......

योगासन

अर्ध मत्स्येन्द्रासन : कमर व पीठदर्द से राहत पाने के लिए करे योगासन

मत्स्येन्द्रासन की रचना गोरखनाथ के गुरु स्वामी मत्स्येन्द्रनाथ ने की थी। वे इस आसन में ध्यानस्थ रहा करते थे।मत्स्येन्द्रासन की आधी क्रिया को लेकर ही अर्ध-मत्स्येन्द्रासन प्रचलित हुआ। रीढ़ की हड्डियों के साथ उनमें सेनिकलने वाली नाड़ियों को यह आसन पुष्ट करता है। विधि : बैठकर दोनों पैर लंबे किए जाते हैं। तत्पश्चात बाएँ पैर को घुटने से मोड़कर एड़ी गुदाद्वार के नीचे जमाएँ। अब दाहिने पैर को घुटने से मोड़कर खड़ा कर दें और बाएँ पैर की जंघा से ऊपर ले......

योगासन

मण्डूकासन : पेट से जुड़े सभी रोगों से मुक्ति पाने के लिए करे योगासन

मण्डूकासन वज्रासन समूह का आसन है, यह न केवल व्यक्ति को स्वस्थ बनाता है बल्कि यह सौन्दर्य, शरीर को सहीआकृति, नाड़ियों में सन्तुलन तथा उच्च योगिक अभ्यास के लिए  तैयार करता है। विधि : घुटनों को मोड़ कर वज्रासन में बैठ कर दोनों हाथों की मुट्ठियां बंद कर पेट पर नाभि के दोनों ओर कम से कमडेढ़ से दो इंच की दूरी पर रखते हुए सांस निकालते हुए मुट्ठियों से पैर दबाते हुए आगे झुकें , अधिक से अधिक आगे की ओर झुक जाएं। छाती घुटनों के पास आ जाएगी। यहां पर सिर को......

योगासन

अनुलोम विलोम प्राणायाम : शरीर को स्वस्थ व शक्तिशाली बनाने के लिए करे प्राणायाम

अनुलोम –विलोम प्रणायाम में सांस लेने व छोड़ने की विधि को बार-बार दोहराया जाता है। इस प्राणायाम को ‘नाड़ी शोधक प्राणायाम’ भी कहते है। अनुलोम-विलोम को रोज करने से शरीर की सभी नाड़ियों स्वस्थ व निरोग रहती है। इस प्राणायाम को हर उम्र के लोग कर सकते हैं। वृद्धावस्था में अनुलोम-विलोम प्राणायाम योगा करने से गठिया, जोड़ों का दर्द व सूजन आदि शिकायतें दूर होती हैं। विधि :  दरी व कंबल स्वच्छ जगह पर बिछाकर उस पर अपनी सुविधानुसार पद्मासन, सिद्धासन......

योगासन

वृक्षासन : मानसिक तनाव को दूर करने के लिए करे योगासन

इससे पैरों की स्थिरता और मजबूती का विकास होता है। यह कमर और कुल्हों के आस पास जमीं अतिरिक्त चर्बी को हटाता है तथा दोनों ही अंग इससे मजबूत बने रहते हैं। इस सबके कारण इससे मन का संतुलन बढ़ता है। मन में संतुलन होने से आत्मविश्वास और एकाग्रता का विकास होता है। इसे निरंतर करते रहने से शरीर और मन में सदा स्फूर्ति बनी रहती है। विधि :  पहले सावधान मुद्रा में खड़े हो जाएं। फिर दोनों पैरों को एक दूसरे से कुछ दूर रखते हुए खड़े रहें और फिर हाथों को सिर के......

योगासन

उर्ध्वोत्तानासन : मोटापे व चर्बी को घटाने के लिए करे उर्ध्वोत्तानासन

आसन परिचय :  उर्ध्व का अर्थ होता है ऊपर और तान का अर्थ तानना अर्थात शरीर को ऊपर की और तानना ही उर्ध्वोत्तानासन है। अनजाने में ही व्यक्ति कभी-कभी आलसवश दोनों हाथ ऊपर करके शरीर तान देता है। शरीर को ऊपर की ओर तानते हुए त्रिबंध की स्थिति में स्थिर रहना चाहिए। उर्ध्वोत्तानासन को रीढ़ विकृतियों में, कमजोर पैरों की स्थिति में, मोटापे में, ड्रॉपिंग शोल्डर व नैरो चेस्ट की स्थिति में योग चिकित्सक की सलाह अनुसार करना चाहिए तो लाभ मिलेगा। यह अति उत्तम और सरल......

योगासन

मयूरासन : फेफड़ो व हाथों को मजबूत बनाने के लिए करे योगासन

इस आसन में मयूर अर्थात मोर की आकृति बनती है, इससे इसे मयूरासन कहा जाता है। ध्यान मणिपुर चक्र में। श्वास बाह्य कुम्भक। विधिः जमीन पर घुटने टिकाकर बैठ जायें। दोनों हाथ की हथेलियों को जमीन पर इस प्रकार रखें कि सब अंगुलियाँ पैर की दिशा में हों और परस्पर लगी रहें। दोनों कुहनियों को मोड़कर पेट के कोमल भाग पर, नाभि के इर्दगिर्द रखें। अब आगे झुककर दोनों पैर को पीछे की लम्बे करें। श्वास बाहर निकाल कर दोनों पैर को जमीन से ऊपर उठायें और सिर का भाग नीचे......

error: Content is protected !!