भक्ति

रामनवमी – मर्यादा पुरषोत्तम भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव का दिन

रामनवमी 2017

चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की नवमी को भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था। इस दिन पूरे देश भर में श्रीराम जन्मोत्सवों की धूम रहती है साथ ही हिंदुओं के लिए यह दिन अंतिम नवरात्र होने के कारण भी काफी महत्वपूर्ण होता है। इस दिन देवी की विशिष्ट पूजा, हवन और कन्या पूजन भी किया जाता है। गोस्वामी तुलसीदास ने अपने अमर काव्य रामचरितमानस की रचना भी इसी दिन अयोध्या में आरम्भ की थी। अयोध्या नगर और रामभक्तों के लिए तो यह पर्व काफी महत्ता रखता है और इस पर्व को देश ही नहीं विदेशों में भी हिंदुओं के बीच आनंद और उल्लासपूर्वक मनाया जाता है।

भगवान श्रीराम सदाचार के प्रतीक हैं। उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम भी कहा जाता है। भगवान राम को उनके सुख−समृद्धि पूर्ण व सदाचार युक्त शासन के लिए याद किया जाता है। उन्हें भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है, जो पृथ्वी पर अजेय रावण से युद्ध लड़ने के लिए आए। आज के दिन श्रद्धालु बड़ी संख्या में मन्दिरों में जाते हैं और उनके जन्मोत्सव को मनाने के लिए उनकी मूर्तियों को पालने में झुलाते हैं। भगवान राम का जन्म स्थान अयोध्या, रामनवमी त्यौहार के अनुष्ठान का केंद्र बिन्दु है। यहां राम जन्मोत्सव से संबंधित रथ यात्राएं बहुत से मंदिरों से निकाली जाती हैं। अयोध्या का तो रामनवमी पर लगने वाला चैत्र रामनवमी मेला काफी प्रसिद्ध है जिसमें देश भर से लाखों श्रद्धालु जुटते हैं।
भगवान श्रीराम जीव मात्र के कल्याण के लिए अवतरित हुए थे। वह हिन्दू धर्म में परम पूज्य हैं। हिन्दू धर्म के कई त्यौहार जैसे रामनवमी, दशहरा और दीपावली, राम की जीवन−कथा से जुड़े हुए हैं। श्रीराम आदर्श पुत्र, आदर्श भ्राता, आदर्श पति, आदर्श मित्र, आदर्श स्वामी, आदर्श वीर, आदर्श देश सेवक होने के साथ ही साथ साक्षात परमात्मा भी थे। भगवान श्रीराम ने त्रेतायुग में देवताओं की प्रार्थना सुनकर पृथ्वी का भार हरण करने के लिए अयोध्यापति महाराज दशरथ के यहां चैत्र शुक्ल नवमी के दिन जन्म लिया और राक्षसों का वध कर त्रिलोक में अपनी कीर्ति को स्थापित किया।

रामनवमी उत्सव

श्री रामनवमी हिन्दुओं के प्रमुख त्यौहारों में से एक है जो देश-दुनिया में सच्ची श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह त्यौहार वैष्णव समुदाय में विशेषतौर पर मनाया जाता है।

1. आज के दिन भक्तगण रामायण का पाठ करते हैं।
2. रामरक्षा स्त्रोत भी पढ़ते हैं।
3. कई जगह भजन-कीर्तन का भी आयोजन किया जाता है।
4. भगवान राम की मूर्ति को फूल-माला से सजाते हैं और स्थापित करते हैं।
5. भगवान राम की मूर्ति को पालने में झुलाते हैं।

राम नवमी की पूजा विधि

राम नवमी की पूजा विधि कुछ इस प्रकार है:

1. सबसे पहले स्नान करके पवित्र होकर पूजा स्थल पर पूजन सामग्री के साथ बैठें।
2. पूजा में तुलसी पत्ता और कमल का फूल अवश्य होना चाहिए।
3. उसके बाद श्रीराम नवमी की पूजा षोडशोपचार करें।
4. खीर और फल-मूल को प्रसाद के रूप में तैयार करें।
5. पूजा के बाद घर की सबसे छोटी महिला सभी लोगों के माथे पर तिलक लगाए

पौराणिक मान्यताएँ

श्री रामनवमी की कहानी लंकाधिराज रावण से शुरू होती है। रावण अपने राज्यकाल में बहुत अत्याचार करता था। उसके अत्याचार से पूरी जनता त्रस्त थी, यहाँ तक की देवतागण भी, क्योंकि रावण ने ब्रह्मा जी से अमर होने का वरदान ले लिया था। उसके अत्याचार से तंग होकर देवतागण भगवान विष्णु के पास गए और प्रार्थना करने लगे। फलस्वरूप प्रतापी राजा दशरथ की पत्नी कौशल्या की कोख से भगवान विष्णु ने राम के रूप में रावण को परास्त करने हेतु जन्म लिया। तब से चैत्र की नवमी तिथि को रामनवमी के रूप में मनाने की परंपरा शुरू हुई। ऐसा भी कहा जाता है कि नवमी के दिन ही स्वामी तुलसीदास ने रामचरित मानस की रचना शुरू की थी।

“राम की कृपा नवजीवन है राम का नित् वन्दन है,
राम के आशीष से मंगलमय तन-मन है
‪रामनवमी‬ की हार्दिक शुभकामनाये”

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