Category - शिव स्तुति

शिव स्तुति

श्री शिवनीराजनं (शिव आरती – जय गंगाधर)

PlayStop X ॐ जय गंगाधर जय हर जय गिरिजाधीशा । त्वं मां पालय नित्यं कृपया जगदीशा ॥ ॐ हर हर महादेव कैलासे गिरिशिखरे कल्पद्रमविपिने । गुंजति मधुकरपुंजे कुंजवने गहने ॥  ॐ हर हर महादेव कोकिलकूजित खेलत हंसावन ललिता । रचयति कलाकलापं नृत्यति मुदसहिता ॥  ॐ हर हर महादेव तस्मिंल्ललितसुदेशे शाला मणिरचिता । तन्मध्ये हरनिकटे गौरी मुदसहिता ॥  ॐ हर हर महादेव क्रीडा रचयति भूषारंचित निजमीशम्‌ । इंद्रादिक सुर सेवत नामयते शीशम्‌ ॥  ॐ हर हर महादेव बिबुधबधू बहु नृत्यत......

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।। श्री शिव मानस पूजा स्तोत्र ।।

PlayStop X रत्नैः कल्पितमासनं हिमजलैः स्नानं च दिव्याम्बरं नानारत्नविभूषितं मृगमदामोदाङ्कितं चन्दनम्। जातीचम्पकबिल्वपत्ररचितं पुष्पं च धूपं तथा दीपं देव दयानिधे पशुपते हृत्कल्पितं गृह्यताम्॥१॥ सौवर्णे नवरत्नखण्डरचिते पात्रे घृतं पायसं भक्ष्यं पञ्चविधं पयोदधियुतं रम्भाफलं पानकम् । शाकानामयुतं जलं रुचिकरं कर्पूरखण्डोज्ज्वलं ताम्बूलं मनसा मया विरचितं भक्त्या प्रभो स्वीकुरु॥२॥ छत्रं चामरयोर्युगं व्यजनकं चादर्शकं निर्मलम् वीणाभेरिमृदङ्गकाहलकला गीतं च......

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रुद्राष्टकम – महाकवि तुलसीदास कृत

PlayStop X नमामीशमीशान निर्वाणरूपं विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम् । निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहम् ॥1॥  हे भगवन ईशान को मेरा प्रणाम ऐसे भगवान जो कि निर्वाण रूप हैं जो कि महान ॐ के दाता हैं जो सम्पूर्ण ब्रह्माण में व्यापत हैं जो अपने आपको धारण किये हुए हैं जिनके सामने गुण अवगुण का कोई महत्व नहीं, जिनका कोई विकल्प नहीं, जो निष्पक्ष हैं जिनका आकर आकाश के सामान हैं जिसे मापा नहीं जा सकता उनकी मैं उपासना करता हूँ |......

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निर्वाणषटकम्

PlayStop X मनोबुद्ध्यहङ्कार चित्तानि नाहं न च श्रोत्रजिह्वे न च घ्राणनेत्रे । न च व्योम भूमिर्न तेजो न वायुः चिदानन्दरूपः शिवोऽहम् शिवोऽहम् ॥१॥   न च प्राणसंज्ञो न वै पञ्चवायुः न वा सप्तधातुः न वा पञ्चकोशः । न वाक्पाणिपादं न चोपस्थपायु चिदानन्दरूपः शिवोऽहम् शिवोऽहम् ॥२॥ न मे द्वेषरागौ न मे लोभमोहौ मदो नैव मे नैव मात्सर्यभावः । न धर्मो न चार्थो न कामो न मोक्षः चिदानन्दरूपः शिवोऽहम् शिवोऽहम् ॥३॥   न पुण्यं न पापं न सौख्यं न दुःखं न मन्त्रो न......

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शिव महिम्न: स्तोत्रम्

PlayStop X पुष्पदन्त उवाच – महिम्नः पारं ते परमविदुषो यद्यसदृशी। स्तुतिर्ब्रह्मादीनामपि तदवसन्नास्त्वयि गिरः।। अथाऽवाच्यः सर्वः स्वमतिपरिणामावधि गृणन्। ममाप्येष स्तोत्रे हर निरपवादः परिकरः।। १।।  भावार्थ: पुष्पदंत कहते हैं कि हे प्रभु ! बड़े बड़े विद्वान और योगीजन आपके महिमा को नहीं जान पाये तो मैं तो एक साधारण बालक हूँ, मेरी क्या गिनती? लेकिन क्या आपके महिमा को पूर्णतया जाने बिना आपकी स्तुति नहीं हो सकती? मैं ये नहीं मानता क्योंकि अगर ये......

