हेल्थ

घर पर ही इलाज़ करे जानलेवा डेंगू का

dengue treatment

इन दिनों डेंगू (dengue) का प्रकोप लोगों को सता रहा है। डेंगू को लेकर हालांकि एलोपैथी में काफी बढ़िया उपचार संभव है, लेकिन herbal remedy से भी डेंगू का बेहतरीन उपचार संभव है। सबसे पहले लोगों को डेंगू के बारे में कोई भी गलतफहमी नहीं रखनी चाहिए। यह सिर्फ एक बुखार है जिसमें शरीर के platelets कम हो जाते हैं। शरीर में प्लेटलेट्स खून को जमाने का काम करते हैं। इनके कम होने पर खून जमा नहीं रहता और खतरे की स्थिति में कई बार आंख, नाक, कान,

मुंह से बहना शुरू हो जाता है। सेहतमंद शरीर में औसतन डेढ़ से 4 लाख प्लेटलेट्स होते हैं। अगर संख्या 1 लाख के आसपास या इससे कम होने लगे तो मरीज को तकलीफ होने लगती है। 50 हजार या इससे कम होने पर स्थिति खतरे में जा सकती है। घरेलू नुस्खों और आयुर्वेदिक दवाइयों से इन्हें काबू किया जा सकता है। गिलोय सभी तरह के बुखार में उत्तम औषधि, डेंगू पर काबू पाने में कारगर और शरीर की प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाने में उपयोगी।

लक्षण :

साधारणतः डेंगू बुखार के लक्षण संक्रमण होने के 3 से 14 दिनों के बाद ही दिखता हैं और इस बात पर भी निर्भर करता हैं कि बुख़ार किस प्रकार है । डेंगू बुखार के प्रकार हमने ऊपर बता रखा है । डेंगू बुखार के लक्षण एक से अधिक भी हो सकते है । सामान्यत: डेंगू बुख़ार के लक्षण कुछ ऐसे होते हैं —

1. blood presure का सामान्य से बहुत कम हो जाना

2. ख़ून में प्लेटलेटस की संख्या कम होना (प्रतिघन सेमी रक्त में <100,000 से कम होना)

3. प्लाज्मा रिसाव होने के साक्ष्य मिलना (हेमोट्रोक्रिट में 20% से ज़्यादा वृद्धि या हीमाट्रोक्रिट में 20% से ज़्यादा गिरावट)

4. रोगी को अचानक बिना खांसी व जुकाम के तथा ठंड व कपकंपी के साथ अचानक तेज़ बुख़ार चढ़ना

5. तेज बुखार (104-105 F) जो की 2-7 दिन तक लगातार रहना

6. रोगी के सिर के अगले हिस्से में तेज़ दर्द रहना , आंख के पिछले भाग में रहना , कमर, मांसपेशियों तथा जोड़ों में दर्द होना।

7. मिचली nausea, उल्टी vomiting आना या महसूस होना

8. शरीर पर लाल-गुलाबी चकत्ते red rashes होना

9. आँखों लाल रहना ,आँखों में दर्द रहना

10. हमेशा थका-थका और कमजोरी महसूश करना

11. जोड़ों में सूजन होना

12. भूख न लगना, खाने की इच्छा में कमी, मुँह का स्वाद ख़राब होना, पेट ख़राब हो जाना,

13. नींद न आना या नींद में कमी

उपरोक्त लक्षण दिखने पर चिकित्सक के पास जाकर डेंगू के लक्षण का संदेह व्यक्त करे । और कतई लक्षणो को हल्के में लेने की भूल न करे नहीं तो जान से भी हाथ धोना पड़ सकता है ।

बचाव :

चूँकि डेंगू बुखार, मच्छरों के काटने से होता है । सम्भवतः जितना हो सके मच्छरों से बचाव के तरीके अपनाया जाना चहिए

1. ऐसे मच्छरों के शरीर पर चिता जैसी धारियां बनी रहती है, तो ऐसे मच्छरों से सावधान रहे

2. आपके घर के आसपास अगर कहीं जलजमाव वाली जगह हो तो, वहा के सफाई का खासा ख्याल रखा जाना चाहिए।

3. घर के अंदर और आस-पास कहीं पानी को जमा न होने दें।

4. घर के दरवाजे और खिड़कियों की जालियां लगाकर रखे

5. टायर, डब्बे ,कूलर, A/C, पशुओ के लिए रखे पानी, गमले में रुके पानी को बदलते रहे और साफ़ करते रहना चाहिए

6. खाली बर्तनों को खुले में न रखे उसे ढक कर रखे ।

7. घर में सोते समय मच्छर दानी का प्रयोग करें।

8. घर में मच्छर भगाने वाले कॉयल , लिक्विड,इलेक्ट्रॉनिक बैट आदि का प्रयोग करें।

9. बाहर जाने से पहले मोस्कीटो रेप्लेंट क्रीम का प्रयोग करें।

10. अगर आस-पास में किसी को यह संक्रमण है तो विशेष सावधानी बरते।

11. अगर 5 दिन से अधिक समय तक बुखार हो तो तुरन्त चिकत्सक से मिले और रक्तजाच जरूर करा लें ।

डेंगू में उपयोगी जड़ी बूटियाँ / Home remedies for Dengue :

पपीते की पत्ती  – पपीते की पत्तियों के रस को डेंगू  में बहुत उपयोगी पाया गया है। इसके लिये कुछ पत्तों को पानी से अच्छी तरह धोकर मिक्सी या पत्थर पर पीस कर, छानकर जूस को 1-2 चम्मच मात्रा दिन में तीन-चार बार पिलाया जाता है। इससे शरीर के विषाक्त तत्व बाहर निकलते हैं। शरीर में प्लेटलेट्स की मात्रा तेजी से बढ़ती है।

