लाल किताब

कुंडली के 12 भावो के अनुसार शनि शांति के ज्योतिषीय उपाय और लाल किताब के टोटके

Shani shanti upay lal kitab

शनि शांति के ज्योतिषीय उपाय (shani shanti ke upay)

यदि आपको किसी भी कारण शनि (shani dev) के शुभ फल प्राप्त नहीं हो रहे हैं। फिर वह चाहे जन्मकुंडली (janam Kundali) में शनि ग्रह (Shani Grah) के अशुभ होने, शनि साढ़ेसाती (shani sade sati) या शनि ढैय्या के कारण है तो पोस्ट में दिये गये सरल लाल किताब (lal kitab remedies) और ज्योतिष उपाय (Jyotish Upay) आपके लिए लाभकारी सिद्ध होंगे।

भारतीय ज्योतिष में यह अवधारणा है की शनि अनिष्टकारक, अशुभ और दुःख प्रदाता है, पर वास्तव में ऐसा नहीं है। मानव जीवन में शनि के सकारात्मक प्रभाव भी बहुत है। शनि संतुलन एवं न्याय के ग्रह हैं। यह सूर्य के पुत्र माने गये हैं। यह नीले रंग के ग्रह हैं, जिससे नीले रंग की किरणें पृथ्वी पर निरंतर पड़ती रहती हैं। यह सबसे धीमी गति से चलने वाला ग्रह है। यह बड़ा है, इसलिए यह एक राशि का भ्रमण करने में अढाई वर्ष तथा 12 राशियों का भ्रमण करने पर लगभग 30 वर्ष का समय लगाता है।

सूर्य पुत्र शनि अपने पिता सूर्य से अत्यधिक दूरी के कारण प्रकाशहीन है। इसलिए इसे अंधकारमयी, विद्याहीन, भावहीन, उत्साह हीन, नीच, निर्दयी, अभावग्रस्त माना जाता है। फिर भी विशेष परिस्थितियों में यह अर्थ, धर्म, कर्म और न्याय का प्रतीक है। इसके अलावा शनि ही सुख-सम्पति, वैभव और मोक्ष भी देते हैं। प्रायः शनि पापी व्यक्तियों के लिए दुख और कष्टकारक होता है। मगर ईमानदारों के लिए यह यश, धन, पद और सम्मान का ग्रह है। शनि की दशा (shani mahadasha) आने पर जीवन में कई उतार-चढ़ाव आते हैं। शनि प्रायः किसी को क्षति नहीं पहुंचाता, लेकिन अति की स्थिति में अनेक ऐसे सरल टोटके हैं, जिनका प्रयोग कर हम लाभ उठा सकते हैं। साथ ही इस पोस्ट में लाल किताब में लिखित शनि के 12 भावों का फलादेश व नियम, परहेज व उपाय भी दिए गए है |

कुंडली के 12 भावो के अनुसार शनि शांति के ज्योतिषीय उपाय

प्रथम भाव में शनि – अपने ललाट पर प्रतिदिन दूध अथवा दही का तिलक लगाए । शनिवार के दिन न तो तेल लगाए और न तेल खाए । तांबे के बने हुए चार साँप शनिवार के दिन नदी में प्रवाहित करे । ·भगवान शनिदेव या हनुमान जी के मंदिर में जाकर यह प्रथना करे की प्रभु- हमसे जो पाप हुए हैं , उनके लिए हमे क्षमा करो ,हमारा कल्याण करो । जब भी
आपको समय मिले शनि दोष निवारण मंत्र का जाप करे ।

दूसरे भाव में शनि – शराब का त्याग करे और मांसाहार भी न करे । साँपो को दूध पिलाए, कभी भी साँपो को परेशान न करे , न ही मारे । दो रंग वाली गाए / भैस कभी भी न पालें । अपने ललाट पर दूध / दही का तिलक करे ! रोज शनिवार को कडवे तेल का दान करें ।शनिवार के दिन किसी तालाब, नदी में मछलियों को आटा डाले । सोते समय दूध का सेवन न करें । शनिवार के दिन सिर पर तेल न लगाएं ।

तीसरे भाव में शनि – आपके घर का मुख्य दरबाजा यदि दक्षिण दिशा की ओर हो तो उसे बंद करवा दे । रोज शनि चालीसा पढ़ें तथा दूसरों को भी शनि चालीसा भेंट करें । शराब का त्याग करे और मांसाहार भी न करे । गले में शनि यंत्र धारण करें । मकान के आखिर में एक अंधेरा कमरा बनवाएँ । अपने घर पर एक काला कुत्ता पाले तथा उस का ध्यान रखें ।
घर क अंदर कभी हैंडपम्प न लगवाएँ ।

