राजस्थानी भजन

निरगुण वाणी तथा सायंकाल के पद

radha-krishana

निरगुण वाणी तथा सायंकाल के पद (Nirgun vani tatha saaykaal bhajuan in hindi Mp3 )

निरगुण वाणी पद न. १९ निरगुण वाणी | Nirgun Vani 

सैयां मै तो श्रीजी कियो विनजरो हे |

इरग गंग्श्याम ने सोच हमारो हे | सैया | टेर |

पांच पचीसी सैया बालद लायो है |

रिद्ध सिद्ध भरिया भण्डारो है | सैया. |१ |

गुरु गम गेडी सैयो हाथ सम्हाला है |

इन पोठिये ने दियो ललकारो हे |सैया .|२ |

धरण गगन बिच बालद डालो है |

राम रतन धन प्यारो हे |सैया |३ |

नवलाजी केवे सैयो धिन इण विनजारे ने |

म्हारी काया री कियो निसतारो हे |सैया |४ |

सायंकाल के पद | Saykaal pad

(आरती न. २० राग श्यामकल्याण ताल कहरवा )

धडी धडी पल पल छीन छीन हरी री आरतियो मै गाऊं |टेर |

सच्चे प्रेम से संचोऊ आरती , सुरत की जोत लगाऊ |१ |

ह्रदय कमल की खोल किवाड़ी दर्शनया मै पाऊ |२ |

घंटा ताल मृदंग बंसरी , गुन्धरिया धमकाऊ |३ |

कमला कंठ पधारो मेरे मोहन , मिलियो अति सुख पाऊं |४ |

कनक कटोरे भरियो प्रेम सु दूध बाटको लाऊ |५ |

सब भक्तो को आई है विनती , चरणों में शिश्निवाऊ |६ |

आरतियाँ मै गाऊ ओ साँवरो , फेर जन्म नहीं पाऊं |७ |

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Aaditi Dave

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