आरती संग्रह

श्री गणपति जी की आरती 3

ganesh-ji

           

श्री गणपति जी आरती (Shri Ganpati ji ki Aarti 3 in hindi Mp3)

गणपति की सेवा मंगल मेवा सेवा से सब विध्न टरें |

तीन लोक तैंतीस देवता द्वार खड़े सब अर्ज करे ||

ऋद्धि-सिद्धि दक्षिण वाम विरजे आनन्द सौं चंवर दुरें |

धूप दीप और लिए आरती भक्त खड़े जयकार करें ||

गुड़ के मोदक भोग लगत है मूषक वाहन चढ़े सरें |

सौम्य सेवा गणपति की विध्न भागजा दूर परें ||

भादों मास शुक्ल चतुर्थी दोपारा भर पूर परें |

लियो जन्म गणपति प्रभु ने दुर्गा मन आनन्द भरें ||

           

श्री शंकर के आनन्द उपज्यो, नाम सुमरयां सब विध्न टरें |

आन विधाता बैठे आसन इन्द्र अप्सरा नृत्य करें ||

देखि वेद ब्रह्माजी जाको विध्न विनाशन रूप अनूप करें

पग खम्बा सा उदर पुष्ट है चन्द्रमा हास्य करें |

दे श्राप चन्द्र्देव को कलाहीन तत्काल करें ||

चौदह लोक में फिरें गणपति तीन लोक में राज करें

उठ प्रभात जो आरती गावे ताके सिर यश छत्र फिरें |

गणपति जी की पूजा पहले करनी काम सभी निर्विध्न करें |

श्री गणपति जी की हाथ जोड़कर स्तुति करें ||

           

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