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नवरात्री के दूसरे दिन करे माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा – जाने विधि, मुहूर्त और महिमा

मां ब्रह्मचारिणी की अमृत कथा (Download Mp3) माँ दुर्गा का दूसरा स्वरूप है माँ ब्रह्मचारिणी : lord shiva को पति रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी। इस कठिन तपस्या के कारण इस देवी को तपश्चारिणी अर्थात्‌ ब्रह्मचारिणी नाम से अभिहित किया। मां दुर्गा की नवशक्ति का दूसरा स्वरूप ब्रह्मचारिणी का है। यहां ब्रह्म का अर्थ तपस्या से है। मां दुर्गा का यह स्वरूप भक्तों और सिद्धों को अनंत फल देने वाला है। इनकी उपासना से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और......

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नवरात्रि 2017: जानिए क्या है नवरात्री पूजन करने का शुभमुहूर्त और महत्व

नवरात्रि 2017: जानिए क्या है नवरात्री पूजन करने का शुभमुहूर्त? पितृपक्ष का समापन मंगलवार को रहा है. इसके ठीक दूसरे दिन कलश स्थापना होती थी. 11 साल बाद ऐसा संयोग आया है जब एक दिन बाद कलश स्थापना होनी है. 21 तारीख को कलश स्थापना है. दुर्गापूजा को हिन्दुओं के प्रमुख त्योहारों में एक माना गया है. बंगाली समुदाय को लोग इसे महालया भी कहते हैं. महालया विशेष दिन है. इसी दिन सर्वपितरों का तर्पण कर पितृपक्ष का समापन होता है और प्रारंभ होता है देवीपक्ष. मां......

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नवरात्री के प्रथम दिन करे माँ शैलपुत्री की पूजा – जाने विधि, मुहूर्त और महिमा

माँ शैलपुत्री की पूजन विधि : नवरात्र के नौ दिन देवी दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है। नवरात्र के पहले दिन घर में धरती माता, गुरुदेव व इष्ट देव को नमन करने के बाद lord ganesha का आह्वान करना चाहिए। माता के नाम से अखंड ज्‍योति जलाई जाती है। इसके बाद कलश व घट स्थापना करनी चाहिए।इसके लिए सबसे पहले मिट्टी के पात्र में जौ बोएं। अब एक कलश पर मौली बांध दें। अब कलश में गंगाजल भर दें। कलश में साबुत सुपारी, दूर्वा, फूल डालें। कलश में थोड़ा इत्र......

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श्रीमद भगवद गीता अध्याय – 2 ( सांख्य योग )

– सांख्ययोग (Sankhya Yog) अर्जुन की कायरता के विषय में श्री कृष्णार्जुन-संवाद: संजय उवाचतं तथा कृपयाविष्टमश्रुपूर्णाकुलेक्षणम्‌ । विषीदन्तमिदं वाक्यमुवाच मधुसूदनः ॥  भावार्थ :  संजय बोले- उस प्रकार करुणा से व्याप्त और आँसुओं से पूर्ण तथा व्याकुल नेत्रों वाले शोकयुक्त उस अर्जुन के प्रति भगवान मधुसूदन ने यह वचन कहा॥1॥ श्रीभगवानुवाच कुतस्त्वा कश्मलमिदं विषमे समुपस्थितम्‌ । अनार्यजुष्टमस्वर्ग्यमकीर्तिकरमर्जुन।  भावार्थ :  श्रीभगवान बोले- हे......

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श्रीमद भगवद गीता अध्याय – 1 (अर्जुनविषाद योग )

– अर्जुनविषाद योग : Arjun Vishad Yog दोनों सेनाओं के प्रधान-प्रधान शूरवीरों की गणना और सामर्थ्य का कथन: धृतराष्ट्र उवाच धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः । मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत संजय ॥  भावार्थ : धृतराष्ट्र बोले- हे संजय! धर्मभूमि कुरुक्षेत्र में एकत्रित, युद्ध की इच्छावाले मेरे और पाण्डु के पुत्रों ने क्या किया?॥1॥ संजय उवाच दृष्टवा तु पाण्डवानीकं व्यूढं दुर्योधनस्तदा । आचार्यमुपसंगम्य राजा वचनमब्रवीत्‌ ॥  भावार्थ : संजय......

