ज्योतिष

नीलम रत्न – शनि गृह को बलवान करने और भाग्य चमकाने का सर्वोत्तम उपाय

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नीलम रत्न – Nilam Ratna – Blue Sphere Stone

शनि ग्रह का रत्‍न नीलम, जिसे अंग्रेजी में ‘Blue Sphere कहते हैं वास्‍तव में उसी श्रेणी का रत्‍न है जिसमें माणिक रत्‍न आता है। ज्‍योतिष विज्ञान में इसे कुरूंदम समूह का रत्‍न कहते हैं। इस समूह में लाल रत्‍न को माणिक तथा दूसरे सभी को नीलम कहते हैं। इसलिए नीलम सफेद, हरे, बैंगनी, नीले आदि रंगों में प्राप्‍त होता है। सबसे अच्‍छा नीलम नीले रंग का होता है जैसे आसमानी, गहरा नीला, चमकीला नीला आदि।

नीलम रत्न के गुण – Properties of Blue Sphere 

यह नीले रंग का होता है और शनि का रत्‍न कहलाता है। ऐसा माना जाता है कि मोर के पंख जैसे रंग वाला नीलम सबसे अच्‍छा माना जाता है। यह बहुत चमकीला और चिकना होता है। इससे आर-पार देखा जा सकता है। यह बेहद प्रभावशाली रत्‍न होता है तथा सभी रत्‍नों में सबसे जल्‍दी अपना प्रभाव दिखाता है।

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वैदिक ज्योतिष के अनुसार शनि का प्रत्येक कुंडली में विशेष महत्व है तथा किसी कुंडली में शनि का बल, स्वभाव और स्थिति कुंडली से मिलने वाले शुभ या अशुभ परिणामों पर बहुत प्रभाव डाल सकती है। शनि के बल के बारे में चर्चा करें तो विभिन्न कुंडली में शनि का बल भिन्न भिन्न होता है जैसे किसी कुंडली में शनि बलवान होते हैं तो किसी में निर्बल जबकि किसी अन्य कुंडली में शनि का बल सामान्य हो सकता है।

किसी कुंडली में शनि के बल को निर्धारित करने के लिय बहुत से तथ्यों का पूर्ण निरीक्षण आवश्यक है हालांकि कुछ वैदिक ज्योतिषी यह मानते हैं कि कुंडली में शनि की किसी राशि विशेष में स्थिति ही शनि के कुंडली में बल को निर्धारित करती है जबकि वास्तविकता में किसी भी ग्रह का किसी कुंडली में बल निर्धारित करने के लिए अनेक प्रकार के तथ्यों का अध्ययन करना आवश्यक है।

विभिन्न कारणों के चलते यदि शनि किसी कुंडली में निर्बल रह जाते हैं तो ऐसी स्थिति में शनि उस कुंडली तथा जातक के लिए अपनी सामान्य और विशिष्ट विशेषताओं के साथ जुड़े फल देने में पूर्णतया सक्षम नहीं रह पाते जिसके कारण जातक को अपने जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में कुंडली में निर्बल शनि को ज्योतिष के कुछ उपायों के माध्यम से अतिरिक्त उर्जा प्रदान की जाती है जिससे शनि कुंडली में बलवान हो जायें तथा जातक को लाभ प्राप्त हो सकें। शनि को किसी कुंडली में अतिरिक्त उर्जा प्रदान करने के उपायों में से उत्तम उपाय है शनि का रत्न नीलम धारण करना जिसे धारण करने के पश्चात धारक को शनि के बलवान होने के कारण लाभ प्राप्त होने आरंभ हो जाते हैं।

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ज्योतिष और नीलम रत्न

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नीलम शनि का रत्‍न है और अपना असर बहुत तीव्रता से दिखाता है इसलिए नीलम कभी भी बिना ज्‍योतिषी की सलाह के नहीं पहनना चाहिए। नीलम रत्न को पहनने के लिए कुंडली में निम्‍न योग होने आवश्‍यक हैं।

  • मेष, वृष, तुला एवं वृश्चिक लग्‍न वाले अगर नीलम को धारण करते हैं तो उनका भाग्‍योदय होता है।
  • चौथे, पांचवे, दसवें और ग्‍यारवें भाव में शनि हो तो नीलम जरूर पहनना चाहिए।
  • शनि छठें और आठवें भाव के स्‍वामी के साथ बैठा हो या स्‍वयं ही छठे और आठवें भाव में हो तो भी नीलम रत्न धारण करना चाहिए।
  • शनि मकर और कुम्‍भ राशि का स्‍वामी है। इनमें से दोनों राशियां अगर शुभ भावों में बैठी हों तो नीलम धारण करना चाहिए लेकिन अगर दोनों में से कोई भी राशि अशुभ भाव में हो तो नीलम नहीं पहनना चाहिए।
  • शनि की साढेसाती में नीलम धारण करना लाभ देता है।
  • शनि की दशा अंतरदशा में भी नीलम धारण करना लाभदायक होता है।
  • शनि की सूर्य से युति हो, वह सूर्य की राशि में हो या उससे दृष्‍ट हो तो भी नीलम पहनना चाहिए।
  • कुंडली में शनि मेष राशि में स्थित हो तो भी नीलम पहनना चाहिए।
  • कुंडली में शनि वक्री, अस्‍तगत या दुर्बल अथवा नीच का हो तो भी नीलम धारण करके लाभ होता है।
  • जिसकी कुंडली में शनि प्रमुख हो और प्रमुख स्‍थान में हो उन्‍हें भी नीलम धारण करना चाहिए।
  • क्रूर काम करने वालों के लिए नीलम हमेशा उपयोगी होता है।

