योगासन

शीतलि प्राणायाम : उच्च रक्त्चाप को कम करने के लिए करे शीतलि प्राणायाम

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ध्यानात्मक आसन में बैठकर हाथ घुटने पर रखे ! जिव्हा को नालीनुमा मोड़कर मुँह खुला हुए मुँह से पूरक करें जिव्हा से धीरे धीरे स्वास लेकर फेफड़ो को पूरा भरे कुछ षण रोककर मुँह को बंद करके दोनों नासिकाओं से रेचक करें तत्पश्चात पुनः जिव्हा मोड़कर मुँह से पूरक व नाक से रेचक करें इस तरह ८ से १० बार करें ! शीतकाल में इसका अभ्याश कम करें !

विशेष :

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कुम्भक के साथ जालंधर बन्ध भी लगा सकते है कफ प्रकृति एव टॉन्सिल के रोगियों को शीतलि व सीत्कारी प्राणायाम नहीं करना चाहिए |

लाभ :

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१. जिव्हा, मुँह व गले के रोगो में लाभप्रद है गुल्म, प्लीहा, ज्वर अजीर्ण आदि ठीक होते है !

२. इसकी सिद्धि से भूख – प्यास पर विजय प्राप्त होती है ऐसा योग ग्रन्थो में कहा गया है !

३.उच्च रक्त्चाप को कम करता है पित के रोगो में लाभप्रद है ! रक्त्शोधन भी करता है !

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About the author

Pandit Niteen Mutha

नमस्कार मित्रो, भक्तिसंस्कार के जरिये मै आप सभी के साथ हमारे हिन्दू धर्म, ज्योतिष, आध्यात्म और उससे जुड़े कुछ रोचक और अनुकरणीय तथ्यों को आप से साझा करना चाहूंगा जो आज के परिवेश मे नितांत आवश्यक है, एक युवा होने के नाते देश की संस्कृति रूपी धरोहर को इस साइट के माध्यम से सजोए रखने और प्रचारित करने का प्रयास मात्र है भक्तिसंस्कार.कॉम

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