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जानिए त्राटक द्वारा आज्ञाचक्र ध्‍यान साधना विधि और सावधानिया

आज्ञाचक्र ध्‍यान साधना (Aagya Chakra Dhyan Sadhna) जिसे हम ध्‍यान कहते है वो आज्ञा चक्र ध्‍यान ही है मगर इसको सीधे ही करना लगभग असम्‍भव है उसके लिये साधक को पहले त्राटक करना चाहिये और एकाग्रता हासिल होने पर ध्‍यान का अभ्‍यास आरम्‍भ करना चाहिये। इस त्राटक में हमकों अपनी आंख के अंदर दिखने वाले अंधेरे में नजर जमानी होती है मगर नये साधक के लिये सीधे ही आज्ञाचक में नजर जमाना मुश्किल होता है इसलिये इसके अभ्‍यास के पहले त्राटक का अभ्‍यास कर लीजिये।......

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योग निद्रा करने की विधि और आध्यात्मिक लाभ

योग निद्रा और योगासन योगासन अभ्यास शरीर में ऊर्जा का स्तर बढ़ाते हैं। योग निद्रा इस ऊर्जा को संरक्षित एवं समेकित करती हैं जिससे शरीर व मन को विश्राम मिलता है। योग निद्रा आपको प्राणायाम और ध्यान के लिए तैयार करती है। अतः यह आवश्यक हैं कि योगासन के पश्चात् आप उचित समय योग निद्रा के लिए रखे। निद्रा का मतलब आध्यात्मिक नींद। यह वह नींद है, जिसमें जागते हुए सोना है, सोने व जागने के बीच की स्थिति है। प्रारंभ में यह किसी योग विशेषज्ञ से सीखकर करें तो......

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जानिए सोने के लिए (निंद्रा) कोनसा तरीका आध्यात्मिक दृष्टि से सर्वोत्तम है

पश्चिम दिशा में पैर करके सोने का तरीका (Sound sleep by Spiritual Exercise) : शांत निद्रा कैसे लें, इस लेख में हम अध्ययन करेंगे कि पश्चिम दिशा में पैर करके सोना सबसे उत्तम सोने का तरीका कैसे होता है, इस विषय पर अध्ययन पूर्णत: आध्यात्मिक दृष्टिकोण से किया गया है । इससे हम योग्य निर्णय ले पाएंगे कि शांत निद्रा लेने के लिए हमें किस दिशा में पैर करके सोना चाहिए । पश्चिम दिशा में पैर करके सोने का तरीका- आध्यात्मिक प्रभाव पश्चिम दिशा में पैर करके सोने......

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सद्गुरु जग्गी वासुदेव के अनुसार मानसिक तनाव, डिप्रेशन, बेचैनी जैसी बीमारियां के है ये प्रमुख कारण

Depression in Hindi : पिछली पीढ़ी की तुलना में इस पीढ़ी में डिप्रेशन के मामलों में अचानक उछाल आया है। मानसिक तनाव, डिप्रेशन, बेचैनी जैसी कई बीमारियां आज काफी बढ़ गई हैं। हमारी पिछली पीढ़ी को ऐसी परेशानियों का सामना कभी नहीं करना पड़ा। हमारे समाज में आज क्या बदल गया है? सद्गुरु हमें इसके कारण और इससे बचने के कुछ बहुत सरल तरीके बता रहे हैं। सबसे बुनियादी कारण – कम गतिविधि सद्‌गुरु : आज दुनिया में डिप्रेशन के लक्षण वास्तव में बढ़ गए हैं। इसका सबसे......

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सद्गुरु जग्गी वासुदेव द्वारा सिद्ध ईशा योग क्रिया ध्यान लगाने की सरल विधी

आध्यात्मिक विकास की संभावनाएं जो पहले केवल योगियों और संयासियों के लिए ही थी अब ईशा क्रिया के द्वारा सभी लोगों को उनके घर की सुख सुविधा में बैठे प्राप्त हो सकती है। योग विज्ञान के शाश्‍वत ज्ञान का हिस्‍सा है ईशा क्रिया। सद्‌गुरु ने ईशा क्रिया को एक सरल और शक्तिशाली विधि के रूप में पेश किया है। ईशा का अर्थ है, “वह जो सृष्टि का स्रोत है” और क्रिया का अर्थ है, “आंतरिक कार्य।” ईशा क्रिया का उद्ददेश्य मनुष्य को उसके अस्तित्व के स्रोत से संपर्क बनाने......

