भक्ति

घर के कृष्ण मंदिर में ध्यान रखनी चाहिए यह 6 बातें और 20 नियम

श्री कृष्ण को प्रेम स्वरूप माना जाता है। ग्रंथों में कहा गया है कि श्री कृष्ण का व्यक्तित्व बहुत ही सम्मोहक है। वे पीला पीतांबर धारण करते हैं और उनके मुकुट पर मोर पंख है। श्री कृष्ण को छ: चीजों से बहुत प्रेम है, पहली बांसुरी जो हमेशा उनके होंठों से लगी रहती है। दूसरी गाय व तीसरी माखन मिश्री, चाैथा मोर पंख और पांचवा कमल और वैजयंती माला। ये छ: चीजें श्री कृष्ण को प्रिय होती है इसलिए जो भी श्री कृष्ण को ये चीजें अर्पित करता है। उसके घर में हमेशा सुख समृद्धि व ऐश्वर्य बना रहता है। आइए जानते हैं श्री कृष्ण को क्यों प्रिय है ये 6 चीजें |

मुरली या बांसुरी (Murali, Bansuri or Flute)

कृष्ण को बांसुरी बहुत पसंद है, क्योंकि यह कान्हा को बहुत प्रिय है, इसके तीन मुख्य कारण हैं पहला बांसुरी एकदम सीधी होती है। उसमें किसी तरह की गांठ नहीं होती है। जो संकेत देता है कि अपने अंदर किसी भी प्रकार की गांठ मत रखों। मन में बदले की भावना मत रखो। दूसरा बिना बजाए ये बजती नहीं है। मानो बता रही है कि जब तक ना कहा जाए तब तक मत बोलो और तीसरा जब भी बजती है मधुर ही बजती है। जिसका अर्थ हुआ जब भी बोलो, मीठा ही बोलो। जब ऐसे गुण किसी में भगवान देखते हैं, तो उसे उठाकर अपने होंठों से लगा लेते हैं।

गाय (Cow)

कहते हैं गाय के शरीर में 33 करोड़ देवी-देवताओं का निवास होता है। साथ ही, यह सभी गुणों की खान है। गाय श्रीकृष्ण को अतिप्रिय है। गाय से प्राप्त गौ का मूत्र, गोबर, दूध, दही और घी, आदि पंचगव्य कहलाते हैं। मान्यता है कि इनका पान कर लेने से शरीर के भीतर पाप नहीं ठहरता। इसलिए घर के मंदिर में कृष्ण जी के साथ ही गाय व बछड़ा भी रखना चाहिए।

मोरपंख  (Morpankah)

मोर का पंख देखने में बहुत सुंदर होता है। इसलिए इसे सम्मोहन का प्रतीक माना जाता है। मोर को चिर-ब्रह्मचर्य युक्त प्राणी समझा जाता है।  इसलिए श्री कृष्ण मोर पंख धारण करते हैं। मोर मुकुट का गहरा रंग दु:ख और कठिनाइयों, हल्का रंग सुख-शांति और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

कमल (Kamal)

कमल कीचड़ में उगता है और उससे ही पोषण लेता है, लेकिन हमेशा कीचड़ से अलग ही रहता है। इसलिए कमल पवित्रता का प्रतीक है। इसकी सुंदरता और सुगंध सभी का मन मोहने वाली होती है। साथ ही कमल यह संदेश देता है कि हमें कैसे जीना चाहिए? सांसारिक और आध्यात्मिक जीवन किस प्रकार जिया जाए इसका सरल तरीका बताता है कमल।

 

मिश्री अौर माखन (Mishri aur Makhan)

कान्हा को माखन मिश्री बहुत ही प्रिय है। मिश्री का एक महत्वपूर्ण गुण यह है कि जब इसे माखन में मिलाया जाता है, तो उसकी मिठास माखन के कण-कण में घुल जाती है। उसके प्रत्येक हिस्से में मिश्री की मिठास समा जाती है। मिश्री युक्त माखन जीवन और व्यवहार में प्रेम को अपनाने का संदेश देता है। यह बताता है कि प्रेम में किसी प्रकार से घुल मिल जाना चाहिए।

वैजयंती माला (Vaijayanti mala)

