पौराणिक कथाएं

होली कथा

holika-katha

होली : प्रह्लाद, हिरण्यकश्यप और होलिका

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अपने आप को धर्म और भगवान से ऊँचा मानने वालाहिरण्यकश्यप नाम का एक राजा था ।वह चाहता था कि सब लोगउसे ही भगवान मानें और उसकी पूजा करें ।पर हिरण्यकश्यप केपुत्र ने उसे भगवान मानने से साफ इनकार कर दिया ।

बहुत यातनाव अत्याचार के बाद भी वह वह स्वयंभू अपने पुत्र भक्त प्रह्लाद सेअपने को भगवान कहलाने में असफल रहा ।हार कर अन्त मेंउसने प्रह्लाद को जान से मारने का तरीका सोचा । हिरण्यकश्यप की एक होलिका नाम की बहन थी ।होलिका के पास एक अग्निरोधक वरदान वाला शॉल था ।

वरदान के अनुसार यदि वह शाल ओढ़ कर आग में बैठेगी तो आग उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकेगी । हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन से कहा कि वह प्रह्लाद को गोद में ले कर चिता पर बैठ जाए । होलिका ने अपने भाई का कहना माना और प्रह्लाद को गोद में ले कर चिता पर बैठ गयी । लेकिन जब चिता जली तो लपटों में होलिका का शॉल उड़ गया । होलिका जल मरी,पर भक्त प्रह्लाद का बाल बाँका नहीं हुआ।

प्रतिवर्ष होली जला कर हम इसी घटना का स्मरण करते हैं । होलिका दहन कर हिरण्यकश्यप की कुटिल चाल को नाकाम करते हैं। भक्त प्रह्लाद को जिन्दा रखते हैं।

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