तुलसी ( Basil leaf decoration ) – तुलसी के कुछ पत्तों को पानी में उबालकर छानकर रोगी को पिलाया जाता है। डेंगू तथा अन्य वायरल ज्वरों ( Viral fever ) में यह बहुत फायदेमंद है। सर्दी (Cold ),खाँसी ( Cough ), जुकाम में भी बहुत लाभदायक है।

अनार का जूस ( Pomegranate juice) – अनार का जूस डेंगू तथा अन्य ज्वरों में बहुत उपयोगी है। अनार का जूस खून की कमी को दूर करता है।

गिलोय – गिलोय का काढ़ा बुखार ( Fever ), जुकाम, खाँसी को दूर करने में बहुत उपयोगी है। इसके लिये 3-4 इंच का अंगूठे साइज का एक टुकड़ा लेकर उसे कूट पीस लेते हैं। दो कप पानी में उबालकर आधा कप शेष रहने पर पिलाना बचाव तथा चिकित्सा दोनों में उपयोगी है।

चिरायता ( Chirata ) – बुखार उतारने की आयुर्वेद की यह प्रसिद्ध जड़ी बूटी है। स्वाद में यह जितनी कड़वी है गुणों में उतनी ही मधुर है। इसका काढ़ा लें या चूर्ण पानी से लेते हैं।

आँवला ( Gooseberry ) – आँवला विटामिन सी ( Vitamin C ) का श्रेष्ठ स्रोत है। आँवला शरीर में जाने पर शरीर लौह तत्व का ज्यादा अवशोषण करता है। जिससे खून बढ़ता है।

ऐलोवेरा ( Aloe vera ) – ग्वार पाठे का जूस पाचन शक्ति को सही रखता है। लीवर को उत्तेजित करता है। भूख बढ़ाता है। शरीर की रोग प्रतिरोधक ( immunity power ) बढ़ाकर रोगों से लड़ने की शक्ति जाग्रत करता है।

डेंगू से बचने के प्राकृतिक एवं घरेलू तरीके (Dengue Natural and Home remedies ) 

बकरी का दूध :- डेंगू बुखार, में ठंडा, ताजा बकरी का दूध, 250 ml की मात्रा में एक दिन में दो बार दिया जाता है। डेंगू बुखार के मुख्य जटिलताएँ हैं सेलेनियम (Selenium) की कमी है और प्लेटलेटों (platelets) में कमी होना होता है । सेलेनियम बकरी के दूध का मुख्य घटक है।डेंगू बुखार के इलाज के लिए बकरी का दूध बहुत

उपयोगी है क्योंकि यह सीधे प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित करता है, ऊर्जा देता है, शरीर में जरूरी तरल की आपूर्ति करता है और आवश्यक पोषक तत्वों की कमी नहीं होने देता।

डेंगू बुखार के लिए गिलोय, पपीता पत्ते, एलोवेरा/मुसब्बर वेरा का रस और बकरी का दूध देना लाभप्रद होता है।

गिलोय :- गिलोय के तनों को तुलसी के पत्ते के साथ उबालकर डेंगू पीड़ित व्यक्ति को देना चाहिए । यह metabolic rate  बढ़ाने, इम्युनिटी और प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत रखने और बॉडी को इंफेक्शन से बचाने में मदद करती है।

हल्दी :- हल्दी में मेटाबालिज्म बढ़ाने का गुण होता है, यह दर्द और घाव को जल्दी ठीक करने में भी उपयोगी होता है । हल्दी का सेवन दूध में मिलाकर किया जा सकता है|

तुलसी के पत्ते और काली मिर्च :- 4 – 5 तुलसी के पत्ते, 25 ग्राम ताजी गिलोय का तना लेकर कूट लें एवं 2 – 3 काली मिर्च पीसकर 1 लीटर पानी में गर्म कर ले । जब पानी की मात्रा 250 M.L. तक रह जाए , तो उतार ले और यह काढ़ा रोगी को थोड़े समय के अंतराल पे देते रहे,यह ड्रिंक आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाती है और एंटी-बैक्टीरियल तत्व के रूप में कार्य करती है।

पीपते के पत्ते :- पपीते के पत्तियो को गरम करके या ”पत्तियों को कूट कर उपयोग में लाया जा सकता हैं । यह बॉडी से टॉक्सिन बाहर निकालने तथा प्लेटलेट्स की गिनती बढ़ाने में हेल्प करता है ।

मेथी के पत्ते :- इसकी पत्तियों को पानी में भिगोकर, छानकर पानी को पीया जा सकता है। इसके अलावा, मेथी पाउडर को भी पानी में मिलाकर पी सकते हैं। यह पत्तियां बुखार कम करने में सहायता करती है ।

गोल्डनसील :- इसका उपयोग जूस बनाकर या चबाकर किया जाता है। इसमें डेंगू बुखार को बहुत तेजी से खत्म कर शरीर में से डेंगू के वायरस को खत्म करने की क्षमता होती है।यह नार्थ अमेरिका में पाई जाने वाली एक हर्ब है।

About the author

Niteen Mutha

नमस्कार मित्रो, भक्तिसंस्कार के जरिये मै आप सभी के साथ हमारे हिन्दू धर्म, ज्योतिष, आध्यात्म और उससे जुड़े कुछ रोचक और अनुकरणीय तथ्यों को आप से साझा करना चाहूंगा जो आज के परिवेश मे नितांत आवश्यक है, एक युवा होने के नाते देश की संस्कृति रूपी धरोहर को इस साइट के माध्यम से सजोए रखने और प्रचारित करने का प्रयास मात्र है भक्तिसंस्कार.कॉम

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