Category - पुराण

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लिंग पुराण का रहस्य

'लिंग पुराण' शैव सम्प्रदाय का पुराण है। 'लिंग' का अर्थ शिव की जननेन्द्रिय से नहीं अपितु उनके 'पहचान चिह्न' से है, जो अज्ञात तत्त्व का परिचय देता है। इस पुराण में लिंग का अर्थ विस्तार से बताया गया है। यह पुराण प्रधान प्रकृति को ही लिंग रूप मानता......

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कूर्म पुराण

According to the hindu religion beliefs  यह माना जाता है कि  lord Vishnu ‘कूर्मावतार’ अर्थात् कच्छप | Tortoise रूप में समुद्र मंथन के समय मन्दराचल को अपनी पीठ पर धारण करने के प्रसंग में राजा इन्द्रद्युम्न को......

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मत्स्य पुराण

वैष्णव सम्प्रदाय से सम्बन्धित 'मत्स्य पुराण'  fast,  Festival,  Shrine, Donation, राजधर्म और Architecture की दृष्टि से एक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण पुराण है। इस puran  की श्लोक संख्या चौदह हज़ार है। इसे दो सौ......

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अग्नि पुराण

अग्नि पुराण ज्ञान का विशाल भण्डार है। स्वयं अग्निदेव ने इसे महर्षि वसिष्ठ को सुनाते हुए कहा था- आग्नेये हि पुराणेऽस्मिन् सर्वा विद्या: प्रदर्शिता: अर्थात 'अग्नि पुराण' में......

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स्कन्द पुराण

पुराणों के क्रम में इसका तेरहवां स्थान है। अपने वर्तमान में इसके खंडात्मक और संहितात्मक दो रूप उपलब्ध हैं और दोनों में से प्रत्येक में 81 हज़ार  Shlok हैं। इस प्रकार यह आकार की......

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शिव पुराण

'शिव पुराण' का सम्बन्ध शैव मत से है। इस पुराण में प्रमुख रूप से शिव-भक्ति और शिव-महिमा का प्रचार-प्रसार किया गया है। प्राय: सभी पुराणों में शिव को त्याग, तपस्या, वात्सल्य तथा......

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वामन पुराण

'वामन पुराण' | Vaman Puran नाम से तो वैष्णव पुराण लगता है, क्योंकि इसका नामकरण विष्णु के 'वामन अवतार' के आधार पर किया गया है, परन्तु वास्तव में यह शैव पुराण है। इसमें शैव मत का......

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भविष्य पुराण

सूर्योपासना और उसके महत्त्व का जैसा व्यापक वर्णन 'भविष्य पुराण' में प्राप्त होता है। वैसा किसी अन्य पुराण में नहीं उपलब्ध होता। इसलिए इस पुराण को 'सौर ग्रंथ' भी कहते हैं। यह......

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मार्कण्डेय पुराण

'मार्कण्डेय पुराण' आकार में छोटा है। इसके एक सौ सैंतीस अध्यायों में लगभग नौ हज़ार  Shlok हैं। मार्कण्डेय ऋषि द्वारा इसके कथन से इसका नाम 'मार्कण्डेय पुराण' पड़ा। यह पुराण......

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ब्रह्म वैवर्त पुराण

यह वैष्णव puran है। इस पुराण में Bhagwan Krishna को ही प्रमुख इष्ट मानकर उन्हें सृष्टि का कारण बताया गया है। 'ब्रह्मवैवर्त' शब्द का अर्थ है- ब्रह्म का विवर्त अर्थात् ब्रह्म की रूपान्तर......

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