Category - योग

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कर्मयोग – भगवत गीता, श्री राम शर्मा आचार्य और सद गुरु के अनुसार

कर्मयोग से तात्पर्य :- “अनासक्त भाव से कर्म करना”। कर्म के सही स्वरूप का ज्ञान। कर्मयोग दो शब्दों से मिलकर बना है – ‘कर्म’ तथा ‘योग’ । कर्मयोग के सन्दर्भ ग्रन्थ – गीता......

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पतञ्जलि अष्टांग योग – आत्मा को परमात्मा से जोड़ने की प्रक्रिया

गणित की संख्याओं को जोड़ने के लिए भी ‘ yog ‘ शब्द का प्रयोग किया जाता है परन्तु  spiritual  पृष्ठ भूमि में जब ‘योग’ शब्द का प्रयोग किया जाता है तब उसका अर्थ आत्मा को परमात्मा......

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अत्यंत सरल ध्यान योग विधि

ध्यान या मेडिटेशन (Meditation) का लक्ष्य एकाग्रता और मन की शान्ति को प्राप्त करना है, और इस प्रकार अंततः इसका उद्देश्य आत्म-चेतना और आंतरिक शांति के एक ऊँचे स्तर पर चढ़ना है। यह......

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प्राणयाम में उपयोगी बन्धत्रय

Yogasan प्राणायाम एव बंधो के द्वारा हमारे शरीर से जिस शक्ति का बहिर्गमन होता है , उसे रोककर अन्तमुर्खी करते है बंध का अर्थ ही है बांधना, रोकना ये बंध प्राणायाम में अत्यंत सहायक......

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ध्यान योग की सरलतम विधियां

जो लोग शरीर के तल पर ज्यादा संवेदनशील हैं, उनके लिए ऐसी विधियां हैं जो शरीर के माध्यम से ही आत्यंतिक अनुभव पर पहुंचा सकती हैं। जो भाव-प्रवण हैं, भावुक प्रकृति के हैं, वे......

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प्राणायाम की सम्पूर्ण प्रक्रिया

यघपि प्राणायाम की विभिन्न विधियाँ शास्त्रो में वर्णित हे और प्रत्येक  Pranayama का अपना एक विशेष महत्व है तथापि सभी प्राणायामों का व्यक्ति प्रतिदिन अभ्यास नहीं कर सकता अतः......

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उपयोगी प्राणायाम

प्राणायाम आरम्भ करने की विधि :  जब भी आप प्राणायाम करे आप की रीढ़ की हड्डी सीधी होनी चाहिए इसके लिए आप किसी भी ध्यानात्मक आसन में बैठ जाये जैसे सिद्धासन, पझासन, सुखासन......

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ध्यान के 100 लाभ

नियमित meditation अभ्यास के लाभों में अनेक प्रकार से सूचित किया गया है। ध्यान अभ्यास से मन का तनाव कम, शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली का मजबूत बनना, बेहतर संगठित सोचना, एकाग्रता में......

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ध्यान से व्यक्तिगत और आध्यात्मिक लाभ

ध्यान साधना क्या है? हमारे समक्ष पहला प्रश्न है: ध्यान साधना क्या है? ध्यान साधना और अधिक हितकारी मनोदशा या रवैया विकसित करने के लिए स्वयं को अभ्यस्त बनाने की विधि है। यह......

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Yoga in Hindi | Types of Yoga

परिभाषा : –  योग का शाब्दिक अर्थ है – जोड़, सम्बन्ध या मिलन| प्रत्येक व्यक्ति का किसी न किसी व्यक्ति, वस्तु, वौभव से योग होता ही है| पिता-पुत्र, पति-पत्नी का आपस में लौकिक......

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