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श्रीमद भगवद गीता अध्याय – 2 ( सांख्य योग )

– सांख्ययोग (Sankhya Yog) अर्जुन की कायरता के विषय में श्री कृष्णार्जुन-संवाद: संजय उवाचतं तथा कृपयाविष्टमश्रुपूर्णाकुलेक्षणम्‌ । विषीदन्तमिदं वाक्यमुवाच...

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श्रीमद भगवद गीता अध्याय – 1 (अर्जुनविषाद योग )

– अर्जुनविषाद योग : Arjun Vishad Yog दोनों सेनाओं के प्रधान-प्रधान शूरवीरों की गणना और सामर्थ्य का कथन: धृतराष्ट्र उवाच धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता...

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गीता अध्याय -18

– मोक्षसंन्यास योग – त्याग का विषय: अर्जुन उवाच सन्न्यासस्य महाबाहो तत्त्वमिच्छामि वेदितुम्‌ । त्यागस्य च हृषीकेश पृथक्केशिनिषूदन ॥  भावार्थ :...

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गीता अध्याय -17

 – श्रद्धात्रयविभाग योग – श्रद्धा का और शास्त्रविपरीत घोर तप करने वालों का विषय : अर्जुन उवाच ये शास्त्रविधिमुत्सृज्य यजन्ते श्रद्धयान्विताः। तेषां...

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गीता अध्याय -16

– दैवासुरसम्पद्विभाग योग – फलसहित दैवी और आसुरी संपदा का कथन: श्रीभगवानुवाच अभयं सत्त्वसंशुद्धिर्ज्ञानयोगव्यवस्थितिः। दानं दमश्च यज्ञश्च...

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गीता अध्याय -15

– पुरुषोत्तमयोग – संसार वृक्ष का कथन और भगवत्प्राप्ति का उपाय : श्रीभगवानुवाच ऊर्ध्वमूलमधः शाखमश्वत्थं प्राहुरव्ययम्‌ । छन्दांसि यस्य पर्णानि यस्तं...

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गीता अध्याय -14

– गुणत्रयविभागयोग – ज्ञान की महिमा और प्रकृति–पुरुष से जगत्‌ की उत्पत्ति: श्रीभगवानुवाच परं भूयः प्रवक्ष्यामि ज्ञानानं मानमुत्तमम्‌ ।...

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गीता अध्याय -13

– क्षेत्र–क्षेत्रज्ञविभागयोग – ज्ञानसहित क्षेत्र–क्षेत्रज्ञ का विषय: श्रीभगवानुवाच इदं शरीरं कौन्तेय क्षेत्रमित्यभिधीयते। एतद्यो वेत्ति...

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गीता अध्याय -12

– भक्तियोग – साकार और निराकार के उपासकों की उत्तमता का निर्णय और भगवत्प्राप्ति के उपाय का विषय: अर्जुन उवाच एवं सततयुक्ता ये भक्तास्त्वां...

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