Category - उपनिषद

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मुण्डकोपनिषद – मस्तिक्ष को अत्यधिक शक्ति देने वाला

मदकू द्वीप मुण्डकोपनिषद के रचयिता ऋषि माण्डूक्य की तप स्थली रही है। यही पर उन्होंने इसकी रचना करी थी, मुण्डकोपनिषद अथर्ववेद की शौनकीय शाखा से सम्बन्धित है। इसमें......

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छान्दोग्योपनिषद – ‘ॐकार’ की अध्यात्मिक महत्ता को समझाता उपनिषद

सामवेद की तलवकार शाखा में इस उपनिषद को मान्यता प्राप्त है। इसमें दस अध्याय हैं। इसके अन्तिम आठ अध्याय ही इस उपनिषद में लिये गये हैं। यह उपनिषद पर्याप्त बड़ा है। नाम के......

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कठोपनिषद – नचिकेता और यमराज का संवाद

कठोपनिषद – नचिकेता और यमराज का संवाद –  Kathopnishad in hindi pdf १. शान्तिपाठ ॐ सह नाववतु। सह नौ भुनक्तु। सह वीर्यं कर वावहै। तेजस्वि नावधीतमस्तु। मा विद्विषावहै। ॐ शांति: शांति:......

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ईशावास्योपनिषद – आत्मा के यथार्थ स्वरूप का प्रतिपादन करता उपनिषद

१. शांतिपाठ ॐ वह पूर्ण है और यह भी पूर्ण है; क्योंकि पूर्ण से पूर्ण की ही उत्पत्ति होती है तथा पुर का पूर्णत्व लेकर पूर्ण ही बच रहता है। त्रिविध ताप की शांति हो। २. सम्बन्ध......

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शुक्ल यजुर्वेद के उपनिषद के अंतर्गत आने वाले उपनिषद

शुक्ल यजुर्वेद के उपनिषद : इशावास्योपनिषद …………………………यजुर्वेद सहिंता के चालीसवें अध्याय को ईशावास्योपनिषद कहा जाता है। यह अत्यंत प्राचीन पद्यात्मक उपनिषद है। इस......

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केनोपनिषद – ब्रह्म-चेतना के प्रति जिज्ञासा को शांत करने वाला उपनिषद का सार

१. शान्तिपाठ येनेरिता: प्रवर्तन्ते प्राणिनः स्वेषु कर्मसु। तं वन्दे परमात्मानं स्वात्मानं सर्वदेहिनाम॥ यस्य पादांशुसम्भूतं विश्वं भाति चराचरम। पूर्णानंदं गुरुं......

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उपनिषद – वैदिक दर्शन के प्रतिपादक ग्रन्थ

उपनिषद वैदिक दर्शन के प्रतिपादक ग्रन्थ हैं। वैदिक साहित्य में सबसे अंत में परिगणित होने के कारण तथा उच्च दार्शनिक चिंतन के कारण इन्हें वेदांत भी कहा जाता है। सम्प्रति......

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बृहदारण्यकोपनिषद – प्रलय के बाद ‘सृष्टि की उत्पत्ति’ का वर्णन करता उपनिषद

यह उपनिषद शुक्ल यजुर्वेद की काण्व-शाखा के अन्तर्गत आता है। ‘बृहत’ (बड़ा) और ‘आरण्यक’ (वन) दो शब्दों के मेल से इसका यह ‘बृहदारण्यक’ नाम पड़ा है। इसमें छह अध्याय हैं और......

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श्वेताश्वतरोपनिषद – जगत का मूल कारण और उत्पत्ति को दर्शाता उपनिषद

कृष्ण यजुर्वेद शाखा के इस उपनिषद में छह अध्याय हैं। इनमें जगत का मूल कारण, ॐकार-साधना, परमात्मतत्त्व से साक्षात्कार, ध्यानयोग, योग-साधना, जगत की उत्पत्ति, संचालन और विलय का......

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सामवेदोपनिषद – साम के भेदों और ॐ की उत्पत्ति का वर्णन करता उपनिषद

सामवेद के उपनिषद छान्दोग्योपनिषद  यह अत्यंत प्राचीन उपनिषद है। तलवकार शाखा के छान्दोग्य ब्रह्मण के अंतिम ८ अध्याय इस उपनिषद के रूप में प्रसिद्द है। यह विशालकाय प्राचीन......

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