ज्योतिषी द्वारा बताये गये नीलम के भार से बहुत कम भार का नीलम धारण करने से ऐसा नीलम आपको बहुत कम लाभ दे सकता है अथवा किसी भी प्रकार का लाभ देने में अक्षम हो सकता है जबकि अपने ज्योतिषी द्वारा बताये गये नीलम के धारण करने योग्य भार से बहुत अधिक भार का नीलम धारण करने से यह रत्न आपको हानि भी पहुंचा सकता है

जिसका कारण यह है कि बहुत अधिक भार का नीलम आपके शरीर तथा आभामंडल में शनि की इतनी उर्जा स्थानांतरित कर देता है जिसे झेलने तथा उपयोग करने में आपका शरीर और आभामंडल दोनों ही सक्षम नहीं होते जिसके कारण ऐसी अतिरिक्त उर्जा अनियंत्रित होकर आपको हानि पहुंचा सकती है।

इसलिए सदा अपने ज्योतिषी के द्वारा बताये गये भार के बराबर भार का नीलम ही धारण करें क्योंकि एक अनुभवी वैदिक ज्योतिषी तथा रत्न विशेषज्ञ को यह पता होता है कि आपकी कुंडली के अनुसार आपको नीलम रत्न का कितना भार धारण करना चाहिये। अपने नीलम के माध्यम से उत्तम फलों की प्राप्ति के लिए धारण करने से पूर्व अपने नीलम रत्न का शुद्धिकरण तथा प्राण प्रतिष्ठा करवा लें।

शुद्धिकरण की प्रक्रिया के माध्यम से आपके रत्न के उपर संग्रहित किसी भी प्रकार की संभावित नकारात्मक उर्जा को दूर किया जाता है जबकि प्राण प्रतिष्ठा की प्रक्रिया के माध्यम से आपके नीलम को शनि के मंत्रों के माध्यम से तथा विशेष वैदिक विधियों के माध्यम से आपके लिए उत्त्म फल देने के लिए अभिंमत्रित तथा प्रेरित किया जाता है। शुद्धिकरण तथा प्राण प्रतिष्ठा की विधियां तकनीकी हैं तथा अपने रत्न का शुद्धिकरण और प्राण प्रतिष्ठा केवल इन क्रियाओं के जानकार वैदिक पंडितों से ही करवायें।

नीलम धारण करने की विधि – Neelam Ratna Dharan Karne ki Vidhi 

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यदि आप नीलम धारण करना चाहते है तो 3 से 6 कैरेट के नीलम रत्न को स्वर्ण या पाच धातु की अंगूठी में लगवाये! और किसी शुक्ल पक्ष के प्रथम शनि वार को सूर्य उदय के पश्चात अंगूठी की प्राण प्रतिष्ठा करे! इसके लिए अंगूठी को सबसे पहले गंगा जल, दूध, केसर और शहद के घोल में 15 से 20 मिनट तक दाल के रखे, फिर नहाने के पश्चात किसी भी मंदिर में शनि देव के नाम 5 अगरबत्ती जलाये, अब अंगूठी को घोल से निलाल कर गंगा जल से धो ले, अंगूठी को धोने के पश्चात उसे 11 बारी ॐ शं शानिश्चार्ये नम: का जाप करते हुए अगरबत्ती के उपर से घुमाये, तत्पश्चात अंगूठी को शिव के चरणों में रख दे और प्रार्थना करे हे शनि देव में आपका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए आपका प्रतिनिधि रत्न धारण कर रहा हूँ किरपा करके मुझे अपना आशीर्वाद प्रदान करे! फिर अंगूठी को शिव जी के चरणों के स्पर्श करे और मध्यमा ऊँगली में धारण करे!

नीलम रत्न का विकल्‍प 

नीलम न खरीद पाने और अच्‍छा नीलम यदि न उपलब्‍ध हो पा रहा हो तो नीलम के स्‍थान पर लीलिया और जामुनिया धारण किया जा सकता है इसके अलावा जिरकॉन, कटैला, लाजवर्द, नीला तामड़ा, नीला स्‍पाइनेल या पारदर्शी नीला तुरम‍ली पहना जा सकता है।

सावधानी

इसके साथ माणिक्‍य, मोती, मूंगा, पीला पुखराज आदि कभी नहीं पहनना चाहिए।

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Abhishek Purohit

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