राजस्थानी भजन

पद संख्या 93 एवं 94

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पद संख्या 93 एवं 94 (Padh Sankhiya 93 aur 94 bhajan in hindi Mp3)

पद संख्या 93  | Padh Sankhya 93

अपना गांव लेवो नन्द रानी , हम तो कही अनन्त असेंगी जाय | | टेर | |

सुनी देख के खोल के सांकल , वह भीतर धंस जाय |

छींके पर से माखन खायो दूध दियो ढलकाय | 1|

हम दधि बेचन जात वृंदावन रसतो रोके धाय |

दोसन मे छोटो सो दोखे हाल बड़ो हो जाय |2 |

एक दिन आय , अचानक मैने श्याम को पकडियो हाथ |

अपना हाथ छुडाय , भाग गयो देवर को पदराय | 3 |

हम यमुना स्नान कर गई चोर चिर लिये जाय |

लेकर चिर कदम चढ़ बैठो अगुठा रायो दिखाय |4 |

‘चन्द्र ‘ सखि भज बाल कृष्ण छवि मोहन को समझाय |

तेरे सूत को उधम यशोदा (मैया ) हमसे सहियो न जाय | 5 |

पद संख्या 94 | Pad Sankhya 94

निरखन दो असवारी , श्याम री , निरखन दो असवारी | टेर |

गरी नगारा ढोर पडत है , गेरी बनी जलुसाई

अत वृषवान बनियो है दुलेरो उत वृषवान दुलारी | १ | निर |

देख सखि कैसी छवि बनी है , ओ त्रिलोकि को एक धनि है |

सुर नर मुनि जन याको ही ध्यावे , याकि महिमा धणी है |२ |

|निर | कसुं बल पाग केसरियो जामो , तुरे तार हजारी |

तुरे रे नीच किलगी सोंहे , केसर फूली क्यारी |३ |निर |

आगति पागती महल चुणाया , अध् विज राखी हे बारी |

इण बारी में कुण कुण झांके , झांके राधा प्यारी |४|निर |

गज बेजन्ती माला सोहे , कानोँ में कुण्डल धारी |

मधुरी सी बैन बजाय सांवरे , मोहि है सब बृजनारो |निर |

यमुना किनारे बालो धेनु चरावे , ठाडो कदम करि डाली |

हाथ जोड़ बृज नार खड़ी लै, पल पल प्राण वारी|६ |निर |

‘चन्द्र सखि ‘ भज बालकृष्ण छवि हरी चरणन बलिहारी |

हाथ जोड़ मै करु बिनती राखोनी लाज हमारी |७ |निर |

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Aaditi Dave

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