योगासन

शशांकासन – मानसिक तनाव कम करने का सर्वोत्तम आसान, जाने उचित विधि और लाभ

शशांकासन योग विधि, लाभ और सावधानी

Shashankasana Yoga poses : आज का मानव सबसे ज़्यादा तनाव (Depression) और परेशानी से घिरा हुआ है। जिस कारण से वह कई रोगों से घिर जाता है और उसका स्वभाव भी बेहद चिड़चिड़ा हो जाता है। ऐसे लोगों के लिए यह शशांकासन (shashankasana benefits) एक दवाई की तरह है। जिसको नियमित करने से वे न केवल तनाव से दूर रहेंगें बल्कि स्वास्थ्य भी रहेंगे। कुछ विशेषज्ञों के अनुसार नियमित शशांकासन (Hare Pose Yoga) करने से हम लोग हृदय रोग, मधुमेह और दमा रोग से दूर रहते हैं, नसें लचीली होकर अच्छी तरह से काम करती हैं। इतना ही नहीं यह आसन कामविकारों से निजात दिलाने में भी मदद करता है। इसके अलावा यह नारी गर्भाशय व जननांगों को भी स्वास्थ्य रखता है और रक्त का संवहन चेहरे की ओर बढ़ाकर चेहरे की सुंदरता में नैसर्गिक वृद्धि भी करता है।

शशांकासन क्या है ?

शशांक का अर्थ होता है खरगोश। इस योग मुद्रा में शरीर खरगोश के समान आकृति धारण कर लेता है, इसीलिए इसको शशांकासन के नाम से जाना जाता है।

शशांकासन करने की विधि

  1. सबसे पहले भूमि पर दरी या चटाई बिछाकर बैठ जाएं।
  2. दाहिने पैर को मोड़कर पीछे की ओर यानी दाहिने नितम्ब (हिप्स) के नीचे रखें।
  3. ठीक इसी तरह बाएं पैर को मोड़कर पीछे की ओर यानी बाएं नितम्ब (हिप्स) के नीचे रखें और बैठ जाएं।
  4. अब सांस लेते हुए दोनों हाथों को ऊपर की ओर करें।
  5. इसके बाद धीरे-धीरे सांस को बाहर छोड़ते हुए आगे की ओर झुकें।
  6. सिर और हथेलियों को फर्श पर रखें।
  7. अब सांस लेते हुए सबसे पहले पेट व सीने को उठाए और हाथों को उठाते हुए प्रारम्भ की स्तिथि में आ जाएं।
  8. इसी तरह से इस क्रिया को 4 से 5 बार करें।

शशांकासन से लाभ (shashankasana benefits)

  1. शशांकासन तनाव कम करने में: इस आसन के नियमित अभ्यास से तनाव एवं चिंता को बहुत हद तक कम किया जा सकता है। यही नहीं यह योग मुद्रा
    क्रोध, भय, शोक आदि को कम करने में अहम भूमिका निभाता है।
  2. शशांकासन गुस्सा कम करने में : अगर किन्ही को गुस्सा ज़्यदा आता है तो उन्हें शशांकासन का अभ्यास जरूर करनी चाहिए।
  3. शशांकासन प्रजनन अंगों के लिए: यह प्रजनन अंगों को पुष्ट करते हुए प्रजनन से सम्बंधित बहुत सारी परेशानियों से बचाता है।
  4. शशांकासन लिवर एवं किडनी के लिए: यह आसन यकृत और गुर्दों की सक्रियता को बढ़ाता है और इन्हें स्वस्थ रखता है।
  5. पेट की मजबूती के लिए : यह उदर के भाग को मजबूत करते हुए पाचन संबंधी परेशानियों से आपको बचाता है।
  6. शशांकासन साइटिका के लिए: अगर आप किसी विशेषज्ञ के सामने इस आसन कर अभ्यास करते है तो साइटिका में बहुत हद तक आराम मिल सकता है।
  7. शशांकासन यौन विकारों में मददगार: यौन विकारों के मामलों में यह लाभकारी होता है।
  8. ह्रदय रोगियों के लिए: शशांकासन के अभ्यास से हृदय रोग में बहुत आराम मिलता है। इसलिए चाहिए कि हृदय रोग से पीड़ित व्यक्ति इस आसन का अभ्यास जरूर करें।
  9. पीठ दर्द में लाभकारी: पीठ एवं गर्दन दर्द के लिए यह लाभकारी योगाभ्यास है।
  10. शशांकासन मेमोरी के लिए : यह आसन आंखों एवम मस्तिष्क के लिए लाभकारी है, मस्तिष्क में खून की यथासंभव पूर्ति करते हुए मेमोरी बढ़ाने में सहायक है।
  11. फेंफड़ों मजबूती के लिए: फेंफड़ों को मजबूत करने के लिए यह एक उत्तम योगाभ्यास है।

शशांकासन करते समय सावधानी

– यदि आप स्लिप डिस्क या हाई ब्लड प्रेशर से सम्बंधित किसी भी बीमारी से ग्रसित है तो शशांकासन न करें।
– पेट दर्द, कमर दर्द, सिर की समस्या या घुटने के रोग से पीडित व्यक्ति इस आसन को न करें।
– अगर इस योग को करते समय आपको कोई तकलीफ हो तो योग विशेषज्ञ की राय ज़रूर लें।

About the author

Pandit Niteen Mutha

नमस्कार मित्रो, भक्तिसंस्कार के जरिये मै आप सभी के साथ हमारे हिन्दू धर्म, ज्योतिष, आध्यात्म और उससे जुड़े कुछ रोचक और अनुकरणीय तथ्यों को आप से साझा करना चाहूंगा जो आज के परिवेश मे नितांत आवश्यक है, एक युवा होने के नाते देश की संस्कृति रूपी धरोहर को इस साइट के माध्यम से सजोए रखने और प्रचारित करने का प्रयास मात्र है भक्तिसंस्कार.कॉम

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