जीवन मंत्र

युही नहीं मिलती सफलता, करे तप रूपी संघर्ष

success

संघर्ष जीवन को निखारते हैं, संवारते व तराशते हैं और गढ़कर ऐसा बना देते हैं, जिसकी प्रशंसा करते जबान थकती नहीं। संघर्ष(Struggle) हमें जीवन का अनुभव कराते हैं, सतत सक्रिय बनाते हैं और हमें जीना सिखाते हैं। संघर्ष का दामन थामकर न केवल हम आगे बढ़ते हैं, बल्कि जीवन जीने के सही अंदाज़ को – आनंद को अनुभव कर पाते हैं। जिस जीवन में संघर्ष(Struggle) नहीं, वहाँ प्रसन्नता व आनंद भी नहीं टिक पाता। जिस तरह नदी के प्रवाह के सतत संपर्क में रहने से पत्थर के आकार में धीरे-

धीरे परिवर्तन हो जाता है और वह कभी इतनी सुंदर आकृति प्राप्त कर लेता है कि पूजनीय हो जाता है। इसी तरह हमारा जीवन भी संघर्ष की तपिश से निखरता है, ऊँचा उठता है, मनोवांछित लक्ष्य को प्राप्त करता है।

स्नातक की उपाधि प्राप्त करने वाली पहली बधिर व दृष्टिहीन अमेरिकी महिला हेलेन केलर जो अपने में एक प्रसिद्ध लेखक और राजनीतिक कार्यकर्ता बनी, उनका कहना था – “संघर्ष हमारे जीवन का सबसे बड़ा वरदान है। वह हमें यह भी सिखाता है कि भले ही यह संसार दुखों से भरा हुआ है, लेकिन उन दुखों पर काबू पाने के तरीके भी यहाँ अनेकों है।” इसी तरह प्रसिद्ध उद्बोधनकर्ता(Speaker) जॉन डी लेमे के अनुसार – “संघर्ष की चाबी जीवन के सभी बंद दरवाज़े खोल देती है और आगे बढ़ने के नए रास्ते भी प्रशस्त करती है। इस दौरान व्यक्ति के अंदर का हौसला उसे हारने नहीं देता और संघर्ष की लगन सतत बनाए रखता है।” इस तरह संघर्ष(Struggle) की तपन मनुष्य के जीवन को चमकाती है।

वैसे तो हमारे जीवन में कुछ भी सरल नहीं है। सरलता व आसानी से ऐसा कुछ नहीं मिलता, जो कीमती है, महत्वपूर्ण है। हर किसी व्यक्ति को अपने जीवन में अपनी मंज़िल व लक्ष्य पाने के लिए संघर्ष का सहारा लेना ही पड़ता है, संघर्ष(Struggle) करना ही पड़ता है। यह ज़रुर है कि जब जीवन में बुनियादी समस्याएं हों, ऐसी स्थिति में संघर्ष करने की इच्छाशक्ति को बनाए रखना थोड़ा कठिन हो जाता है; क्योंकि ऐसे में लक्ष्य की प्राप्ति के साथ बुनियादी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए भी संघर्ष(Struggle) करना पड़ता है, इस तरह जीवन का संघर्ष दोगुना हो जाता है। ऐसे में यदि व्यक्ति के अंदर आतंरिक बल है, पर्याप्त शारीरिक व मानसिक क्षमता है तो दोगुना संघर्ष में भी कोई दिक्कत नहीं आती। केवल इसके लिए जीवन के प्रति सकारात्मक रवैया(Positive Thinking) और लक्ष्य को पाने की मन में ललक होनी चाहिए।

सफलता(Success) का कोई शोर्टकट नहीं होता। यही वजह है कि चाहे कितना भी समय बदला हो, युग बदला हो, परिस्थितियां बदल गई हों, फिर भी कड़ी मेहनत(Hard work) व लगन से सफलता(Success) के लिए किया गया प्रयास अपना सुफल देने में, चमत्कार दिखाने में पल भर की देरी नहीं करता और यही कारण है कि अभावों के बीच रहकर भी सफलता(Success) पाने के इतिहास युगों से लिखे गए हैं, रचे गए हैं। वर्तमान में भी ऐसा ही कुछ इतिहास रचा जा रहा है, जो यह दर्शाता है कि सफलता(Success) किन्हीं साधन – सुविधाओं की मोहताज नहीं होती, सफलता(Success) के लिए संसाधनों का अंबार होना ज़रुरी नहीं। सफलता(Success) उन अभावग्रस्त व्यक्तियों के भी हिस्से में आ सकती है, जो कड़ा संघर्ष(Struggle) करते हैं और प्रबल इच्छाशक्ति व लगन के सहारे निरंतर – सतत आगे बढ़ते हैं। अभावों का जीवन जीते हुए संघर्ष(Struggle) करके भी अपनी पहचान बनाई जा सकती है, इस बात को आज की नई युवा पीढ़ी प्रमाणित कर रही है।

