ओशो भजन

ध्यान की मदिरा

ध्यान की मदिरा (Dhyan ki Mandira Bhajan in hindi Mp3)

 ध्यान की मदिरा हमें ओशो ने पिलाई है।

क्या अजब मस्ती मेरी जिंदगी पे छाई है।।

शोर गुल मन के हुए शांत, अनाहत गूंजा।

श्याम ने बांसुरी की मीठी धुन सुनाई है।।

कभी दुनिया से प्यार पाने को तरसते थे।

हुई अब भीतरी सियाराम की सगाई है।।

शब्द मुर्शिद के समझ आए, जब नि शब्द हुए।

मौन इशारों से कलाजी ने की सिखाई है।।

दे हमं दिरबनी और काम हो गए पूजा।

शून्य होते ही उतर आई यह समाधि है।।


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Niteen Mutha

नमस्कार मित्रो, भक्तिसंस्कार के जरिये मै आप सभी के साथ हमारे हिन्दू धर्म, ज्योतिष, आध्यात्म और उससे जुड़े कुछ रोचक और अनुकरणीय तथ्यों को आप से साझा करना चाहूंगा जो आज के परिवेश मे नितांत आवश्यक है, एक युवा होने के नाते देश की संस्कृति रूपी धरोहर को इस साइट के माध्यम से सजोए रखने और प्रचारित करने का प्रयास मात्र है भक्तिसंस्कार.कॉम

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