योगासन

कटिपिण्डमर्दनासन : रीढ़ की हड्डी की जकड़न, उदासीनता को दूर करने के लिए योगासन


इस आसन में कटिप्रदेश (कमर के पास वाले भाग) में स्थित पिण्ड अर्थात मूत्रपिण्ड का मर्दन होता है, इससे यह आसन कटिपिण्डमर्दनासन कहलाता है।

ध्यान स्वाधिष्ठान चक्र में। श्वास पूरक और कुम्भक।

विधि : 

बिछे हुए कम्बल पर पीठ के बल चित्त होकर लेट जायें। दोनों हाथों को आमने-सामने फैला दें। मुट्ठियाँ बन्द रखें। दोनों पैरों को घुटनों से मोड़कर खड़े कर दें। पैर के तलवे ज़मीन से लगे रहें। दोनों पैरों के बीच इतना अन्तर रखें कि घुटनों को ज़मीन पर झुकाने से एक पैर का घुटना दूसरे पैर की एड़ी को लगें… सिर दायीं ओर मुड़े तो दोनों घुटने दाहिनी ओर ज़मीन को लगें। इस प्रकार 15-20 बार क्रिया करें। इस प्रकार दोनों पैरों को एक साथ रखकर भी क्रिया करें।

लाभ : 

जिसको पथरी की तकलीफ हो उसे आश्रम (संत श्री आसारामजी आश्रम, साबरमति, अमदावाद-5) से बिना मूल्य मिलती काली भस्म करीब डेढ़ ग्राम, भोजन से आधा घण्टा पूर्व और भोजन के बाद एक गिलास पानी के साथ लेना चाहिए और यह आसन भूखे पेट ठीक ढंग से करना चाहिए। इससे पथरी के दर्द में लाभ होता है। पथरी टुकड़े-टुकड़े होकर मूत्र के द्वारा बाहर निकलने लगती है।

मूत्रविकार दूर होता है। कमर दर्द, साइटिका, रीढ़ की हड्डी की जकड़न, उदासीनता, निराशा, डायाबिटीजं, नपुंसकता, गैस, पैर की गाँठ इत्यादि रोगों में शीघ्र लाभ होता है। नाभि स्थान से च्युत हो जाती हो तो पुनः अपने स्थान में आ जाती है कब्ज का रोगी सुबह शौच जाने से पहले उषःपान करके यह आसन करे तो चमत्कारिक लाभ होता है। श्वास को अन्दर भर के पेट को फुलाकर यह आसन करने से कब्ज जल्दी दूर होता है।

सावधानी :

मासिक धर्म के समय एवं गर्भावस्था में स्त्रियाँ यह आसन न करें।

About the author

Niteen Mutha

नमस्कार मित्रो, भक्तिसंस्कार के जरिये मै आप सभी के साथ हमारे हिन्दू धर्म, ज्योतिष, आध्यात्म और उससे जुड़े कुछ रोचक और अनुकरणीय तथ्यों को आप से साझा करना चाहूंगा जो आज के परिवेश मे नितांत आवश्यक है, एक युवा होने के नाते देश की संस्कृति रूपी धरोहर को इस साइट के माध्यम से सजोए रखने और प्रचारित करने का प्रयास मात्र है भक्तिसंस्कार.कॉम

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