प्रसिद्ध हिंदी भजन

परसत पद पावन

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परसत पद पावन(Parsat Pad Pavan bhajan in hindi Mp3)

परसत पद पावन सोक नसावन प्रगट भई तपपुंज सही।

देखत रघुनायक जन सुखदायक सनमुख होइ कर जोरि रही॥

अति प्रेम अधीरा पुलक सरीरा मुख नहिं आवइ बचन कही।

अतिसय बड़भागी चरनन्हि लागी जुगल नयन जलधार बही॥१॥

मुनि श्राप जो दीन्हा अति भल कीन्हा परम अनुग्रह मैं माना।

देखेउँ भरि लोचन हरि भवमोचन इहइ लाभ संकर जाना॥

बिनती प्रभु मोरी मैं मति भोरी नाथ मागउँ बर आना।

पद कमल परागा रस अनुरागा मम मन मधुप करै पाना॥३॥

 

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