इन दिनों प्रतियोगी परीक्षाओं में ऐसे विधार्थी अव्वल आ रहे हैं, जिनके जीवन में संसाधनों का अभाव था और उनका जीवन भी कई तरह की समस्याओं(Problems) से घिरा हुआ था। सफलता की इस कड़ी में देश की ऐसी बेटियाँ भी अव्वल आईं, जिनके पिता मजदूरी करते थे और ऐसे बेटे भी

चमके, जिनकी परवरिश झुग्गी – झोंपड़ियों में अभावों के बीच हुई। जिनकी माँ घर-घर चौका-बरतन करके पैसे जमा करतीं और पिता रिक्शाचालक बनकर आर्थिक रूप से सहयोग करते। इस तरह Struggle पूरे परिवार ने एक साथ किया और अपने भाग्य को चमकाया।

हर साल हमारे देश के युवा यह साबित करते हैं कि प्रतिभा(Talent) सुविधा और संसाधनों के बीच नहीं पनपती, बल्कि अभावों के बीच में व संघर्ष(Struggle) के मध्य पनपती है और अपना प्रभाव दिखाती है। यदि ऐसा न होता तो कबीरदास, रैदास, दादू जैसे महापुरुषों को छोड़ प्रतिभा पैसे वालों के घर का रुख करती, परंतु ऐसा होता नहीं है। हर साल भारत देश के नौजवान यह बतलाते हैं कि संघर्ष(Struggle) की तापिश जीवन को सुखाती नहीं, बल्कि उसे निखार देती है।

संघर्ष की लगन ही व्यक्ति की लक्ष्य की और गति को थमने नहीं देती, आशा की किरण को टूटने नहीं देती, बल्कि उत्साह, उमंग को निरंतर बढ़ाती है और यही कारण है कि आज देश में अभावों के अंधेरों के बीच भी सफलता(Success) की रोशन राहें निकल रही हैं। जो यह भी बताती हैं कि सहूलियतों के बीच जीवन जीकर सफलता(Success) पाना और मुकाम बनाना ही सब कुछ नहीं है, बल्कि जीवन की सही समझ के लिए अभावों के बीच जीवन जीना भी ज़रुरी है, तभी जीवन के सही मर्म व अंदाज़ का पता चलता है।

जीवन में अगर संघर्ष(Struggle) न हों, चुनौतियाँ(Challenges) न हों तो मनुष्य के व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास नहीं हो पाता। बिना कड़ी मेहनत(Hard work) के जो सफलता पाई जाती है, वह महत्वहीन होती है, असंतोष देती है। परिस्थितियों से जूझते हुए, कठिनाइयों(Difficulties) से लड़ते हुए यदि हिम्मत न हारी जाए तो सफलतारुपी मंज़िल ज़रुर मिलती है। चुनौतियों से लड़ते हुए, संघर्ष(Struggle) करते हुए ही व्यक्ति की जीवात्मा के उपर छाया हुआ अंधेरा छँटता है और जीवन प्रकाशित होता है। इसलिए यह कहा जाता है कि प्रखर और प्रतिभाशाली बनने के लिए संघर्ष और चुनौतियों को हर कदम पर स्वीकार करते हुए आगे बढ़ना चाहिए।

प्रतिभाएँ अपनी पहचान स्वयं बना लेती हैं। उनका हौसला और इच्छाशक्ति उन्हें शून्य से शिखर तक ले जाने का कार्य करते हैं और कई तरह के संघर्षों व अड़चनों के बावजूद जब वे सफलता(Success) प्राप्त करते हैं, तो पूरे समाज के लिए एक उदाहरण बन जाते हैं। साधारण से दिखने वाले व्यक्ति जब असाधारण सफलता(Success) पाते हैं तो कोई सोच भी नहीं सकता कि वे अपने जीवन में कितना खपे हैं, उन्होंने कितना संघर्ष(Struggle) किया है, उनके सपनों(Dreams) की बुनियाद के पीछे कितनी मेहनत है। फिर भी अपने  हौसलों के दम पर वे निरंतर आगे बढ़ने रहते हैं, प्रयास करते हैं और इस तरह एक दिन वे सफलता(Success) के शिखर को छू ही लेते हैं।

