योगासन

एकपाद आसन : शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन के लिए जरूरी योगासन

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एकपाद आसन या एकपादासन अर्थात एक पैर से किया जाने वाला योग आसन। एक पैर से बहुत से योग आसन किए जाते हैं जैसे एकपाद शीर्षासन, एकपाद बकासन आदि। लेकिन यह आसन सिर्फ एकपाद आसन है। यह सिर्फ खड़े रहकर किया जाता है।

विधि : 

सबसे पहले सावधान की मुद्रा में खड़े हो जाएं। फिर दोनों कंधों को सिर के ऊपर ले जाकर हाथों की अंगुलियों को मिला दें। अर्थात ताड़ासन की मुद्रा में खड़े हो जाएं। इस अवस्था में आंखे पांच फिट दूर किसी चीज पर केंद्रित कर दें। कमर को सीधा रखें।

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अब श्वास लेते हुए कंधों को ऊपर खींचे तथा श्वास बाहर निकालते हुए कमर से सामने की ओर 90 डिग्री के कोण में झुकें। अब दहिने पैर पर संतुलन बनाते हुए बाएं पैर को पीछे की ओर तथा दोनों हाथों को आगे की ओर इस तरह लें जाए की बायां पैर, सिर और कंधे एक सीध में हों।

पुन: प्रारंभिक अवस्था में आने के लिए पहले पैर को भूमि पर टिकाएं फिर हाथों को सीधा कर पुन: सावधान मुद्रा में आ जाए। यह पूरा एक चक्र पूरा है। अब दूसरे पैर से भी एक पादासन का इसी तरह अभ्यास करें।

लाभ : 

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इस आसन के अभ्यास से शरीर में संतुलन बै़ता है। इस संतुलन से चित्त में एकाग्रता का विकास होता है। यह आसन कंधे और कलाई की शक्ति को बढ़ाता है। इसके अभ्यास से कमर और पिंडलियों का दर्द दूर होता है।

एकपादासन के नियमित अभ्यास से जहां एकाग्रता बढ़ती है वहीं शरीर के अंग दृढ़ होते हैं। यह शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन के लिए जरूरी है।

सावधानी : 

उच्च रक्तचाप से पीड़ित होने पर एकपादासन का अभ्यास नहीं किया जाना चाहिए। इस आसन मुद्रा में कम से कम 30 सेकंड में ठहर सकते हैं और एक पैर से इसे दो बार किया जा सकता है।

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About the author

Pandit Niteen Mutha

नमस्कार मित्रो, भक्तिसंस्कार के जरिये मै आप सभी के साथ हमारे हिन्दू धर्म, ज्योतिष, आध्यात्म और उससे जुड़े कुछ रोचक और अनुकरणीय तथ्यों को आप से साझा करना चाहूंगा जो आज के परिवेश मे नितांत आवश्यक है, एक युवा होने के नाते देश की संस्कृति रूपी धरोहर को इस साइट के माध्यम से सजोए रखने और प्रचारित करने का प्रयास मात्र है भक्तिसंस्कार.कॉम

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