Category: सनातन ज्ञान

आखिर क्या है माला के 108 मनकों का कारण

माला में 108 मनके ही क्यों होते हैं? माला जपने का क्या औचित्य है ? योग चूड़ामणि उपनिषद् में कहा गया है “षट्शतानि दिवारात्रौ सहस्त्राण्येकं विंशति । एतत् संख्यान्तितं मंत्र जीवो जपति सर्वदा ॥” अर्थात् एक व्यक्ति दिन-रात के चौबीस घंटों में 21,600 बार श्वास लेता है। चौबीस घंटे में से बारह घंटे दिनचर्या में […]

जानिए हिंदू धर्म में अन्न प्राशन संस्कार का महत्त्व

अन्न प्राशन संस्कार क्यों किया जाता है और इसका क्या महत्त्व है ? अन्नप्राशन संस्कार के बारे में कहा गया है .. अन्नाशनात्मातृगर्भे मलाशाद्यपि शुध्याति । अर्थात् माता के गर्भ में रहने पर शिशु में मलिन भोजन के शुद्धिकरण और शुद्ध भोजन कराने की प्रक्रिया ही अन्नप्राशन संस्कार कही जाती है। जब शिशु छ:-सात माह […]

जानिए हिंदू धर्म में नामकरण संस्कार का महत्त्व

हिंदू धर्म में नामकरण संस्कार के बारे में स्मृति संग्रह में क्या लिखा है आयुर्वर्चोऽभिवृद्धिश्च सिद्धिर्व्यवहृतेस्तथा । नामकर्मफलं त्वेतत् समुद्दिष्टं मनीषिभिः ॥ अर्थात् नामकरण संस्कार से आयु एवं तेज की वृद्धि होती है। नाम की प्रसिद्धि से व्यक्ति का लौकिक व्यवहार में एक अलग ही अस्तित्त्व उभरता है। पाराशर गृह्यसूत्र दशम्यामुत्थाप्य पिता नाम करोति । […]

शुभ कर्म पूर्व दिशा की ओर मुँह करके संपन्न करने का विधान क्यों है?

शुभ कर्म पूर्व दिशा की ओर मुंह करके संपन्न कराने का विधान क्यों है ? पूर्व दिशा में सूर्योदय होता है और उदित होते सूर्य की किरणों का धर्म शास्त्रों में ही नहीं, विज्ञान में भी बड़ा महत्त्व है। अथर्ववेद में कहा गया है कि उद्यन्त्सूर्यो नुदतां मृत्युपाशान् । अर्थात् उदित होते हुए सूर्य में […]

जानिए हिंदू धर्म में मुंडन संस्कार का महत्त्व

मुंडन (चूड़ाकर्म) संस्कार क्यों किया जाता है ? इसका क्या महत्त्व है ? मुंडन संस्कार के प्रति यह मान्यता है कि इससे शिशु बुद्धि दोनों ही पुष्ट होते हैं और गर्भगत मलिन संस्कारों से मुक्ति मिलती है। इस का मस्तिष्क और संस्कार में सिर के बाल पहली बार उतारे जाते हैं। शिशु जब एक वर्ष […]

जानिए क्यों है विद्या, ज्ञान, कला, साहित्य और संगीत की अधिष्ठात्री देवी – माँ सरस्वती

सरस्वती को ज्ञान और विद्या की देवी क्यों समझा जाता है ? धर्मशास्त्रों में इनका क्या महत्त्व है ? सुर, लय, ताल और राग-रागिनी आदि का प्रादुर्भाव देवी सरस्वती से ही हुआ है। ये संगीतशास्त्र की अधिष्ठात्री देवी हैं। सात सुरों द्वारा इनका स्मरण किया जाता है। इसी कारण ये स्वरात्मिका भी कहलाती हैं। सप्तविध […]

जाने तिलक धारण करने का वैज्ञानिक आधार क्या है

तिलक क्यों और कौन धारण करते हैं? इसका वैज्ञानिक आधार क्या है ? तिलक, त्रिपुंडू, टीका और बिंदिया इन सबका संबंध पूरी तरह मस्तिष्क से है और ये मस्तक के सामने वाले भाग के मध्य में धारण किए जाते हैं। कठोपनिषद् में तिलक धारण करने के बारे में इस प्रकार विवरण दिया गया है कि […]

जानिए पीपल वृक्ष की पूजा का धार्मिक और वैज्ञानिक कारण

पीपल वृक्ष की पवित्रता का धार्मिक और वैज्ञानिक कारण क्या है? पीपल का पूजन क्यों किया जाता है ? धर्मशास्त्रों में पीपल वृक्ष को भगवान विष्णु का निवास माना गया है। स्कंध पुराण के अनुसार पीपल की जड़ में श्री विष्णु, तने में केशव, शाखाओं में नारायण, पत्तों में भगवान श्रीहरि और फल में सब […]

क्यों नारियल को समृद्धि, धन, शुभता का प्रतीक माना जाता है ?

नारियल शुभ, समृद्धि और सम्मान का प्रतीक क्यों माना जाता है? सामान्यतः आराध्य देवी-देवताओं को नारियल चढ़ाने से मनोवांछित फल प्राप्त होने की आशा के रूप में देखा जाता है। प्रायः नारियल को फोडकर ही देवी-देवताओं पर चढ़ाया जाता है। मगर कुछ विशेष अवसरों पर पूर नारियल चढ़ाने का भी विधान है। नारियल को भगवान […]

जानिए क्यों कहा जाता है गायत्री मन्त्र को महामंत्र

गायत्री मंत्र क्या है और इसकी सबसे अधिक मान्यता क्यों है? ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यम् भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्। गायत्री मंत्र को सनातन एवं आदि मंत्र माना गया है। पुराणों के अनुसार सृष्टि के रचयिता ब्रह्माजी को गायत्री मंत्र आकाशवाणी से प्राप्त हुआ था। सृष्टि सृजन की शक्ति भी उन्हें गायत्री मंत्र […]