जीवन में जब कोई कुछ करने की ठान लेता है और ईमानदारी से उसके लिए प्रयास करता है तो उसे देर-सबेर सफलता(Success) अवश्य मिलती है। हालांकि इस यात्रा में उसे बहुत सारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, कई तरह के भटकावे सामने आते हैं, जो उसे लक्ष्य से भटकाते हैं, विचलित करते हैं। कई तरह के विकल्प दीखते हैं, वे भी राह में एक तरह की बाधा होते हैं, लेकिन दृढ़तापूर्वक और ईमानदार कोशिश करने वाले लोग इन विकल्पों व शोर्टकट मार्गो को नहीं अपनाते और अपनी लगन का सहारा लेते हुए संघर्ष व मेहनत का उचित रास्ता चुनते हैं, अपनी क्षमता-योग्यता व दक्षता को निरंतर निखारने का प्रयास करते हैं। ये ढर्रे पर चलने वाले रास्तों के बजाय अपने लिए नए रास्ते बनाते हैं और इस तरह समाज के लिए एक आदर्श उदाहरण बन जाते हैं। सफलता की इमारत संघर्ष की नींव पर ही खड़ी होती है।

बिना संघर्ष, अपंग है जीवन:

संघर्ष ही जीवन है । जीवन संघर्ष का ही दूसरा नाम है । इस सृष्टि में छोटे-से-छोटे प्राणी से लेकर बड़े-से-बड़े प्राणी तक, सभी किसी-न-किसी रूप में संघर्षरत हैं । जिसने संघर्ष (Struggle) करना छोड़ दिया, वह मृतप्राय हो गया । जीवन में संघर्ष है प्रकृति के साथ, स्वयं के साथ, परिस्थितियों के साथ । तरह-तरह के संघर्षों का सामना आएदिन हम सबको करना पड़ता है और इनसे जूझना होता है । जो इन संघर्षों का सामना करने से कतराते हैं, वे जीवन से भी हार जाते हैं, जीवन भी उनका साथ नहीं देता ।

सफलता व कामयाबी (Success) की चाहत तो सभी करते हैं, लेकिन उस सफलता को पाने के लिए किए जाने वाले संघर्षों से कतराते हैं । मिलने वाली सफलता सबको आकर्षित भी करती है, लेकिन उस सफलता की प्राप्ति के लिए किए जाने वाले संघर्ष (Struggle) को कोई नहीं देखता, न ही उसकी और आकर्षित होता है, जबकि सफलता तक पहुँचने की वास्तविक कड़ी वह संघर्ष ही है । हम जिन व्यक्तियों को सफलता की ऊँचाइयों पर देखते हैं, उनका भूतकाल अगर हम देखेंगे तो हमें जानने को मिलेगा की यह सफलता जीवन के साथ बहुत संघर्ष से प्राप्त हुई है ।

जब संघर्षों की बात की जा रही है तो फिर एवरेस्ट पर चढ़ते समय आने वाले संघर्षों की बात क्यों न की जाए? एवरेस्ट की चढ़ाई अत्यंत कठिन चढ़ाई पर सफलता (Success) पाने का गौरव हासिल करने वाली पहली महिला जुंको ताबेई (Junko Tabei) का कहना है – “दुनिया के विभिन्न मंचों पर सम्मानित होना अच्छा लगता है, लेकिन यह अच्छा लगना उस अच्छा लगने की तुलना में बहुत कम है, जिसकी अनुभूति मुझे एवरेस्ट पर कदम रखने के समय हुई थी, जबकि वहां तालियाँ बजाने

वाला कोई नहीं था । उस समय हाड़ कंपकंपाती बरफीली हवा, कदम-कदम पर मौत की आहट, लड़खड़ाते कदम और फूलती साँसों से संघर्ष के बाद जब मैं एवरेस्ट पहुँची तो यही लगा कि मैं दुनिया की सबसे खुश इंसान हूँ ।”