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बिल्वाष्टकम्

PlayStop X त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रियायुधं त्रिजन्म पापसंहारम् एकबिल्वं शिवार्पणं त्रिशाखैः बिल्वपत्रैश्च अच्चिद्रैः कोमलैः शुभैः तवपूजां करिष्यामि एकबिल्वं शिवार्पणं कोटि कन्या महादानं तिलपर्वत कोटयः काञ्चनं क्षीलदानेन एकबिल्वं शिवार्पणं काशीक्षेत्र निवासं च कालभैरव दर्शनं प्रयागे माधवं दृष्ट्वा एकबिल्वं शिवार्पणं इन्दुवारे व्रतं स्थित्वा निराहारो महेश्वराः नक्तं हौष्यामि देवेश एकबिल्वं शिवार्पणं......

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शिवपंचाक्षर स्त्रोतम

PlayStop X नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय भस्माङ्गरागाय महेश्वराय। नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै नकाराय नम: शिवाय।।1।। जो शिव नागराज वासुकि का हार पहिने हुए हैं, तीन नेत्रों वाले हैं, तथा भस्म की राख को सारे शरीर में लगाये हुए हैं, इस प्रकार महान् ऐश्वर्य सम्पन्न वे शिव नित्य–अविनाशी तथा शुभ हैं। दिशायें जिनके लिए वस्त्रों का कार्य करती हैं, अर्थात् वस्त्र आदि उपाधि से भी जो रहित हैं; ऐसे निरवच्छिन्न उस नकार स्वरूप शिव को मैं नमस्कार करता हूँ।......

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शिवाष्टकम – आदि शंकराचार्य रचित

PlayStop X प्रभुं प्राणनाथं विभुं विश्वनाथं जगन्नाथ नाथं सदानंद भाजाम् । भवद्भव्य भूतॆश्वरं भूतनाथं, शिवं शंकरं शंभु मीशानमीडॆ ॥ १ ॥ गलॆ रुंडमालं तनौ सर्पजालं महाकाल कालं गणॆशादि पालम् । जटाजूट गंगॊत्तरंगै र्विशालं, शिवं शंकरं शंभु मीशानमीडॆ ॥ २॥ मुदामाकरं मंडनं मंडयंतं महा मंडलं भस्म भूषाधरं तम् । अनादिं ह्यपारं महा मॊहमारं, शिवं शंकरं शंभु मीशानमीडॆ ॥ ३ ॥ वटाधॊ निवासं महाट्टाट्टहासं महापाप नाशं सदा सुप्रकाशम् । गिरीशं गणॆशं सुरॆशं महॆशं, शिवं......

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द्वादशज्योतिर्लिंगम्

PlayStop X द्वादशज्योतिर्लिंगस्तोत्रम् सौराष्ट्रदेशे विशदेऽतिरम्ये ज्योतिर्मयं चन्द्रकलावतंसम्। भक्तिप्रदानाय कृपावतीर्णं तं सोमनाथं शरणं प्रपद्ये।।1।।  जो भगवान् शंकर अपनी भक्ति प्रदान करने के लिए परम रमणीय व स्वच्छ सौराष्ट्र प्रदेश गुजरात में कृपा करके अवतीर्ण हुए हैं, मैं उन्हीं ज्योतिर्मयलिंगस्वरूप, चन्द्रकला को आभूषण बनाये हुए भगवान् श्री सोमनाथ की शरण में जाता हूं।  श्रीशैलशृंगे विबुधातिसंगे तुलाद्रितुंगेऽपि मुदा वसन्तम्। तमर्जुनं......

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लिंगाष्टकम

PlayStop X लिङ्गाष्टकम् ब्रह्ममुरारिसुरार्चितलिंगम् , निर्मलभासितशोभितलिंगम्।  जन्मजदु:खविनाशकलिंगम्, तत्प्रणमामि सदाशिवलिंगम्।।1।। मैं भगवान् सदाशिव के उस लिंग को प्रणाम करता हूं, जो लिंग ब्रह्मा, विष्णु व अन्य देवताओं से भी पूजित है, जो निर्मल कान्ति से सुशोभित है, तथा जन्म-जरा आदि दु:खों को दूर करने वाला है। देवमुनिप्रवरार्चितलिंगम् , कामदहं करुणाकरलिंगम्। रावणदर्पविनाशनलिंगम्, तत्प्रणमामि सदाशिवलिंगम्।।2।। मैं भगवान् सदाशिव के उस लिंग को......

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