बौद्ध धर्म

नालंदा

nalanda

भारत के इतिहास में एक शैक्षिक राज्य के रूप में वर्णित हैं। दुनिया के इस सबसे प्राचीन विश्वविद्यालय के रूप में प्रसिद्ध नालंदा विश्वविद्यालय अपनी शैक्षिक योग्यताओं के कारण बेहद प्रसिद्ध था। नालंदा विश्वविद्यालय के साथ बौद्ध धर्म के कई तार भी जुड़े हैं। माना जाता है कि यहां भगवान बुद्ध बार-बार आएं थे। यही वजह है कि पांचवीं से बारहवीं शताब्दी के बीच नालंदा को बौद्ध शिक्षा के केंद्र के रूप में भी जाना जाता था।

नालंदा का इतिहास (History of Nalanda)

नालंदा शहर की स्थापना पांचवीं शताब्दी में संस्कृत शब्द ‘नालंदा’ के नाम पर हुई थी। नालंदा का शाब्दिक अर्थ ‘ज्ञान देने वाला’ है।

कहा जाता है कि इस स्थान पर भगवान बुद्ध के बार-बार आने के कारण ही इसका धार्मिक महत्त्व बढ़ा। सम्राट अशोक तथा हर्षवर्धन ने यहां सबसे ज्यादा मठों, विहार तथा मंदिरों का निर्माण करवाया था।

नालंदा को ख्याति दिलाने में चीनी यात्री ह्वेन त्सांग ने अहम भूमिका निभाई, जिसने हज़ारों बौद्ध भिक्षुओं द्वारा अपनाई गई अद्भुत व असाधारण शिक्षा प्रणाली के बारे में लिखा।

कई लोगों का मानना है कि नालंदा को कई बार बर्बाद किया गया। नालंदा विश्वविद्यालय को भी जला दिया गया था।

नालंदा की विशेषता (Importance of Nalanda)

नालंदा बौद्ध धार्मिक शिक्षाओं का केन्द्र है। इसके नजदीक ही बिहार शरीफ की दरगाह भी है, जहां हर साल “उर्स” का आयोजन किया जाता है। छठपर्व के दौरान भी यहां का माहौल देखने लायक होता है।

About the author

Niteen Mutha

नमस्कार मित्रो, भक्तिसंस्कार के जरिये मै आप सभी के साथ हमारे हिन्दू धर्म, ज्योतिष, आध्यात्म और उससे जुड़े कुछ रोचक और अनुकरणीय तथ्यों को आप से साझा करना चाहूंगा जो आज के परिवेश मे नितांत आवश्यक है, एक युवा होने के नाते देश की संस्कृति रूपी धरोहर को इस साइट के माध्यम से सजोए रखने और प्रचारित करने का प्रयास मात्र है भक्तिसंस्कार.कॉम

क्या आपको हमारी पोस्ट पसंद आयी ?

error: Content is protected !!