यात्रा

ब्रह्मा मंदिर,पुष्कर

Brahma Temple, Pushkar

संसार भर में जगत पिता ब्रह्मा का एकमात्र मंदिर पुष्कर में स्थित है। इस स्थान को ब्रह्मा जी का घर भी कहा जाता है। मान्यता है कि मुगल शासक औरंगजेब के शासन काल के दौरान अनेकों हिंदू मंदिरों को ध्वस्त किया गया।

ब्रह्मा जी का यही एकमात्र मंदिर है जिसे औरंगजेब छू तक नहीं पाया। इस मंदिर का निर्माण 14वीं शताब्दी में हुआ था और मंदिर निर्माण से जुड़ी अनेक दन्त कथाएं हैं। हिन्दू धर्म ग्रन्थों के अनुसार भगवान ब्रह्मा त्रिदेवों में से एक देव हैं। तीनों देवों का कार्य ,जीवन चक्र (जन्म,पालन,विनाश) के आधार पर विभाजित है। ब्रह्मा जी का कार्य जन्म देना है। ब्रह्मा जी को दाढ़ीयुक्त चार सिरों वाला ,जिसके चार हाथ हैं, के रूप में चित्रित किया गया है। ब्रह्मा जी के प्रत्येक हाथ में वेद (ज्ञान) हैं। बह्मा जी का वाहन हंस है।

ब्रह्मा जी का मंदिर संगमरमर से बना हुआ है। चांदी के सिक्कों द्वारा इसकी साज-सज्जा की गई है। बहुत से चांदी के सिक्के ऐसे हैं जिन पर दान देने वाले श्रद्धालुओं के नाम खुदे हुए हैं।मंदिर के साथ ही सुंदर और पवित्र झील प्रवाहित होती है। जिसे पुष्कर झील कहा जाता है। कार्तिक माह में बहुत से श्रद्घालु यहां स्नान के लिए आते हैं। इस झील में स्नान करने के लिए 52 घाट बने हैं। मान्यता है कि प्रत्येक हिंदू को अपने जीवनकाल में एक बार पुष्कर धाम की यात्रा अवश्य करनी चाहिए क्योंकि यह बनारस एवं प्रयाग की तरह ही महत्वपूर्ण है। पुष्कर झील में स्नान करने के बाद ही बद्रीनारायण, जगन्नाथ, रामेश्वरम, द्वारका की यात्रा पूर्ण होती है।

इसके अलावा मंदिर के दीवालों पर भी दानदाताओं के नाम लिखे हैं। यहाँ मंदिर के फर्श पर एक रजत कछुआ है। ज्ञान की देवी सरस्वती के वाहन मोर के चित्र भी मंदिर की शोभा बढ़ाते हैं। यहां गायत्री देवी की एक छोटी प्रतिमा और किनारे ब्रह्माजी की चार मुखों वाली मूर्ति को चौमूर्ति कहा जाता है।

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पौराणिक कथा

भगवान ब्रह्मा ने जगत भलाई के लिए यज्ञ करना चाहा। जिसके लिए उन्हें शुभ मूर्हत का इंतजार था। जब वो शुभ मूर्हत आया तो उनकी पत्नी मां सरस्वती ने उन्हें इन्तजार करने को कहा। सनातन धर्म में कोई भी धार्मिक कार्य पत्नी के अभाव में पूर्ण नहीं हो सकता। अत: यज्ञ के कार्य में विलंब होने लगा।

क्रोध में आ कर ब्रह्मा जी ने ग्वालिन गायत्री नाम की स्त्री से विवाह कर लिया और उन्हें अपने साथ यज्ञ में बैठाया ताकि समय रहते शुभ मूहर्त में यज्ञ का कार्य पूर्ण हो सके। सरस्वती जी ने जब अपने स्थान पर दूसरेी स्त्री को बैठे देखा तो वे क्रोध से भर गई और ब्रह्मा जी को श्राप देते हुए कहा कि आपकी धरती पर कहीं भी और कभी भी  पूजा नहीं होगी।

जब उनका क्रोध थोड़ा शांत हुआ तो देवी-देवताओं ने मां सरस्वती को विनय की कि ब्रह्मा जी को इतना कठोर दण्ड न दें।  देवी-देवताओं की बात का मान रखते हुए मां सरस्वती ने कहा कि ब्रह्मा जी का केवल एक ही मंदिर होगा जो पुष्कर में स्थित होगा और वो केवल यहीं पर पूजे जाएंगे। उसी दिन से पुष्कर धाम ब्रह्मा जी का घर बन गया।

पुष्कर का अर्थ

विद्वानों के अनुसार पुष्कर का अर्थ है ऐसा तालाब जिसका निर्माण फूल से हुआ। पद्म पुराण के अनुसार पुष्कर झील का निर्माण उस समय हुआ जब यज्ञ के स्थान को सुनिश्चित करते समय ब्रह्मा जी के हाथ से कमल का फूल पृथ्वी पर गिर पड़ा। इससे पानी की तीन बूदें पृथ्वी पर गिर गयी, जिसमें एक बूंद पुष्कर में गिर गयी। इसी बूंद से पुष्कर झील का निर्माण हुआ।

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