ओशो भजन

ओशो ने हिमालय से पुकारा

ओशो ने हिमालय से पुकारा (Osho ne Himalaya se pukara Bhajan in hindi Mp3)

ओशो ने हिमालय से पुकारा, है कोई ले वन हारा।

कितने जन्म गंवाए हमने, मिटा न मन का अंधेरा;

जब-जब मुक्ति चाही तब-तब, बढ़़ता गया नया घेरा।

हाय फिर भी आया ना उजाला, है कोई ले वन हारा।

कितनी राहें बदली हमने, कितने भटके-भूले;

रूप संवारे, संवरन पाया, दर्पण झूठन बोले।

सच्चा ना रूप निखारा, है कोई ले वन हारा।

कितने महल बना ये हमने, खंडहर हो गए सपने;

चमन कितने हमने लगाए, बिखर गए सब अपने।

तज गोरख धंधाये सारा, है कोई ले वन हारा।

बदलीसा की बदली हाला, चूके रागी-बैरागी;

ऐसी मदिराओ शोने ढाली, सिद्धार्थ को तारी लागी।

जागा भाग हमारा, है कोई ले वनहारा।


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Niteen Mutha

नमस्कार मित्रो, भक्तिसंस्कार के जरिये मै आप सभी के साथ हमारे हिन्दू धर्म, ज्योतिष, आध्यात्म और उससे जुड़े कुछ रोचक और अनुकरणीय तथ्यों को आप से साझा करना चाहूंगा जो आज के परिवेश मे नितांत आवश्यक है, एक युवा होने के नाते देश की संस्कृति रूपी धरोहर को इस साइट के माध्यम से सजोए रखने और प्रचारित करने का प्रयास मात्र है भक्तिसंस्कार.कॉम

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