भगवान के गले में वैजयंती माला है, जो कमल के बीजों से बनी हैं। दरअसल, कमल के बीज सख्त होते हैं। कभी टूटते नहीं, सड़ते नहीं, हमेशा चमकदार बने रहते हैं। इसका तात्पर्य है, जब तक जीवन है, तब तक ऐसे हमेशा प्रसन्न रहाे। दूसरा यह माला बीज है, जिसकी मंजिल होती है भूमि। भगवान कहते हैं जमीन से जुड़े रहो, कितने भी बड़े क्यों न बन जाओ। हमेशा अपने अस्तित्व की असलियत के नजदीक रहो।

श्रीकृष्ण से सम्बंधित और भी पोस्ट पढ़े :

श्री कृष्ण और राधा रानी के प्रेम का प्राकट्य और जीवन की कथामृत सार

श्री कृष्णा द्वारा वर्णित ध्यान विधि और भक्ति योग की महिमा

कृष्णयजुर्वेदीयोपनिषद : ब्रह्म आनंद और सत्य ज्ञान की महिमा मंडित करता विशिष्ट उपनिषद

श्री कृष्ण भगवान् के इन मंत्रो से दूर करे अपने जीवन की समस्याएं

जाने क्यों भगवान् कृष्ण ने अर्जुन को युद्ध के लिए प्रेरित किया

कृष्ण (नारायण) और अर्जुन (नर) की प्रगाढ़ मित्रता

भगवान् श्री कृष्ण के 51 नाम और उन के अर्थ

जानिए श्री कृष्ण कौनसी अद्भुत कलाओं में पारगंत थे

राधा-कृष्ण विवाह

घर के किसी भी भगवान् का मंदिर हो तो ध्यान रखनी चाहिए यह 20 बातें

देवी-देवताओं का पूजन करने से दुख-दर्द तो दूर होते हैं, साथ ही शांति भी मिलती है। इसी कारण पुराने समय से ही पूजन की परंपरा चली आ रही है। जिन घरों में हर रोज पूजा की जाती है, वहां का वातावरण सकारात्मक (Positive) और पवित्र रहता है। दरिद्रता दूर रहती है। दीपक और अगरबत्ती के धुएं से स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाले सूक्ष्म कीटाणु भी मर जाते हैं। शास्त्रों के अनुसार पूजन के लिए कई आवश्यक नियम बताए गए हैं। इन नियमों का पालन करते हुए पूजा करने पर श्रेष्ठ फल प्राप्त होते हैं। महालक्ष्मी सहित सभी देवी-देवताओं की कृपा मिलती है। यहां जानिए 20 नियम जो कि घर के मंदिर में पूजा करते समय ध्यान रखना चाहिए |