वास्तव में जब व्यक्ति अपने संघर्षों से दोस्ती कर लेता है, प्रसन्नता के साथ उन्हें अपनाता है, उत्साह के साथ चलता है तो संघर्ष का सफर उसका साथ देता है और उसे कठिन-से-कठिन डगर को पार करने में मदद करता है । लेकिन यदि व्यक्ति जबरन इसे अपनाता है, बेरुखी के साथ इस मार्ग पर आगे बढ़ता है, तो वह भी ज्यादा दूर तक नहीं चल पाता, बड़ी कठिनाई के साथ ही वह थोड़ा-बहुत आगे बढ़ पाता है । जब जीवन में एवरेस्ट जैसी मंजिल हो और उस तक पहुँचने के लिए कठिन संघर्षों का रास्ता हो, तो घबराने से बात नहीं बनती, संघर्षों को अपनाने से ही मंजिल मिल पाती है ।

जब हम संघर्ष करते हैं, तभी हमें अपने बल व सामर्थ्य का पता चलता है । संघर्ष करने से ही आगे बढ़ने का हौसला, आत्मविश्वास  (Confidence) मिलता है और अंततः हम अपनी मंजिल को हासिल कर लेते हैं ।

Butterfly Struggle Story :

एक बार एक बच्चे को अपने बगीचे में किसी टहनी से लटकता हुआ एक तितली का कोकून (Butterfly Cocoon) दिखाई पड़ा । वह प्रतिदिन उस कोकून को देखने लगा, एक दिन उसने ध्यान दिया तो पता चला कि उस कोकून में एक छोटा-सा-छेद बन गया है । उस दिन वह वहीं बैठ गया और घंटों उसे देखता रहा । उसने देखा कि एक तितली (Butterfly) उस खोल से बाहर निकलने की बहुत कोशिश कर रही है, परंतु बहुत प्रयास करने के बाद भी वह उस छेद से नहीं निकल पा रही और फिर वह बिल्कुल शांत हो गई, मानो उसने अपने प्रयासों से हार मान ली हो ।

उस बच्चे ने निश्चय किया कि वह उस तितली की मदद करेगा । उसने एक कैंची उठाई और तितली के बाहर निकलने के रास्ते को, कोकून के मुख को काटकर इतना बड़ा कर दिया कि वह तितली आसानी से बाहर निकल सके और यही हुआ, वह तितली बिना किसी संघर्ष (Struggle) के आसानी से बाहर निकल आई, पर अब उसका शरीर सूज़ा हुआ था और पंख सूखे हुए थे । वह बच्चा अब तितली (Butterfly) को यह सोचकर लगातार देखता रहा कि वह किसी भी वक्त अपने पंख फैलाकर उड़ने लगेगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ, बल्कि इसके विपरीत हुआ । वह तितली कभी उड़ नहीं पाई और उसने अपनी बाकी जिंदगी इधर-उधर घिसटते हुए बिताई ।

Moral Of Butterfly Struggle :

वह छोटा बच्चा अपने दया भाव में यह नहीं समझ पाया कि दरअसल कोकून से तितली के बाहर निकलने की प्रक्रिया को प्रकृति ने इतना कठिन इसलिए बनाया है, ताकि उसके ऐसा करने से तितली के शरीर में मौजूद तरल पदार्थ उसके पंखों मे पहुँच सके और वह छेद से बाहर निकलते ही उड़ सके । वास्तव में हमारे जीवन में भी संघर्ष (Struggle) ही वह चीज है, जिसकी हमें सचमुच आवश्यकता होती है । यही हमें निखारता है और हर पल अधिक शक्तिशाली, अनुभवी बनाता है । यदि हमें भी बिना किसी संघर्ष के ही सब कुछ मिलने लगे तो न तो हम उसकी कीमत समझेंगे और न ही हम विकसित हो पाएँगे, बल्कि अपंग ही रह जाएँगे । इसलिए जीवन में संघर्ष (Struggle) को खुले दिल से स्वीकारना और अपनाना चाहिए ।

About the author

Niteen Mutha

नमस्कार मित्रो, भक्तिसंस्कार के जरिये मै आप सभी के साथ हमारे हिन्दू धर्म, ज्योतिष, आध्यात्म और उससे जुड़े कुछ रोचक और अनुकरणीय तथ्यों को आप से साझा करना चाहूंगा जो आज के परिवेश मे नितांत आवश्यक है, एक युवा होने के नाते देश की संस्कृति रूपी धरोहर को इस साइट के माध्यम से सजोए रखने और प्रचारित करने का प्रयास मात्र है भक्तिसंस्कार.कॉम

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