Category - हिन्दू धार्मिक ग्रन्थ

श्रीमद्भगवद् गीता

सम्पूर्ण श्रीमद्भगवद् गीता

क्यों व्यर्थ की चिंता करते हो? किससे व्यर्थ डरते हो? कौन तुम्हें मार सक्ता है? अात्मा ना पैदा होती है, न मरती है। जो हुअा, वह अच्छा हुअा, जो हो रहा है, वह अच्छा हो रहा है, जो होगा, वह भी अच्छा ही होगा। तुम भूत का पश्चाताप न करो। भविष्य की चिन्ता न......

श्रीमद्भगवद् गीता

गीता अध्याय -18

                - मोक्षसंन्यास योग - त्याग का विषय: अर्जुन उवाच सन्न्यासस्य महाबाहो तत्त्वमिच्छामि वेदितुम्‌ । त्यागस्य च हृषीकेश पृथक्केशिनिषूदन ॥  भावार्थ : अर्जुन बोले- हे......

श्रीमद्भगवद् गीता

गीता अध्याय -17

            - श्रद्धात्रयविभाग योग - श्रद्धा का और शास्त्रविपरीत घोर तप करने वालों का विषय : अर्जुन उवाच ये शास्त्रविधिमुत्सृज्य यजन्ते श्रद्धयान्विताः। तेषां निष्ठा तु का......

श्रीमद्भगवद् गीता

गीता अध्याय -16

          - दैवासुरसम्पद्विभाग योग -फलसहित दैवी और आसुरी संपदा का कथन: श्रीभगवानुवाच अभयं सत्त्वसंशुद्धिर्ज्ञानयोगव्यवस्थितिः। दानं दमश्च यज्ञश्च स्वाध्यायस्तप......

श्रीमद्भगवद् गीता

गीता अध्याय -15

                - पुरुषोत्तमयोग -संसार वृक्ष का कथन और भगवत्प्राप्ति का उपाय : श्रीभगवानुवाच ऊर्ध्वमूलमधः शाखमश्वत्थं प्राहुरव्ययम्‌ । छन्दांसि यस्य पर्णानि यस्तं वेद स......

श्रीमद्भगवद् गीता

गीता अध्याय -14

              - गुणत्रयविभागयोग - ज्ञान की महिमा और प्रकृति-पुरुष से जगत्‌ की उत्पत्ति: श्रीभगवानुवाच परं भूयः प्रवक्ष्यामि ज्ञानानं मानमुत्तमम्‌ । यज्ज्ञात्वा मुनयः सर्वे......

श्रीमद्भगवद् गीता

गीता अध्याय -13

           - क्षेत्र-क्षेत्रज्ञविभागयोग -ज्ञानसहित क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ का विषय: श्रीभगवानुवाच इदं शरीरं कौन्तेय क्षेत्रमित्यभिधीयते। एतद्यो वेत्ति तं प्राहुः क्षेत्रज्ञ......

श्रीमद्भगवद् गीता

गीता अध्याय -12

                    - भक्तियोग - साकार और निराकार के उपासकों की उत्तमता का निर्णय और भगवत्प्राप्ति के उपाय का विषय: अर्जुन उवाच एवं सततयुक्ता ये भक्तास्त्वां पर्युपासते । ये......

श्रीमद्भगवद् गीता

गीता अध्याय -11

               - विश्वरूपदर्शनयोग - अर्जुन उवाच मदनुग्रहाय परमं गुह्यमध्यात्मसञ्ज्ञितम्‌ । यत्त्वयोक्तं वचस्तेन मोहोऽयं विगतो मम ॥  भावार्थ : अर्जुन बोले- मुझ पर अनुग्रह करने......

श्रीमद्भगवद् गीता

गीता अध्याय -10

                   - विभूति योग - श्रीभगवानुवाच भूय एव महाबाहो श्रृणु मे परमं वचः । यत्तेऽहं प्रीयमाणाय वक्ष्यामि हितकाम्यया ॥  भावार्थ : श्री भगवान्‌ बोले- हे महाबाहो! फिर भी मेरे......

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