श्री कृष्णा भजन

दीनानाथ अब बारी तुम्हारी, पतित उधारण दीन

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दीनानाथ अब बारी तुम्हारी – Dinanath Ab Bari Tumahari Mp3 Download & Lyrics Pdf

दीनानाथ अब बारी तुम्हारी
पतित उधारण दीन जानी के बिगड़ी देहु संवारी
बालापन खेलत ही खोया यौवन विसरत मोहि
वृद्धः भयो सुधि प्रगटि मोको
दुखित पुकारत तोहि
दीनानाथ अब बारी तुम्हारी

नारी तजो सूत तजो भाई तजो
तन की त्वचा भई न्यारी
श्रवणं न सुनत चरण गति धारी
नैन भये जलधारी
दीनानाथ अब बारी तुम्हारी

अब ये व्यथा दूर करने को
और न समरथ कोई
सूरदास प्रभु करुणा सागर
तुमसे होइ सो होइ
दीनानाथ अब बारी तुम्हारी
पतित उधारण दीन जानी के बिगड़ी देहु संवारी

About the author

Aaditi Dave

Hello Every One, Jai Shree Krishna, as I Belong To Brahman Family I Got All The Properties of Hindu Spirituality From My Elders and Relatives & Decided To Spreading All The Stuff About Hindu Dharma's Devotional Facts at Only One Roof.

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