चतुर्थ भाव में शनि – रात में दूध न पिये । पराई स्त्री से अवैध संबंध कदापि न बनाएँ । कौवों को दना खिलाएँ । सर्प को दूध पिलाएँ ,काली भैस पालें ,कच्चा दूध शनिवार दिन कुएं में डालें । एक बोतल शराब शनिवार के दिन बहती नदी में प्रवाहित करें ।

पंचम भाव में शनि – पुत्र के जन्मदिन पर नमकीन वस्तुएं बांटनी चाहिए- मिठाई आदि नहीं । माँस और शराब का सेवन न करें, काला कुत्ता पालें और उसका पूरा ध्यान रखें ,शनि यंत्र धारण करें,शनिदेव की पुजा करें, शनिवार के दिन अपने भार के दसवें हिस्से के बराबर वजन करके – बादाम नदी में प्रवाहित करने का कार्य करें ।

छठवाँ भाव में शनि – चमड़े के जूते , बैग , अटैची आदि का प्रयोग न करें । शनिवार का व्रत करें । चार नारियल बहते पनि में प्रवाहित करें – ध्यान रहे , गंदे नाले मे नहीं करें , परिणाम बिल्कुल उल्टा होगा । हर शनिवार के दिन काली गाय को घी से चुपड़ी हुई रोटी नियमित रूप से खिलाएँ , शनि यंत्र धारण करें ।

सप्तमभाव में शनि – पराई स्त्री से अवैध संबंध कदापि न बनाएँ , हर शनिवार के दिन काली गाय को घी से चुपड़ी हुई रोटी नियमित रूप से खिलाएँ । शनि यंत्र धारण करें ,मिट्टी के पात्र में शहद भरकर खेत में मिट्टी के नीचे दबाएँ। खेत की जगह बगीचे में भी दबा सकते हैं , अपने हाथ में घोड़े की नाल का शनि छल्ला धारण करें ।

अष्टम भाव में शनि – गले में चाँदी की चेन धारण करें , शराब का त्याग करे और मांसाहार भी न करे । शनिवार के दिन आठ किलो उड़द बहती नदी में प्रवाहित करें । उड़द काले कपड़े में बांध कर ले जाएँ और बंधन खोल कर ही प्रबहित करें । सोमवार के दिन चावल का दान करना आपके लिए उत्तम हैं । काला कुत्ता पालें और उसका पूरा ध्यान रखें ।

नवम भाव में शनि – पीले रंग का रुमाल सदैव अपने पास रखें , साबुत मूंग मिट्टी के बर्तन में भरकर नदी में प्रवाहित करें, साव 6 रत्ती का पुखराज गुरुवार को धारण करें , कच्चा दूध शनिवार दिन कुएं में डालें ।  हर शनिवार के दिन काली गाय को घी से चुपड़ी हुई रोटी नियमित रूप से खिलाएँ , शनिवार के दिन किसी तालाब, नदी में मछलियों को आटा
डाले ।

दशम भाव में शनि -पीले रंग का रुमाल सदैव अपने पास रखें । आप अपने कमरे के पर्दे , बिस्तर का कवर , दीवारों का रंग आदि पीला रंग की करवाएँ- यह आप के लिए उत्तम रहेगा ।पीले लड्डू गुरुवार के दिन बाँटे , आपने नाम से मकान न बनवाएँ , अपने ललाटपर प्रतिदिन दूध अथवा दही का तिलक लगाए ,शनि यंत्र धारण करें । जब भी आपको समय मिले शनि दोष निवारण मंत्र का जाप करे ।

एकादश भाव में शनि – शराब और माँस से दूर रहें ,मित्र के वेश मे छुपे शत्रुओ से सावधान रहें । सूर्योदय से पूर्व शराब और कड़वा तेल मुख्य दरवाजे के पास भूमि पर गिराएँ , परस्त्री गमन न करें , शनि यंत्र धारण करें , कच्चा दूध शनिवार दिन कुएं में डालें , कौवों को दना खिलाएँ ।

बारह भाव में शनि – जातक झूठ न बोले , शराब और माँस से दूर रहें , चार सूखे नारियल बहते जल में परवाहित करें , शनि यंत्र धारण करें , शनिवार के दिन काले कुत्ते ओर गाय को रोटी खिलाएँ । शनिवार को कडवे तेल , काले उड़द का दान करे ,सर्प को दूध पिलाएँ |

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लाल किताब अनुसार शनि शांति के उपाय (Lal Kitab Shani Shanti Upay)

