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मूलाधार चक्र जागृत करने की सरल विधि

मूलाधार चक्र – Root Chakra मानव शरीर में सात चक्र होते हैं सबसे पहला है मूलाधार इसमें गणेश जी देवता है और देवी काली हैं । साधना में सर्वप्रथम कुंडलिनी … Read more

रजोगुण और तमोगुण मिट जाएं तो मन सत्व से पूर्ण हो जाए

विशुद्ध मन ही वासुदेव है ध्यान से सुनो और इसे जीवन में याद रखो कि सत्संग पुरुषार्थ का फल नहीं, बल्कि वह भगवान की कृपा से मिलता है। यत्न से … Read more

योगी और भोगी

योगी और भोगी के परस्पर विरोधी संस्कार गीता के दूसरे अध्याय में कृष्ण ने कहा है, ‘जो सभी प्राणियों के लिए रात्रि है, उस समय योगी जागकर अपना काम करता … Read more

धर्म से रहित अर्थ व्यर्थ ही नहीं, हानिकारक भी है

अर्थ को नहीं, धर्म को प्रधानता मिले धन मनुष्य जीवन की एक आवश्यक वस्तु है, पर इतनी नहीं कि उसे प्रथम स्थान दिया जा सके। प्रथम स्थान धर्म का है, … Read more

चित्त अशुद्ध क्यों होता है – चित्त और आत्मा को शुद्ध करे, वही आत्मज्ञान

चित्त अशुद्ध क्यों होता है – चित्त और आत्मा को शुद्ध करे, वही आत्मज्ञान चित्त अशुद्ध क्यों होता है ? जो हो चुका उसकी स्मृति और जो नहीं है उसके … Read more

जीवन और जगत्‌ को कर्मों की सुगंध से भरते चलो

हमारे कर्म हों भगवान के निमित्त यह बात सबको हमेशा ध्यान में रखनी चाहिए कि परमेश्वर की पूजा अपने कर्म से करनी चाहिए। हमारा प्रत्येक कर्म भगवान के निमित्त हो। … Read more

आत्मयज्ञ ही मनुष्यता एवं देवत्व का रास्ता है

यज्ञ और ‘इदं न मम’ की भावना यजुर्वेद में आत्मयज्ञ को श्रेष्ठ यज्ञ माना गया है। आत्मयज्ञ को सबसे बेहतर मानने के पीछे जो भाव एवं तर्क हैं, वे अत्यन्त … Read more

कबीरा गरब न कीजिए ऊंचा देख निवास

अनमोल वचन – कबीरा गरब न कीजिए ऊंचा देख निवास पुराने समय में हमारे पूर्वजों की धारणा थी कि ईश्वर ने ही उनके भाग्य का बंटवारा किया है। धर्म के … Read more

आत्मशक्ति की पहचान ही मानसिक चिंताओं व समस्याओं का समाधान है

आत्मशक्ति की पहचान ही मानसिक चिंताओं का समाधान सुकरात ने कहा था कि अपने आपको जानो। उसने यह वाक्य एक मंदिर के द्वार पर लिख दिया था। उसका मकसद यह … Read more

उत्तम आचरण ही धर्म है

धर्म का अर्थ आदर्श आचरण – उत्तम आचरण ही धर्म है एक बात को जीवन में धारण करेंगे तो उससे आपका परेम कल्याण होगा। सबको अपने मन में दृढ़ विश्वास … Read more