जीवन के शृंगार है पर्व

पर्वों का महत्व क्यों?

भारत के त्योहार देश की एकता एवं अखंडता के प्रतीक हैं, सभ्यता एवं संस्कृति के दर्पण हैं; राष्ट्रीय उल्लास, उमंग और उत्साह के प्राण हैं, प्रेम और भाईचारे का संदेश देने वाले हैं। यहां तक कि जीवन के शृंगार हैं। इनमें मनोरंजन और उल्लास स्वतः स्फूर्त होता है। त्योहारों के माध्यम से ही युवा पीढ़ी में सात्विक गुणों का विकास होकर आत्मबल की वृद्धि होती है । कर्तव्य के मार्ग पर बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। दुष्कर्मों को छोड़कर अच्छे कर्म करने की प्रेरणा मिलती है।

अक्सर प्रत्येक त्योहार मनाने के पीछे कोई न कोई विशेष कारण या कोई कथा छिपी होती है और हर त्योहार किसी न किसी देवता, महापुरुष या हमारे पूर्वजों को समर्पित होता है और इसी कारण देवी-देवता या महापुरुषों की पूजा अर्चना की जाती है। त्योहारों को मनाने से लाभ यह होता है कि उनसे हमारी आस्तिकता की भावना प्रबल हो जाती है और यह आस्तिकता की भावना ही हमारी अंतर्रात्मा बनकर हमें बुरे कर्म करने से रोकती है एवं अच्छे कर्म करने की प्रेरणा देती है।

भारतीय त्योहारों का कलात्मक महत्व

भारत में त्योहारों का महत्त्व ग्रामीण परिवेश में अधिक था और अधिक है। शहर की जटिल तनाव ग्रस्त जिन्दगी में त्यौहारों को मनाने का समय नहीं है। हर आदमी पैसा कमा कर अधिक-से-अधिक विलास सामग्री बटोर लेना चाहता है परन्त इस बीच त्योहारों के रूप में जो आनन्द उसे मिल सकता है, उसे भूल जाता है। आज का शहरी इन्सान, धर्म-कर्म से दूर भागने लगा है। संस्कृति के उच्चतर मूल्यों पर ध्यान देने का समय उसके पास नहीं है। प्रकृति से उसका नाता वर्षों पहले ट्ट गया है। आज के मनुष्य के लिए त्योहार प्रसन्नता के अवसर न रह कर परेशानी के कारण बन गए हैं। आज आदमी इतना अधिक आत्म-केन्द्रित हो गया है कि उसे खुशियों में भाग लेना अच्छा नहीं लगता।

हमारे देश के प्रमुख त्योहारों में नागपंचमी, रक्षाबधंन, जन्माष्टमी, दशहरा, दीवाली, होली, ईद, मुहर्रम, बकरीद, क्रिसमस, ओणम, बैसाखी, रथयात्रा, 15 अगस्त, 2 अक्टूबर, 26 जनवरी, गुरुनानक जयंती, रविदास जयंती, 14 नवम्बर, महावीर जयंती, बुद्ध-पूर्णिमा, राम-नवमी आदि हैं । सभी के त्योहार हमें परस्पर एकता, एकरसता, एकरूपता और एकात्मकता का पाठ पढ़ाते हैं ।

यही कारण है कि हम हिन्दू, मुसलमानों, ईसाइयों, सिक्खों आदि के त्योहारों और पर्वों को अपना त्योहार पर्व मान करके उसमें भाग लेते है और हृदय से लगाते हैं । इसी तरह से मुसलमान, सिक्ख, ईसाई भी हमारे हिन्दू त्योहारों-पर्वों को तन-मन से अपना करके अपनी अभिन्न भावनाओं को प्रकट करते हैं ।

अतएव हमारे देश के त्योहारों का महत्त्व धार्मिक, सांस्कृतिक, सामाजिक और आध्यात्मिक दृष्टि से बहुत अधिक है । राष्ट्रीय महत्व की दृष्टि से 15 अगस्त, 26 जनवरी, 2 अक्टूबर, 14 नवम्बर का महत्त्व अधिक है । संक्षेप में हम कह सकते हैं कि हमारे देश के त्योहार विशुद्ध प्रेम, भेदभाव और सहानुभूति का महत्त्वांकन करते हैं ।

त्योहारों को मनाने की विधियों में जो विकृतियाँ आ गई हैं, यथा – मदिरापान, जुआ खेलना, धार्मिक उन्माद उत्पन्न करना, ध्वनि प्रदूषण व वायु प्रदूषण को बढ़ावा देना, उन्हें शीघ्रातिशिघ्र समाप्त करना होगा । हम त्योहारों को उनकी मूल भावना के साथ मनाएँ ताकि सुख-शांति में वृद्धि हो सके ।

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