Category - श्री राम भजन

श्री राम भजन

ठुमक चलत रामचंद्र

ठुमक चलत रामचंद्र बाजत पैंजनियां .. किलकि किलकि उठत धाय गिरत भूमि लटपटाय . धाय मात गोद लेत दशरथ की रनियां .. अंचल रज अंग झारि विविध भांति सो दुलारि .तन मन धन वारि वारि कहत मृदु बचनियां .. विद्रुम से अरुण अधर बोलत मुख मधुर मधुर . सुभग नासिका में......

श्री राम भजन

सुख पाऊँ राम भजन में

मन लाग्यो मेरो यार फ़कीरी में .. जो सुख पाऊँ राम भजन में सो सुख नाहिं अमीरी में मन लाग्यो मेरो यार फ़कीरी में .. भला बुरा सब का सुन लीजै कर गुजरान गरीबी में मन लाग्यो मेरो यार......

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प्रेम मुदित मन से कहो राम

प्रेम मुदित मन से कहो, राम, राम, राम . राम, राम, राम, श्री राम, राम, राम .. पाप कटें, दुःख मिटें, लेत राम नाम . भव समुद्र, सुखद नाव, एक राम नाम .. राम, राम, राम, श्री राम, राम, राम .. परम शांति......

श्री राम भजन

रामजी करेंगे बेड़ा पार

तेरा रामजी करेंगे बेड़ा पार, उदासी मन काहे को करे .. नैया तेरी राम हवाले, लहर लहर हरि आप सम्हाले, हरि आप ही उठायें तेरा भार, उदासी मन काहे को करे .. काबू में मंझधार उसी के, हाथों में......

श्री राम भजन

राम करे सो होय रे मनवा

राम झरोखे बैठ के सब का मुजरा लेत . जैसी जाकी चाकरी वैसा वाको देत .. राम करे सो होय रे मनवा, राम करे सो होये .. कोमल मन काहे को दुखाये, काहे भरे तोरे नैना . जैसी जाकी करनी होगी, वैसा......

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कौशल्या रानी अपने लला

कौशल्या रानी अपने लला को दुलरावे सुनयना रानी अपनी लली को दुलरावे मुख चू्मे और कण्ठ लगावे मन में मोद में मनावे कौशल्या रानी मन में मोद में मनावे शिव ब्रह्मा जाको पार न पावे......

श्री राम भजन

दूलह राम सीय दुलही री

दूलह राम, सीय दुलही री । घन दामिनि बर बरन हरन मन । सुन्दरता नख सिख निबही री ॥ तुलसीदास जोरी देखत सुख ।सोभा अतुल न जात कही री ॥ रूप रासि विरचि बिरंचि मनु । सिला लमनि रति काम......

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रघुवर की सुधि आई

आज मुझे रघुवर की सुधि आई ।  आगे आगे राम चलत हैं । पीछे लछमन भाई । तिनके पीछे चलत जानकी ।बिपत कही ना जाई ॥ सीया बिना मोरी सूनी रसोई । लछमन बिन ठकुराई । राम बिना मोरी सूनी......

श्री राम भजन

राम दो निज चरणों में स्थान

राम दो निज चरणों में स्थान शरणागत अपना जन जान अधमाधम मैं पतित पुरातन । साधन हीन निराश दुखी मन।अंधकार में भटक रहा हूँ । राह दिखाओ अंगुली थाम। राम दो ... सर्वशक्तिमय राम......

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