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प्राणायाम के प्रकार और उनको करने की शास्त्रोक्त विधी

प्राणायाम आरम्भ करने की विधि :  Pranayama in Hindi :  जब भी आप प्राणायाम करे आप की रीढ़ की हड्डी सीधी होनी चाहिए इसके लिए आप किसी भी ध्यानात्मक आसन में बैठ जाये जैसे सिद्धासन, पझासन, सुखासन, वज्रासन, आदि यदि आप किसी भी आसन में नहीं बैठ सकते तो कुर्सी पर भी सीधे बैठकर प्राणायाम कर सकते है | परन्तु रीढ़ की हड्डी को सदा सीधा रखे आजकल लोग चलते-फिरते या प्रातः भर्मण के समय भी घूमते हुए नाड़ी सोधन आदि प्राणायामों को करते रहते है , यह सब गलत प्रक्रिया है ......

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कर्मयोग – भगवत गीता, श्री राम शर्मा आचार्य और सद गुरु के अनुसार

कर्मयोग से तात्पर्य :- “अनासक्त भाव से कर्म करना”। कर्म के सही स्वरूप का ज्ञान। कर्मयोग दो शब्दों से मिलकर बना है – ‘कर्म’ तथा ‘योग’ । कर्मयोग के सन्दर्भ ग्रन्थ – गीता, योगवाशिष्ठ एवं अन्य। 1. कर्मों का मनोदैहिक वर्गीकरण : कर्म से तात्पर्य है कि वे समस्त मानसिक एवं शारीरिक क्रियाएँ । ये क्रियाएँ दो प्रकार की हो सकती है। ऐच्छिक एवं अनैच्छिक। अनैच्छिक क्रियायें वे क्रियाएं हैं जो कि स्वतः होती हैं जैसे छींकना, श्वास-प्रश्वास का चलना, हृदय का......

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पतञ्जलि अष्टांग योग – आत्मा को परमात्मा से जोड़ने की प्रक्रिया

गणित की संख्याओं को जोड़ने के लिए भी ‘ yog ‘ शब्द का प्रयोग किया जाता है परन्तु  spiritual  पृष्ठ भूमि में जब ‘योग’ शब्द का प्रयोग किया जाता है तब उसका अर्थ आत्मा को परमात्मा से जोड़ना होता है। महर्षि पंतजलि ने आत्मा को परमात्मा से जोड़ने की क्रिया को आठ भागों में बांट दिया है। यही क्रिया अष्टांग योग के नाम से प्रसिद्ध है। आत्मा में बेहद बिखराव (विक्षेप) है जिसके कारण वह परमात्मा, जो आत्मा में भी व्याप्त है, की अनुभूति......

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अत्यंत सरल ध्यान योग विधि

ध्यान लगाने की विधि | Meditation Kaise Kare  ध्यान या मेडिटेशन का लक्ष्य एकाग्रता और मन की शान्ति को प्राप्त करना है, और इस प्रकार अंततः इसका उद्देश्य आत्म-चेतना और आंतरिक शांति के एक ऊँचे स्तर पर चढ़ना है। यह जानकारी आपके लिए कुछ आश्चर्यजनक होगी कि ध्यान आप कहीं भी और किसी भी समय कर सकते हैं, अपने आपको शांति तथा सौम्यता की ओर पहुंचा सकते हैं, इस दौरान इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप के आसपास क्या हो रहा है। यह लेख ध्यान की मूल बातों से......

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प्राणयाम में उपयोगी बन्धत्रय

Yogasan प्राणायाम एव बंधो के द्वारा हमारे शरीर से जिस शक्ति का बहिर्गमन होता है , उसे रोककर अन्तमुर्खी करते है बंध का अर्थ ही है बांधना, रोकना ये बंध प्राणायाम में अत्यंत सहायक हे | बिना बंध के प्राणायाम अधूरे है इन बंधो का क्रमशः वर्णन करते है | जालंधर बन्ध: पद्मासन या सिद्धासन  में सीधे बैठकर सास को अन्दर भर लीजिये दोनों हाथ घुटने पर टिके हुए हो अब ठोडी को थोड़ा नीचे झुकाते हुए कंठकूप  में लगाना जालंधर बन्ध कहलाता हे | दृष्टि भ्रूमध्य में......

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