Category: ज्ञान अमृत

धर्म से रहित अर्थ व्यर्थ ही नहीं, हानिकारक भी है

अर्थ को नहीं, धर्म को प्रधानता मिले धन मनुष्य जीवन की एक आवश्यक वस्तु है, पर इतनी नहीं कि उसे प्रथम स्थान दिया जा सके। प्रथम स्थान धर्म का है, अर्थ का इसके बाद नम्बर आता है। धर्म से रहित अर्थ व्यर्थ ही नहीं, हानिकारक भी है। इसके विपरीत, अर्थरहित मनुष्य भी सुखी और तेजस्वी […]

चित्त अशुद्ध क्यों होता है – चित्त और आत्मा को शुद्ध करे, वही आत्मज्ञान

चित्त अशुद्ध क्यों होता है – चित्त और आत्मा को शुद्ध करे, वही आत्मज्ञान चित्त अशुद्ध क्यों होता है ? जो हो चुका उसकी स्मृति और जो नहीं है उसके चिंतन से चित्त अशुद्ध होता है। बात जरा सूक्ष्म है। जो हो चुका वह प्रसंग, वह परिस्थिति, वह वस्तु अब उस रूप में नहीं रही। […]

जीवन और जगत्‌ को कर्मों की सुगंध से भरते चलो

हमारे कर्म हों भगवान के निमित्त यह बात सबको हमेशा ध्यान में रखनी चाहिए कि परमेश्वर की पूजा अपने कर्म से करनी चाहिए। हमारा प्रत्येक कर्म भगवान के निमित्त हो। कर्म करने से पहले यह सोचो कि क्या यह कर्म भगवान को प्रसन्न करेगा ? किसी की निंदा अथवा हिंसा से परमात्मा खुश होंगे? हमारे […]

आत्मयज्ञ ही मनुष्यता एवं देवत्व का रास्ता है

यज्ञ और ‘इदं न मम’ की भावना यजुर्वेद में आत्मयज्ञ को श्रेष्ठ यज्ञ माना गया है। आत्मयज्ञ को सबसे बेहतर मानने के पीछे जो भाव एवं तर्क हैं, वे अत्यन्त व्यावहारिक हैं। हवन करते वक्त हम आहुति देकर कहते हैं- जो सामग्री मैंने हवन कुण्ड में डाली वह मेरी नहीं है, यानी आपके द्वारा दी […]

कबीरा गरब न कीजिए ऊंचा देख निवास

अनमोल वचन – कबीरा गरब न कीजिए ऊंचा देख निवास पुराने समय में हमारे पूर्वजों की धारणा थी कि ईश्वर ने ही उनके भाग्य का बंटवारा किया है। धर्म के विरुद्ध एक शिकायत यह रही है कि वह लोगों को डरपोक, दीनहीन और परलोकवादी बनाता है। यदि लोगों को चुस्त-दुरुस्त और ओजस्वी बनाना है तो […]

आत्मशक्ति की पहचान ही मानसिक चिंताओं व समस्याओं का समाधान है

आत्मशक्ति की पहचान ही मानसिक चिंताओं का समाधान सुकरात ने कहा था कि अपने आपको जानो। उसने यह वाक्य एक मंदिर के द्वार पर लिख दिया था। उसका मकसद यह था कि अपनी सफलता की कामना लेकर जो भी व्यक्ति मंदिर में भगवान के दर्शन करने आए, उसे सबसे पहले अपने बारे में जानना चाहिए। […]

उत्तम आचरण ही धर्म है

धर्म का अर्थ आदर्श आचरण – उत्तम आचरण ही धर्म है एक बात को जीवन में धारण करेंगे तो उससे आपका परेम कल्याण होगा। सबको अपने मन में दृढ़ विश्वास रखना चाहिए कि भगवान को हरदम याद रखने से साधन में उत्तरोत्त वृद्धि होती है और हमारा कल्याण हो सकता है। ऐसे दृढ़ विश्वास के […]

साधना में भी क्रम से ही उन्नति होती है

जानें साधना की उन्नति कैसे करे | Essential things to achieve meditation  जन्म से विश्व का प्रत्येक जीव पशुभाव प्रधान प्राणी होता है, मनुष्य भी। हमें कालक्रम में उस पशुभाव को देवभाव में बदलना होता है। पहले चरण में जिस मनुष्य का आचार पशुवत् है, उन्नत जीवनचर्या और साधना के द्वारा उसे मनुष्यत्व में बदलता […]