हिन्दू धर्म

जाने कार्तिक पूर्णिमा महिमा और पूजा विधि, क्यों करते है इस दिन भगवान शिव और गंगा की पूजा

हिंदू धर्म में कार्तिक के महीने का खासा महत्‍व होता है. कार्तिक पूर्ण‍िमा (Kartik Purnima) इस साल 4 नवंबर को है. सभी 12 पूर्णिमाओं में कार्तिक मास (Kartik Mas) की पूर्णिमा अपना खास स्थान रखती है. इस पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा और गंगा स्नान पूर्णिमा (Ganga Snan Purnima) के नाम से भी जाना जाता है. कार्तिक का महीना बहुत ही पवित्र माना जाता है और बेहद शुभ माना जाता है. इ्स दिन स्नान और दान का बड़ा महत्व है. इस दिन गंगा में स्नान करने से सभी जन्मों के पापों से मुक्ति मिलती है. इस विशेष दिवस पर विधि-विधान से पूजा अर्चना करना ना केवल पवित्र माना जाता है बल्कि इससे समृद्धि भी आती है और इससे सभी कष्ट दूर हो सकते हैं. इस दिन पूजा करने से कुंडली, धन और शनि दोनों के ही दोष दूर हो जाते हैं. तीर्थस्थलों पर तो यह बेहद धूम-धाम से मनाया जाता है. इस दिन श्रद्धालु गंगा स्नान कर दीप दान करते हैं. इलाहाबाद, वाराणसी, अयोध्या जैसे शहरों में यह बेहद जोर-शोर से मनाया जाता है. इस दिन उपवास करने से हजार अश्वमेध और सौ राजसूय यज्ञ के बराबर फल प्राप्त होता है.

पौराणिक कथोओं के मुताबिक कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही गुरुनानक देव का जन्म हुआ था. इसलिए सिख धर्म में इस दिन को प्रकाश पर्व के रूप में मनाया जाता है.

कार्तिक पूर्णिमा पूजा विधि | Kartik Purnima Puja Vidhi

  • आप प्रातः काल शीघ्र उठकर सूर्य देव को जल अर्पित करें. जल में चावल और लाल फूल भी डालें.
  • सुबह स्नान के बाद घर के मुख्यद्वार पर अपने हाथों से आम के पत्तों का तोरण बनाकर बांधे.
  • सरसों का तेल, तिल, काले वस्त्र आदि किसी जरूरतमंद को दान करें.
  • सायं काल में तुलसी के पास दीपक जलाएं और उनकी परिक्रमा करें.
  • इस दिन ब्राह्मण के साथ ही अपनी बहन, बहन के लड़के, यानी भान्जे, बुआ के बेटे, मामा को भी दान स्वरूप कुछ देना चाहिए.
  • जब चंद्रोदय हो रहा हो, तो उस समय शिवा, संभूति, संतति, प्रीति, अनुसूया और क्षमा इन छ: कृतिकाओं का पूजन करने से शिव जी का आशीर्वाद मिलता है.

 

क्या किया था भगवन शिव ने इस दिन | Kartik Purnima Shiv Katha

दैत्य तारकासुर के तीन पुत्र थे- तारकाक्ष, कमलाक्ष व विद्युन्माली। जब भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय ने तारकासुर का वध कर दिया तो उसके पुत्रों को बहुत दुःख हुआ। उन्होंने देवताओं से बदला लेने के लिए घोर तपस्या कर ब्रह्माजी को प्रसन्न कर लिया। जब ब्रह्माजी प्रकट हुए तो उन्होंने अमर होने का वरदान मांगा, लेकिन ब्रह्माजी ने उन्हें इसके अलावा कोई दूसरा वरदान मांगने के लिए कहा। तब उन तीनों ने ब्रह्माजी से कहा कि- आप हमारे लिए तीन नगरों का निर्माण करवाईए। हम इन नगरों में बैठकर सारी पृथ्वी पर आकाश मार्ग से घूमते रहें। एक हजार साल बाद हम एक जगह मिलें। उस समय जब हमारे तीनों पुर (नगर) मिलकर एक हो जाएं, तो जो देवता उन्हें एक ही बाण से नष्ट कर सके, वही हमारी मृत्यु का कारण हो। ब्रह्माजी ने उन्हें ये वरदान दे दिया।

ब्रह्माजी का वरदान पाकर तारकाक्ष, कमलाक्ष व विद्युन्माली बहुत प्रसन्न हुए। ब्रह्माजी के कहने पर मयदानव ने उनके लिए तीन नगरों का निर्माण किया। उनमें से एक सोने का, एक चांदी का व एक लोहे का था। सोने का नगर तारकाक्ष का था, चांदी का कमलाक्ष का व लोहे का विद्युन्माली का। अपने पराक्रम से इन तीनों ने तीनों लोकों पर अधिकार कर लिया। इन दैत्यों से घबराकर इंद्र आदि सभी देवता भगवान शंकर की शरण में गए। देवताओं की बात सुनकर भगवान शिव त्रिपुरों का नाश करने के लिए तैयार हो गए। विश्वकर्मा ने भगवान शिव के लिए एक दिव्य रथ का निर्माण किया।

चंद्रमा व सूर्य उसके पहिए बने, इंद्र, वरुण, यम और कुबेर आदि लोकपाल उस रथ के घोड़े बने। हिमालय धनुष बने और शेषनाग उसकी प्रत्यंचा। स्वयं भगवान विष्णु बाण तथा अग्निदेव उसकी नोक बने। उस दिव्य रथ पर सवार होकर जब भगवान शिव त्रिपुरों का नाश करने के लिए चले तो दैत्यों में हाहाकर मच गया। दैत्यों व देवताओं में भयंकर युद्ध छिड़ गया। जैसे ही त्रिपुर एक सीध में आए, भगवान शिव ने दिव्य बाण चलाकर उनका नाश कर दिया। त्रित्रुरों का नाश होते ही सभी देवता भगवान शिव की जय-जयकार करने लगे। त्रिपुरों का अंत करने के लिए ही भगवान शिव को त्रिपुरारी भी कहते हैं।

गंगा स्नान का क्या है महत्व ? | Kartik Purnima Ganga Snan

  • कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है.
  • ऐसा माना जाता है कि इस दिन स्नान करने से व्यक्ति के सारे पाप धुल जाते हैं.
  • इस दिन चंद्रमा को अर्घ्य देने से पुण्य प्राप्त होता है.

एेसे करें पूजा ? | Kartik Purnima Ganga Puja Vidhi

  • इस दिन सुर्योदय से पहले गंगा स्नान करके भगवान विष्णु की आराधना करनी चाहिए.
  • गंगा स्नान के दिन व्रत रखने से विशेष फल मिलता है. व्रत करने के बाद ब्राह्मणों को दान देना चाहिए.
  • इस दिन घर में हवन करवाना चाहिए.
  • इस दिन नमक का सेवन नहीं करना चाहिए.

गंगा स्नान करने से क्या हैं फायदे ? | Ganga Snan Karne ke Fayde

  • गंगा स्नान करने से व्यक्ति को तेज बल जैसे गुण मिलते हैं.
  • गंगा के पवित्र जल से स्नान करने से आयु की वृद्धि होती है.
  • हिंदु मान्यताअों के मुताबिक गंगा स्नान करने से आरोग्य गुण मिलते हैं

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