आरती संग्रह

श्री शंकर जी की आरती

shivaa
Written by Aaditi Dave

 श्री शंकर जी आरती (shri shankar ji ki Aarti in hindi mp3)

धन धन भोले नाथ तुम्हारे कौड़ी नहीं खजाने में,

तीन लोक बस्ती में बसाये आप बसे वीराने में |

जटा जूट के मुकुट शीश पर गले में मुंडन की माला,

माथे पर छोटा चन्द्रमा कपाल में करके व्याला |

जिसे देखकर भय ब्यापे सो गले बीच लपटे काला,

और तीसरे नेत्र में तेरे महा प्रलय की है ज्वाला |

पीने को हर भंग रंग है आक धतुरा खाने का,

तीन लोक बस्ती में बसाये आप बसे वीराने में |

नाम तुम्हारा है अनेक पर सबसे उत्तत है गंगा,

वाही ते शोभा पाई है विरासत सिर पर गंगा |

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भूत बोतल संग में सोहे यह लश्कर है अति चंगा,

तीन लोक के दाता बनकर आप बने क्यों भिखमंगा |

अलख मुझे बतलाओ क्या मिलता है अलख जगाने में,

ये तो सगुण स्वरूप है निर्गुन में निर्गुन हो जाये |

पल में प्रलय करो रचना क्षण में नहीं कुछ पुण्य आपाये,

चमड़ा शेर का वस्त्र पुराने बूढ़ा बैल सवारी को |

जिस पर तुम्हारी सेवा करती, धन धन शैल कुमारी को,

क्या जान क्या देखा इसने नाथ तेरी सरदारी को |

सुन तुम्हारी ब्याह की लीला भिखमंगे के गाने में |

तीन लोक बस्ती में बसाये……………..

किसी का सुमिरन ध्यान नहीं तुम अपने ही करते हो जाप,

अपने बीच में आप समाये आप ही आप रहे हो व्याप |

हुआ मेरा मन मग्न ओ बिगड़ी ऐसे नाथ बचाने में,

तीन लोक बस्ती में बसाये……………..

कुबेर को धन दिया आपने, दिया इन्द्र को इन्द्रासन,

अपने तन पर ख़ाक रमाये पहने नागों का भूषण |

मुक्ति के दाता होकर मुक्ति तुम्हारे गाहे चरण,

“देवीसिंह ये नाथ तुम्हारे हित से नित से करो भजन |

तीन लोक बस्ती में बसाये…………….

About the author

Aaditi Dave

Hello Every One, Jai Shree Krishna, as I Belong To Brahman Family I Got All The Properties of Hindu Spirituality From My Elders and Relatives & Decided To Spreading All The Stuff About Hindu Dharma's Devotional Facts at Only One Roof.