शनिदोष (Shanidosh) होने पर व्यक्ति को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है और कभी बार परिस्थितियां बेहद विपरीत हो जाती हैं। ऐसे में कुछ उपाय हैं, जिसको अपनाकर शनिदोष को कम किया जा सकता है और परिस्थितियां बेहतर बनायी जा सकती हैं।

 

  1. खाली पेट नाश्ते से पूर्व काली मिर्च चबाकर गुड़ या बताशे से खाएं।
  2. भोजन करते समय नमक कम होने पर काला नमक तथा मिर्च कम होने पर काली मिर्च का प्रयोग करें।
  3. भोजन के उपरांत लौंग खाये।
  4. शनिवार व मंगलवार को क्रोध न करें।
  5. भोजन करते समय मौन रहें।
  6. प्रत्येक शनिवार को सोते समय शरीर व नाखूनों पर तेल मसलें।
  7. मॉस, मछली, मद्य तथा नशीली चीजों का सेवन बिलकुल न करें।
  8. घर की महिला जातक के साथ सहानुभूति व स्नहे बरते. क्योकि जिस घर में गृहलक्ष्मी रोती है उस घर से शनि की सुख-शांति व समृद्धि रूठ जाती है। महिला जातक के माध्यम से शनि प्रधान व्यक्ति का भाग्य उदय होता है।
  9. गुड़ व चनें से बनी वस्तु भोग लगाकर अधिक से अधिक लोगों को बांटना चाहिए।
  10. उड़द की दाल के बड़े या उड़द की दाल, चावल की खिचड़ी बाटनी चाहिए। प्रत्येक शनिवार को लोहे की कटोरी में तेल भरकर अपना चेहरा देखकर डकोत को देना चाहिए। डकोत न मिले तो उसमे बत्ती लगाकर उसे शनि मंदिर में जला देना चाहिए।
  11. प्रत्येक शनि अमावस्या को अपने वजन का दशांश सरसों के तेल का अभिषेक करना चाहिए।
  12. शनि मृत्युंजय स्त्रोत दशरथ कृत शनि स्त्रोत का 40 दिन तक नियमित पाठ करें।
  13. काले घोड़े की नाल अथवा नाव की कील से बना छल्ला अभिमंत्रित करके धारण करना शनि के कुप्रभाव को हटाता है।
  14. जिस जातक के परिवार, घर में रिश्तेदारी, पड़ोस में कन्या भ्रूण हत्या होती है. जातक प्रयास कर इसे रोकेगा तो शनि महाराज उससे अत्यंतप्रसन्न होते है।
  15. कपूर को नारियल के तेल में डालकर सिर में लगायें, भोजन में उड़द की दाल का अत्यधिक सेवन करें, झूठ, कपट, मक्कारी धोखे से बचे, रहने के स्थान पर अंधेरा, सूनापन व खंडहर की स्थति न होने दे।
  16. शनि मंदिर में काले चनें, कच्चा कोयला, काली हल्दी, काले तिल, काला कम्बल और तेल दे।
  17. शनि मंदिर में जाकर परिक्रमा व दंडवत प्रणाम करें।
  18. शनिवार सूर्यास्त्र के समय एक पानी वाला नारियल, 5 बादाम, कुछ दक्षिणा शनि मंदिर में चढायें।शनि मंदिर से शनि रक्षा कवच या काला धागा हाथ में बांधने के लिए अवश्य लें।
  19. शनि की शुभ फल प्राप्ति के लिए दक्षिण दिशा में सिराहना कर सोयें व पश्चिम दिशा में मुख कर सारे कार्य करें व अपनेदेवालय में शनि का आसन अवश्य बनायें।
  20. प्रत्येक शुभ कार्य में पूर्व कार्य बाधा निवारण के लिए प्रार्थना करके हनुमान व शनि देव के नाम का नारियल फोड़े।
  21. प्रत्येक शनिवार को रात्रि में सोते समय आँखों में काजल या सुरमा लगायें व शनिवार का काला कपडा अवश्य पहने।
  22. महिलाओं से अपने भाग्य उदय के लिए सहयोग, समर्थन व मार्गदर्शन प्राप्त करें तो प्रगति होगी।
  23. अपनों से बड़ी उम्र वालें व्यक्ति का सहयोग प्राप्त करें व अपनी से छोटी जाती व निर्बल व्यक्ति की मदद करें।
  24. प्रति महा की अमावस्या आने से पूर्व अपने घर व व्यापार की सफाई व धुलाई अवश्य करें व तेल का दीपक जलाएं।
  25. शनि अमावस्या, शनि जयंती या शनिवार को बन पड़े तो शनि मंदिर में नंगे पैर जाएँ।
  26. घर बनाते समय काली टायल, काला मार्बल या काले रंग की कुछ वस्तु प्रयोग में लायें।

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