Tag - Dhyan yog Vidhi

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देह में स्थित पंचकोश – नर से नारायण बनाने का मार्ग पञ्च कोश जागरण

पञ्च कोश (Panch Kosha) क्या हैं इनके विषय में क्या और कहाँ किसी सिद्ध महत्मा द्वारा लिखा गया है । पञ्च कोश जागरण चक्रों का जागरण कैसे हो सकता है ? किसी खगोलीय...

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ज्ञानयोग – ब्रह्म की अनूभूति होना ही वास्तविक ज्ञान है

ज्ञानयोग क्या है – What Is Gyanyoga ज्ञानयोग से तात्पर्य है – ‘विशुद्ध आत्मस्वरूप का ज्ञान’ या ‘आत्मचैतन्य की अनुभूति’ है। इसे उपनिषदों में ब्रह्मानुभूति...

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सोऽहं मैडिटेशन : हृदय स्थित सूर्य-चक्र में विशुद्ध ब्रह्मतेज के दर्शन करने की विधि

आत्मा के सूक्ष्म अन्तराल में अपने आप के सम्बन्ध में पूर्ण ज्ञान मौजूद है। वह अपनी स्थिति की घोषणा प्रत्येक क्षण करती रहती है ताकि बुद्धि भ्रमित न हो और अपने...

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सद्गुरु ओशो और बुद्ध के अनुसार विपश्यना ध्यान विधि साधना का रहस्य

सद्गुरु ओशो के अनुसार क्या है विपश्यना | What is Vipassana Meditation विपश्यना (Vipassana) आत्मनिरीक्षण द्वारा आत्मशुद्धि की अत्यंत पुरातन साधना-विधि है। जो...

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जानिए सद्गुरु जग्गी वासुदेव के अनुसार हठयोग में बंध का महत्व और लाभ

हठ योग और क्रिया योग में कुछ ऐसे आसन और क्रियाएं होती हैं, जिनमें बंध लगाया जाता है। एक साधक ने सद्‌गुरु से बंध लगाने का महत्व जानना चाहा। जानते हैं सद्‌गुरु...

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