हिंदू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व

नवरात्र पूजन क्यों? ‘नवरात्र’ शब्द में ‘नव’ संख्यावाचक होने से नवरात्र के दिनों की संख्या नौ तक ही सीमित होनी चाहिए लेकिन ऐसा नहीं है। कुछ देवताओं के 7 दिनों के तो कुछ देवताओं के 9 या 13 दिनों के नवरात्र हो सकते हैं। सामान्यतया कुलदेवता और इष्टदेवता का नवरात्र संपन्न करने का कुलाचार है। […]

आत्मयज्ञ ही मनुष्यता एवं देवत्व का रास्ता है

यज्ञ और ‘इदं न मम’ की भावना यजुर्वेद में आत्मयज्ञ को श्रेष्ठ यज्ञ माना गया है। आत्मयज्ञ को सबसे बेहतर मानने के पीछे जो भाव एवं तर्क हैं, वे अत्यन्त व्यावहारिक हैं। हवन करते वक्त हम आहुति देकर कहते हैं- जो सामग्री मैंने हवन कुण्ड में डाली वह मेरी नहीं है, यानी आपके द्वारा दी […]

कबीरा गरब न कीजिए ऊंचा देख निवास

अनमोल वचन – कबीरा गरब न कीजिए ऊंचा देख निवास पुराने समय में हमारे पूर्वजों की धारणा थी कि ईश्वर ने ही उनके भाग्य का बंटवारा किया है। धर्म के विरुद्ध एक शिकायत यह रही है कि वह लोगों को डरपोक, दीनहीन और परलोकवादी बनाता है। यदि लोगों को चुस्त-दुरुस्त और ओजस्वी बनाना है तो […]

आत्मशक्ति की पहचान ही मानसिक चिंताओं व समस्याओं का समाधान है

आत्मशक्ति की पहचान ही मानसिक चिंताओं का समाधान सुकरात ने कहा था कि अपने आपको जानो। उसने यह वाक्य एक मंदिर के द्वार पर लिख दिया था। उसका मकसद यह था कि अपनी सफलता की कामना लेकर जो भी व्यक्ति मंदिर में भगवान के दर्शन करने आए, उसे सबसे पहले अपने बारे में जानना चाहिए। […]

उत्तम आचरण ही धर्म है

धर्म का अर्थ आदर्श आचरण – उत्तम आचरण ही धर्म है एक बात को जीवन में धारण करेंगे तो उससे आपका परेम कल्याण होगा। सबको अपने मन में दृढ़ विश्वास रखना चाहिए कि भगवान को हरदम याद रखने से साधन में उत्तरोत्त वृद्धि होती है और हमारा कल्याण हो सकता है। ऐसे दृढ़ विश्वास के […]

शुभ कर्म पूर्व दिशा की ओर मुँह करके संपन्न करने का विधान क्यों है?

शुभ कर्म पूर्व दिशा की ओर मुंह करके संपन्न कराने का विधान क्यों है ? पूर्व दिशा में सूर्योदय होता है और उदित होते सूर्य की किरणों का धर्म शास्त्रों में ही नहीं, विज्ञान में भी बड़ा महत्त्व है। अथर्ववेद में कहा गया है कि उद्यन्त्सूर्यो नुदतां मृत्युपाशान् । अर्थात् उदित होते हुए सूर्य में […]

जानिए हिंदू धर्म में मुंडन संस्कार का महत्त्व

मुंडन (चूड़ाकर्म) संस्कार क्यों किया जाता है ? इसका क्या महत्त्व है ? मुंडन संस्कार के प्रति यह मान्यता है कि इससे शिशु बुद्धि दोनों ही पुष्ट होते हैं और गर्भगत मलिन संस्कारों से मुक्ति मिलती है। इस का मस्तिष्क और संस्कार में सिर के बाल पहली बार उतारे जाते हैं। शिशु जब एक वर्ष […]

जानिए क्यों है विद्या, ज्ञान, कला, साहित्य और संगीत की अधिष्ठात्री देवी – माँ सरस्वती

सरस्वती को ज्ञान और विद्या की देवी क्यों समझा जाता है ? धर्मशास्त्रों में इनका क्या महत्त्व है ? सुर, लय, ताल और राग-रागिनी आदि का प्रादुर्भाव देवी सरस्वती से ही हुआ है। ये संगीतशास्त्र की अधिष्ठात्री देवी हैं। सात सुरों द्वारा इनका स्मरण किया जाता है। इसी कारण ये स्वरात्मिका भी कहलाती हैं। सप्तविध […]

जीवन के शृंगार है पर्व

पर्वों का महत्व क्यों? भारत के त्योहार देश की एकता एवं अखंडता के प्रतीक हैं, सभ्यता एवं संस्कृति के दर्पण हैं; राष्ट्रीय उल्लास, उमंग और उत्साह के प्राण हैं, प्रेम और भाईचारे का संदेश देने वाले हैं। यहां तक कि जीवन के शृंगार हैं। इनमें मनोरंजन और उल्लास स्वतः स्फूर्त होता है। त्योहारों के माध्यम […]

कैसे और क्यों किया जाता है नवरात्रि में कन्या पूजन

नवरात्रि में कन्या पूजन क्यों? नवरात्र पर्व के दौरान कन्या पूजन का बड़ा महत्व है. नौ कन्याओं को नौ देवियों के प्रतिबिंब के रूप में पूजने के बाद ही भक्तों का नवरात्र व्रत पूरा होता है. अपने सामर्थ्य के अनुसार उन्हें भोग लगाकर दक्षिणा देने मात्र से ही मां दुर्गा प्रसन्न हो जाती हैं. कन्या […]