यात्रा

सरस्वती मंदिर,बसर

Saraswati Temple, Basar

भारत का प्राचीन और प्रसिद्द मंदिर जो तेलंगाना राज्य के आदिलाबाद जिले में बसा और गोदावरी नदी के तट पर विकसित यह मंदिर "" बासर सरस्वती "" के नाम से प्रसिद्द है | यहाँ नित दिन हज़ारों की संख्या में भक्त आते है माता सरस्वती की पूजा अर्चना कर अपनी मुराद पूरी करते

है | वैसे तो यहाँ हर त्यौहार बड़े उल्लास के साथ मनाया जाता है और बसंत पंचमी के दिन तो लाखों में भक्त यहाँ  आते है |  बसंत पंचमी को माता की विशेष  पूजा और अर्चना की जाती है | भारत के हर प्रांत से भक्त यहाँ आते है, जैसे तेलंगाना, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, उड़ीसा. झारखण्ड, तमिलनाडु |  यहाँ विषेश तौर पर नवरात्री भी मनाई जाती है | हर १२ (१२) साल में यहाँ गोदावरी नदी का पुष्कर (पुष्करालु तेलुगु में) मेला भी लगता है और लाखों में भक्त आते है और नदी गोदावरी में डुबकी लगाते है और पुण्य प्राप्त करते है |

{youtube}oYczo6lF8qk{/youtube}यहाँ प्रतिदिन अक्षरा अभ्यासम ( ‘अक्षर ज्ञान’) करवाया जाता है | भक्त अपने छोटे बच्चों को सबसे पहले यही आ कर अक्षरा अभ्यासम ( ‘अक्षर ज्ञान’) करवाते है और नए पाठशाला में डालते है | भक्तो की मान्यता है की यहाँ अक्षरा अभ्यासम ( ‘अक्षर ज्ञान’) करने से बच्चे उच्च शिक्षा प्रप्थ करते है और जीवन में उच्च पद पर जाते है | भक्त यहाँ अपनी श्रदा से चढ़ावा चढ़ाते है जैसे बल पेन, पुस्तक आदि | इसी से माता रानी प्रसन्न हो जाती है और मनवांछित फल मिलता है |

मंदिर का इतिहास :

भारत वर्ष का प्राचीन मंदिर जो ११ वि सदी में महाभारत युद्ध के बाद बना, जो आज तक भक्तों के मुख्या केंद्र बना हुआ है| ११वि सदी में महाभारत के युद्ध के उपरांत, महाऋषि वेद व्यास दक्षिण की यात्रा कर गोदावरी नदी के तट पर आ कर बस गए| वह नित दिन नदी में स्नान करते और वापस एक गुफा में आ कर तपस्या करते (माँ सरस्वती की उपासना करते) यही उनकी दिनचर्या थी| उनकी भक्ति और उपासना (तप) से प्रसन्न हो कर माता सरस्वती जी ने महाऋषि वेद व्यास को स्वप्ना में दर्शन दिया और कहा की रोज नदी में स्नान करने के उपरांत नदी से रेत ला कर तीन भाग में रख मेरी उपासना करो, माता की आज्ञा पाकर महाऋषि वेद व्यास जी नित दिन स्नान करते और नदी से रेत लाते तीन भाग कर उपासना कर ते| देखते देखते वहां तीन पिंड बन गए जो माता सरस्वती, माता लक्ष्मी और माता काली के, महाऋषि वेद व्यास जी ने उन पिंडीओ की पूजा कर उसमे प्राण प्रतिस्ठा की और लम्बे समय तक यही बस गए| इस लिए इस प्रांत को पहले वासरा के नाम से जाना जाताथा उपरांत वासर से बसर कहलाने लगा|

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Aaditi Dave

Hello Every One, Jai Shree Krishna, as I Belong To Brahman Family I Got All The Properties of Hindu Spirituality From My Elders and Relatives & Decided To Spreading All The Stuff About Hindu Dharma's Devotional Facts at Only One Roof.

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