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गणेशजी की पूजा में क्यों चढ़ाते हैं कैथ-जामुन, जानें इसका महत्व

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गणेशजी को कैथ-जामुन क्यों चढ़ाते हैं?

गणेशजी के संबंध में शतमोदकप्रिय उक्ति प्रचलित है। इस उक्ति का अर्थ है कि एक बार में सौ लड्डू खा जाना गणेशजी को अत्यंत प्रिय है। उनका प्रिय व्यंजन मिष्टान्न होने के कारण वे निरंतर गुड़ और मोदक का सेवन करते ही रहते हैं।

आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो अधिक मीठा खाने से मधुमेह का रोग हो जाता है। इस रोग की निवृत्ति में कैथ और जामुन का बड़ा महत्त्व है। गणेशजी के पूजन में विशेष रूप से एक मंत्र का जप किया जाता है और इस मंत्र में गणेशजी को जामुन चढ़ाने का औचित्य भी प्रकट किया गया है —

गजाननं भूतगणादि सेवितं, कपित्थ जम्बूफल चारु भक्षणम्। उमासुतं शोकविनाशकारकं, नमामि विश्वेश्वर पाद पंकजम्॥

उस गजानन को जो भूतों-गणों और प्राणियों द्वारा पूजनीय है, नमस्कार है। उसे कैथ-जामुन का फल अत्यंत प्रिय है। इन फलों को चढ़ाने से उमासुत (गणेशजी) के सभी शोक-रोग (मधुमेह, जो अधिक मिष्टान्न खाने से उन्हें हो गया) नष्ट हो जाते हैं। ऐसे विघ्नेश्वर के चरणों में मैं नमन करता हूं।

उपर्युक्त श्लोक में प्रयुक्त शब्द उमासुतं का शाब्दिक अर्थ यद्यपि उमा (पार्वती) के पुत्र अर्थात गणेशजी से ही है तथापि माता पार्वती सम्पूर्ण जगत की माता हैं, अतएव इस श्लोक में उमासुतं शब्द को सम्पूर्ण जगत के प्राणियों के संदर्भ में देखने से एक बहुत बड़े संकट से मुक्ति का मार्ग भी दिखाई पड़ता है। वह यह है कि यदि कोई अधिक मिष्टान्न का सेवन करता है और वह मधुमेह से ग्रस्त है तो कैथ और जामुन के फल का नित्य सेवन करने से उसे इस रोग से मुक्ति मिल सकती है।

देवताओं को अर्पित किए जाने वाले प्रसाद को भक्तजन स्वयं भी ग्रहण करते हैं। यदि गणेशजी के नित्य पूजन-अर्चन के बाद उन पर चढ़ाए जाने वाले फल (कैथ-जामुन) का उपासक श्रद्धा भाव से सेवन करे तो मधुमेह जैसे गंभीर रोग से उसे सहज ही छुटकारा मिल सकता है।

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