  1. सभी प्रकार की पूजा में चावल विशेष रूप से चढ़ाए जाते हैं। पूजन के लिए ऐसे चावल का उपयोग करना चाहिए जो अखंडित (पूरे चावल) हो यानी टूटे हुए ना हो। चावल चढ़ाने से पहले इन्हें हल्दी से पीला करना बहुत शुभ माना गया है। इसके लिए थोड़े से पानी में हल्दी घोल लें और उस घोल में चावल को डूबोकर पीला किया जा सकता है।
  2. पूजन में पान का पत्ता भी रखना चाहिए। ध्यान रखें पान के पत्ते के साथ इलाइची, लौंग, गुलकंद आदि भी चढ़ाना चाहिए। पूरा बना हुआ पान चढ़ाएंगे तो श्रेष्ठ रहेगा।
  3. पूजन कर्म में इस बात का विशेष ध्यान रखें कि पूजा के बीच में दीपक बुझना नहीं चाहिए। ऐसा होने पर पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं हो पाता है।
  4. किसी भी भगवान के पूजन में उनका आवाहन (आमंत्रित करना) करना, ध्यान करना, आसन देना, स्नान करवाना, धूप-दीप जलाना, अक्षत (चावल), कुमकुम, चंदन, पुष्प (फूल), प्रसाद आदि अनिवार्य रूप से होना चाहिए।
  5. देवी-देवताओं को हार-फूल, पत्तियां आदि अर्पित करने से पहले एक बार साफ पानी से अवश्य धो लेना चाहिए।
  6. भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए पीले रंग का रेशमी कपड़ा चढ़ाना चाहिए। माता दुर्गा, सूर्यदेव व श्रीगणेश को प्रसन्न करने के लिए लाल रंग का, भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए सफेद वस्त्र अर्पित करना चाहिए।
  7. किसी भी प्रकार के पूजन में कुल देवता, कुल देवी, घर के वास्तु देवता, ग्राम देवता आदि का ध्यान करना भी आवश्यक है। इन सभी का पूजन भी करना चाहिए।
  8. पूजन में हम जिस आसन पर बैठते हैं, उसे पैरों से इधर-उधर खिसकाना नहीं चाहिए। आसन को हाथों से ही खिसकाना चाहिए।
  9. यदि आप प्रतिदिन घी का एक दीपक भी घर में जलाएंगे तो घर के कई वास्तु दोष भी दूर हो जाएंगे।
  10. सूर्य, गणेश, दुर्गा, शिव और विष्णु, ये पंचदेव कहलाते हैं, इनकी पूजा सभी कार्यों में अनिवार्य रूप से की जानी चाहिए। प्रतिदिन पूजन करते समय इन पंचदेव का ध्यान करना चाहिए। इससे लक्ष्मी कृपा और समृद्धि प्राप्त होती है
  11. तुलसी के पत्तों को 11 दिनों तक बासी नहीं माना जाता है। इसकी पत्तियों पर हर रोज जल छिड़कर पुन: भगवान को अर्पित किया जा सकता है।
  12. दीपक हमेशा भगवान की प्रतिमा के ठीक सामने लगाना चाहिए। कभी-कभी भगवान की प्रतिमा के सामने दीपक न लगाकर इधर-उधर लगा दिया जाता है, जबकि यह सही नहीं है।
  13. घी के दीपक के लिए सफेद रुई की बत्ती उपयोग किया जाना चाहिए। जबकि तेल के दीपक के लिए लाल धागे की बत्ती श्रेष्ठ बताई गई है।
  14. पूजन में कभी भी खंडित दीपक नहीं जलाना चाहिए। धार्मिक कार्यों में खंडित सामग्री शुभ नहीं मानी जाती है।
  15. शिवजी को बिल्व पत्र अवश्य चढ़ाएं और किसी भी पूजा में मनोकामना की सफलता के लिए अपनी इच्छा के अनुसार भगवान को दक्षिणा अवश्य चढ़ानी चाहिए, दान करना चाहिए। दक्षिणा अर्पित करते समय अपने दोषों को छोड़ने का संकल्प लेना चाहिए। दोषों को जल्दी से जल्दी छोड़ने पर मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होंगी।
  16. भगवान सूर्य की 7, श्रीगणेश की 3, विष्णुजी की 4 और शिवजी की 1/2 परिक्रमा करनी चाहिए।
  17. घर में या मंदिर में जब भी कोई विशेष पूजा करें तो अपने इष्टदेव के साथ ही स्वस्तिक, कलश, नवग्रह देवता, पंच लोकपाल, षोडश मातृका, सप्त मातृका का पूजन भी अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए। इन सभी की पूरी जानकारी किसी ब्राह्मण (पंडित) से प्राप्त की जा सकती है। विशेष पूजन पंडित की मदद से ही करवाने चाहिए, ताकि पूजा विधिवत हो सके।
  18. घर में पूजन स्थल के ऊपर कोई कबाड़ या भारी चीज न रखें।
  19. भगवान शिव को हल्दी नहीं चढ़ाना चाहिए और न ही शंख से जल चढ़ाना चाहिए।
  20. पूजन स्थल पर पवित्रता का ध्यान रखें। चप्पल पहनकर कोई मंदिर तक नहीं जाना चाहिए। चमड़े का बेल्ट या पर्स अपने पास रखकर पूजा न करें। पूजन स्थल पर कचरा इत्यादि न जमा हो पाए।

About the author

Abhishek Purohit

Hello Everybody, I am a Network Professional & Running My Training Institute Along With Network Solution Based Company and I am Here Only for My True Faith & Devotion on Lord Shiva. I want To Share Rare & Most Valuable Content of Hinduism and its Spiritualism. so that young generation May get to know about our religion's power

3 Comments

Click here to post a comment

  • ठाकुर जी कि कृपा हमेशा आपके पूरे परिवार पर बरसती रहे।
    कामयाबी हमेशा आपके कदम चुमे।
    ठाकुर जी से यही प्रार्थना करती हूं।
    आप हर क्षेत्र में आगे रहे।👍👌✋

नयी पोस्ट आपके लिए

सर्वाधिक पढ़ी जाने वाली पोस्ट