मीराबाई भजन

हरिसे मिलूं कैसे

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हरिसे मिलूं कैसे (Hari se Milu Kese BHajan in hindi Mp3)

गली तो चारों बंद हु हैं मैं हरि से मिलूं कैसे जाय॥

ऊंची-नीची राह रपटली पांव नहीं ठहराय।

सोच सोच पग धरूं जतन से बार-बार डिग जाय॥

ऊंचा नीचां महल पिया का म्हांसूं चढ्यो न जाय।

पिया दूर पथ म्हारो झीणो सुरत झकोला खाय॥

कोस कोस पर पहरा बैठया पैग पैग बटमार।

हे बिधना कैसी रच दीनी दूर बसायो लाय॥

मीरा के प्रभु गिरधर नागर सतगुरु द बताय।

जुगन-जुगन से बिछड़ी मीरा घर में लीनी लाय॥

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