राजस्थानी भजन

सखिन्ह मध्य सिय सोहति

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सखिन्ह मध्य सिय सोहति (Shakhin madhay siya shohati bhajan in hindi Mp3)

संग सखीं सुदंर चतुर गावहिं मंगलचार।

गवनी बाल मराल गति सुषमा अंग अपार

सखिन्ह मध्य सिय सोहति कैसे। छबिगन मध्य महाछबि जैसें॥

कर सरोज जयमाल सुहाई। बिस्व बिजय सोभा जेहिं छाई ॥१॥

 तन सकोचु मन परम उछाहू। गूढ़ प्रेमु लखि परइ काहू॥

जाइ समीप राम छबि देखी। रहि जनु कुँअरि चित्र अवरेखी ॥२॥

 चतुर सखीं लखि कहा बुझाई। पहिरावहु जयमाल सुहाई॥

सुनत जुगल कर माल उठाई। प्रेम बिबस पहिराइ जाई ॥३॥

 सोहत जनु जुग जलज सनाला। ससिहि सभीत देत जयमाला॥

गावहिं छबि अवलोकि सहेली। सियँ जयमाल राम उर मेली ॥४॥

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