राजस्थानी भजन

संध्या सुमरिन करो रे

sumiran

संध्या सुमरिन करो रे मन मेरा संध्या सुमरिन करो रे

काहे की बाती न कहे को दिवला

काहे को धिरत बन्यो रे ||1||

मन के री बाती न तन के रो

दिवलो ज्ञान रो धिरत बन्योरे ||2||

मत पिता और सात गुरुदेवा

तीनो री सेवा करो रे ||3||

सांझ सुबह और पर दोपहरा

तीनो ही काल तू जप रे ||4||

गंगा नहाया ने जमुना जी नहाया

त्रिवेणी मै तू तीर रे ||5||

चोरी ने जारी और पर निंदा

तीनो ही बातो से टलरे ||6||

बायर भट्कियो सु कायर हो सी धर बैठो गोविन्द भजो रे

चन्द्र सखी भज बाल कृष्ण छवि

हरी चरणों मै चीत रख रे

मन मेरा संध्या सुमिरन करो रे

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