Category - जैन धर्म

जैन धर्म के तीर्थकर

भगवान महावीर जी

जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थंकर भगवान श्री महावीर स्वामी का जन्म कुंडलपुर वैशाली के इक्ष्वाकुवंश में चैत्र शुक्ल त्रयोदशी को उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में हुआ था। इनके माता का नाम त्रिशला देवी था और पिता का नाम राजा सिद्धार्थ था।जीवन......

जैन धर्म के तीर्थकर

श्री वासुपूज्य जी

भगवान वासुपूज्यनाथ जैन धर्म के बारहवें तीर्थंकर हैं। प्रभु वासुपूज्य का जन्म चम्पापुरी में इक्ष्वाकु वंश के महान राजा वासुपूज्य की पत्नी जया देवी के गर्भ से फाल्गुन मास......

जैन धर्म के तीर्थकर

श्री शांतिनाथ जी

जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर प्रभु शान्तिनाथ जी हैं। इनका जन्म ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को भरणी नक्षत्र में हस्तिनापुर के इक्ष्वाकु वंश में हुआ। इनके माता- पिता......

जैन धर्म के तीर्थकर

श्री अरनाथ जी

जैन धर्म के अठारहवें तीर्थंकर भगवान श्री अरनाथ जी का जन्म हस्तिनापुर के इक्ष्वाकुवंश में मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष दशमी को रेवती नक्षत्र में हुआ था। इनके माता का नाम माता......

जैन धर्म के तीर्थकर

श्री नेमिनाथ जी

जैन धर्म के बाइसवें तीर्थंकर भगवान श्री नेमिनाथ जी थे। इनका जन्म सौरीपुर द्वारका के हरिवंश कुल में श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को चित्रा नक्षत्र में हुआ था।......

जैन धर्म के तीर्थकर

श्री अभिनन्दन जी

जैन धर्म के चौथे तीर्थंकर भगवान अभिनन्दननाथ हैं। भगवान अभिनन्दननाथ जी को 'अभिनन्दन स्वामी' के नाम से भी जाना जाता है। जीवन परिचय अभिनन्दननाथ स्वामी का जन्म इक्ष्वाकु वंश......

जैन धर्म के तीर्थकर

श्री सम्भवनाथ जी

भगवान सम्भवनाथ जी, जैन धर्म के तीसरे तीर्थंकर हैं। प्रभु सम्भवनाथ का जन्म मार्गशीर्ष शुक्ल 15 तिथि को श्रावस्ती के नगरी राजा जितारि के घर हुआ था। जन्म की कथाएं गर्भावस्था......

जैन धर्म के तीर्थकर

श्री सुमतिनाथ जी

जैन धर्म के पाँचवें तीर्थंकर सुमतिनाथ हैं। सदैव अहिंसा और सत्य के मार्ग पर चलने का संदेश देने वाले सुमतिनाथ जी का जन्म वैशाख शुक्ल अष्टमी को मघा नक्षत्र में अयोध्या नगरी......

जैन धर्म के तीर्थकर

श्री विमलनाथ जी

विमलनाथ जी जैन धर्म के तेरहवें तीर्थंकर हैं। प्रभु विमलनाथ जी का जन्म माघ मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को भाद्रपद नक्षत्र में कम्पिला में हुआ। विमलनाथ जी के शरीर का रंग......

जैन धर्म के तीर्थकर

श्री धर्मनाथ जी

धर्मनाथ जी जैन धर्म के पन्द्रहवें तीर्थंकर हैं। समस्त कर्मों का निर्वाह कर उन्होंने कैवल्य ज्ञान की प्राप्ति की और वर्षों तक जनता में अहिंसा और सत्य का संदेश दिया।  जीवन......

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