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विवाहित स्त्रियां अपनी मांग में सिंदूर क्यों सजाती हैं

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सुहागिनों का प्रतीक है सिंदूर, जानिए सौभाग्यवती स्त्रियां अपनी मांग में इसे क्यों लगाती हैं?

मांग में सिंदूर सजाना सुहागिन स्त्रियों का प्रतीक माना जाता है। यह जहां मंगलदायक माना जाता है, वहीं इससे स्त्रियों के रूप-सौंदर्य में भी निखार आ जाता है। मांग में सिंदूर सजाना एक वैवाहिक संस्कार भी है।

विवाह के अवसर पर वर वधू की मांग चुटकी भर सिंदूर से सजाता है। इसके बाद विवाहिता अपने पति की दीर्घायु की कामना करते हुए जीवन भर अपनी मांग में सिंदूर सजाती है। लेकिन पति की मृत्यु के बाद पत्नी अपनी मांग में सिंदूर सजाना बंद कर देती है।

शरीर-रचना विज्ञान के अनुसार सौभाग्यवती स्त्रियां मांग में जिस स्थान पर सिंदूर सजाती हैं, वह स्थान ब्रह्मरंध्र और अहिम नामक मर्मस्थल के ठीक ऊपर है। स्त्रियों का यह मर्मस्थल अत्यंत कोमल होता है। इसकी सुरक्षा के निमित्त स्त्रियां यहां पर सिंदूर लगाती हैं। सिंदूर में पारा जैसी धातु अधिक मात्रा में होती है। इस कारण चेहरे पर जल्दी झुर्रियां नहीं पड़तीं और स्त्री के शरीर में विद्युतीय उत्तेजना नियंत्रित होती है।

सिंदूर कमीला जतन नामक पौधे की फली में से निकलता है। 20 से 25 फीट ऊंचे इस वृक्ष में फली गुच्छ के रूप में लगती है। फली के अंदर के भाग का आकार मटर की फली जैसा होता है जिसमें सरसों के आकार से थोड़े मोटे दाने होते हैं जो लाल रंग के पराग से ढंके होते हैं जिससे विशुद्ध सिंदूर निकलता है।

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