Category - ओशो भजन

ओशो भजन

आनंद ही आनंद बरस रहा

आनंदहीआनंदबरसरहाबलिहारीऐसेसदगुरुकी। धन-धन्यहमारेभागहुए, गुरुकेचरणोंकीखाकहुए; ओशो में दरस हुए प्रभु के; बलिहारी ऐसे सदगुरु की। क्या अनुपम रूप निराला है, साकी है या मधुशाला है; भ्रम भव सागर से पार किया, बलि हारी ऐसे सदगुरु की। क्या ध्यान की......

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अब हृदय में भक्ति के

अब हृदय में भक्ति के ये रंग भर जाने दो, आज कुछ सत्संग में जीवन निखर जाने दो। क्या पता फिर लौटक रआये नआये ये घड़ी, प्रभु चरण में प्रेम के कुछ पुष्प झर जाने दो। नित नई आनंद लीला हो......

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इक ओशो क्या आए

इक ओशो क्या आए, खुद चांद उतर आया। धरती से मिलने को, आकाश उतर आया।। बह की बह की सीहवा, मह कीमह की सी फिजां। पतझड़ को रिझाने को, रितु राज उतर आया।। सूरज छुप गया कहीं, तारे शरमाने......

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ओशो नमन तुम्हें

ओशो नमन तुम्हें हमें जीना सिखा दिया; जीवन के मयखाने में पीना सिखा दिया। व्रत-तीर्थ क्रिया-कर्म से हम को छुड़ा दिया; सीधे-सरल से ध्यान में, हम को डुबा दिया।। भोग-त्याग के सपनों......

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ओशो के दीवाने हैं

ओशोकेदीवानेहैं, आनंदमनातेहैं; हंसतेनाचतेगातेहैं, हमध्यानमेंजातेहैं। नातोहमदुश्मनहैंमनके, नाहीशत्रुअपनेतनके; ना त्यागी ना लोभी धन के, हम हैं रिंद परम जीवन के। नर्क का......

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ध्यान की मदिरा

ध्यान की मदिरा हमें ओशो ने पिलाई है। क्या अजब मस्ती मेरी जिंदगी पे छाई है।। शोर गुल मन के हुए शांत, अनाहत गूंजा। श्याम ने बांसुरी की मीठी धुन सुनाई है।। कभी दुनिया से प्यार......

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धूप में हो गई छांवरे

धूप में हो गई छांवरे, मिल गया अपना गांव रे ओशो जब जीवन में आये, पाया घर का ठांवरे! कर्म हो गया ध्यान रे, खो गईं जग की चाहरे ओशो के आशीष जो बरसे, मंजिल बन गई राह रे! प्रेम ने ऐसे पंख......

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वीणा हृदय की

 भक्तों के तुम प्राण पति हो, ध्यानी जन के तुम हो ध्यान; धन्य हुए हम दर्शन पाकर, हे ओशो, प्यारे भगवान।  वीणा हृदय की छेड़कर, जीवन में उत्सव लाए; अन हद का संगीत सुनाकर, भाग्य हमारे......

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ओशो ने हिमालय से पुकारा

ओशो ने हिमालय से पुकारा, है कोई ले वन हारा। कितने जन्म गंवाए हमने, मिटा न मन का अंधेरा; जब-जब मुक्ति चाही तब-तब, बढ़़ता गया नया घेरा। हाय फिर भी आया ना उजाला, है कोई ले वन......

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