यात्रा

हमुमान गाढ़ी,अयोधया

Hamuman Gadhi, Ayodhaya

कलियुग में सबसे ज्यादा भगवान शंकर के ग्यारवें रुद्र अवतार श्रीहनुमानजी को ही पूजा जाता है इसीलिए हनुमानजी को कलियुग का जीवंत देवता भी माना जाता है। चाहे किसी भी प्रकार की समस्या हो भगवान हनुमान अपने भक्तों की हर समस्या का निदान तुरंत कर देते

हैं। वैसे तो भारत भर में हनुमानजी के लाखों मंदिर हैं लेकिन उनमें से इस मंदिर की अपनी खास विशेषता है जिसके चलते यहां हनुमानजी के दर्शनों के लिए भक्तों का सैलाब उमड़ता है। हनुमानगढ़ी, अयोध्या

हनुमानगढ़ी मंदिर अयोध्या में स्थित है। यह मंदिर अयोध्या में सरयू नदी के दाहिने तट पर एक ऊंचे टीले पर स्थित है। यहाँ तक पहुँचने के लिए 76 सीढिय़ाँ चढऩी होती हैं। यहाँ पर स्थापित हनुमान जी की प्रतिमा केवल छ: (6) इंच लम्बी है, जो हमेश फूल-मालाओं से सुशोभित रहती है। इस मंदिर को हनुमान जी का घर भी कहा जाता है, यह मंदिर भगवान हनुमान को समर्पित है। यह मंदिर अयोध्‍या में एक टीले पर स्थित है और यहां से काफी दूर तक साफ-साफ देखा जा सकता है। इस मंदिर तक पहुंचने के लिए लगभग 76 सीढि़यां चढ़नी पड़ती हैं।

हनुमान गढ़ी, वास्‍तव में एक गुफा मंदिर है। इस मंदिर परिसर के चारों कोनो में परिपत्र गढ़ हैं। मंदिर परिसर में मां अंजनी व बाल ( बच्‍चे ) हनुमान की मूर्ति है जिसमें हनुमान जी, अपनी मां अंजनी की गोदी में बालक रूप में लेटे है। यह विशाल मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से अच्‍छा है बल्कि वास्‍तु पहलू से भी इसे बहुत अच्‍छा माना जाता है। लोगों का मानना है कि इस मंदिर में सभी मन्‍नतें पूरी होती हैं। साल भर इस मंदिर में भक्‍तों का तांता लगा रहता है। और सच्चे मन में हनुमान लला के इस दरबार में सिर झुका भर देने से पवनपुत्र अपने भक्तों के समस्त कष्टों का निदान कर देते हैं|

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पौराणिक कथा

मान्यता है कि भगवान राम जब लंका जीतकर अयोध्या लौटे तो उन्होंने अपने प्रिय भक्त हनुमान को रहने के लिए यही स्थान दिया, साथ ही ये अधिकार भी दिया कि जो भी भक्त मेरे दर्शनों के लिए अयोध्या आएगा उसे पहले तुम्हारा दर्शन पूजन करना होगा| लंका विजय के बाद अयोध्या में इसी स्थान पर भगवान श्री राम ने हनुमान को रहने का स्थान दिया जो आज हनुमान गढ़ी कहलाता है और हनुमान गढ़ी ही अयोध्या की सुरक्षा गढ़ी भी कही जाती थी| जहां आज भी छोटी दीपावली के दिन आधी रात को संकटमोचन का जन्म दिवस मनाया जाता है| पवनपुत्र के जन्म दिवस का साक्षी बनना हर भक्त के लिए सौभाग्य की बात होती है|

कहते हैं एक बार नवाबा का पुत्र बहुत बीमार पड़ गया| पुत्र के प्राण बचने के कोई आसार न देखकर नवाब ने बजरंगबली के चरणों में माथा टेक दिया| संकटमोचन ने नवाब के पुत्र के प्राणों को वापस लौटा दिया, जिसके बाद नवाब ने न केवल हनुमान गढ़ी मंदिर का जीर्णोंद्धार कराया बल्कि तांम्रपत्र पर लिखकर ये घोषणा की कि कभी भी इस मंदिर पर किसी राजा या शासक का कोई अधिकार नहीं रहेगा और न ही यहां के चढ़ावे से कोई कर वसूल किया जाएगा|

रंग बिरगी झालरों और झिलमिल करते दीपों के बीच रात बारह बजे शंखनाद होता है और पूरा आसमान रोशनी से जगमग हो उठता है| भक्त सुधबुध खोकर इस हर्ष-उल्लास को अपने में समेट लेना चाहते हैं| माना जाता है कि संकटमोचक हनुमान जी का जन्म रोशनी के इस पर्व की आधी रात को हुआ था और इसीलिए हर साल दीपावली पर देश के कोने-कोने से भक्त अयोध्या पहुंचते हैं| लंका से विजय के प्रतीक रूप में लाए गए निशान भी इसी गढ़ी में रखे गए जो आज भी खास मौके पर बाहर निकाले जाते हैं और जगह-जगह पर उनकी पूजा-अर्चना की जाती है| होली से ठीक पहले रंग भरी एकादशी उन खास दिनों में से एक है जब ये निशान बाहर निकाले जाते हैं और भक्त उनकी आराधना कर खुशियां मनाते हैं| यहीं से साधु संतों की होली के साथ देशभर में होली की शुरुआत होती है| यहां पर हनुमान लला की आराधना और दर्शन का विशेष समय निश्चित है| कहते हैं विशेष मुहूर्त में पवनपुत्र की आराधना से भक्तों की हर मुराद पूरी होती है|

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Aaditi Dave

Hello Every One, Jai Shree Krishna, as I Belong To Brahman Family I Got All The Properties of Hindu Spirituality From My Elders and Relatives & Decided To Spreading All The Stuff About Hindu Dharma's Devotional Facts at Only One Roof.

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