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पितृपक्ष श्राद्ध 2017 : जानिए श्राद्ध करने के महत्व, विधि, तिथि और नियम

पितृ पक्ष 2017 : इस साल श्राद्ध 5 सितंबर से शुरू होकर 19 सितंबर तक  श्राद्ध क्या है ?  ब्रह्म पुराण के अनुसार जो भी वस्तु उचित काल या स्थान पर पितरों के नाम उचित विधि द्वारा ब्राह्मणों को श्रद्धापूर्वक दिया जाए वह श्राद्ध कहलाता है । या यु कहे की पितरों को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए वर्ष के 16 दिनों को श्राद्धपक्ष कहा जाता है। श्राद्धपक्ष आश्विन माह के कृष्णपक्ष की प्रतिपदा से अमावस्या तक 15 का होता है और इसमें पूर्णिमा के......

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इन शास्त्रोक्त विधि और नियम से श्राद्ध सम्पूर्ण माना जायेगा

पितृ श्राद्ध करने के नियम – धर्म ग्रंथों के अनुसार श्राद्ध के सोलह दिनों में लोग अपने पितरों को जल देते हैं तथा उनकी मृत्युतिथि पर श्राद्ध करते हैं। ऐसी मान्यता है कि पितरों का ऋण श्राद्ध द्वारा चुकाया जाता है। वर्ष के किसी भी मास तथा तिथि में स्वर्गवासी हुए पितरों के लिए पितृपक्ष की उसी तिथि को श्राद्ध किया जाता है।पूर्णिमा पर देहांत होने से भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा को श्राद्ध करने का विधान है। इसी दिन से महालय (श्राद्ध) का प्रारंभ भी माना......

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जानिए गणेश चतुर्थी : शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत और कथा महत्व

गणेश चतुर्थी कब और कहाँ मनाई जाती है? (Ganesh Chaturthi celebration) हर चन्द्र महीने में हिन्दू कैलेंडर में 2 चतुर्थी तिथी होती है. हिन्दू शास्त्रों के अनुसार चतुर्थी तिथि भगवान गणेश से सम्बंधित होती है. शुक्ल पक्ष के दौरान अमावस्या या नए चाँद के बाद चतुर्थी को विनायक चतुर्थी के रूप में जाना जाता है, और कृष्ण पक्ष के दौरान एक पूर्णमासी या पूर्णिमा के बाद की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है.  यद्यपि विनायक चतुर्थी उपवास हर महीने किया जाता......

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कृष्ण जन्माष्टमी 2017 : सटीक मुहूर्त, व्रत-कथा और भजन सुनिए

    भगवान श्रीकृष्ण का 5244वाँ जन्मोत्सव निशिता पूजा का समय = 24:03+ से 24:48+ अवधि = 0 घण्टे 43 मिनट्स मध्यरात्रि का क्षण = 24:25+ 15th को, पारण का समय = १७:३९ के बाद पारण के दिन अष्टमी तिथि का समाप्ति समय = 17:39 रोहिणी नक्षत्र के बिना जन्माष्टमी *वैष्णव कृष्ण जन्माष्टमी 15/अगस्त/2017 को वैष्णव जन्माष्टमी के लिये अगले दिन का पारण समय = 05:54 (सूर्योदय के बाद) पारण के दिन अष्टमी तिथि सूर्योदय से पहले समाप्त हो गयी रोहिणी नक्षत्र के बिना......

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कृष्ण जन्माष्टमी : संसार के तारणहार का अलौकिक आगमन

shree krishna bhajan | meerabai bhajan | Lord Krishna Lord Krishna Story in Hindi : भगवान के माता-पिता वसुदेव-देवकी विवाह के तत्काल बाद बड़े प्रेम से विदा होते हैं और ऐश्वर्यशाली कंस रथ के घोड़ों की बागडोर थाम बड़े प्रेम से बहिन को पहुंचाने के लिए चलता है। इतने में ही आकाशवाणी हुई:- ’कंस, तेरी मृत्यु देवकी के आठवें गर्भ से है।’ कंस का सारा प्रेम उड़ गया, स्वार्थी का प्रेम तभी तक रहता है जब तक उसके स्वार्थ में बाधा न पड़े। कंस देवकी के केश पकड़कर......

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